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Rajasthan: पांच दलितों की हत्या केस में सरकार से हाईकोर्ट में अपील की मांग; 40 आरोपियों को किया गया है बरी
Wed, 12 Aug 2026 04:44 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 04:44 PM IST
सार
Rajasthan News: पांच अनुसूचित जाति के लोगों की हत्या और कई अन्य के गंभीर रूप से घायल होने के करीब 11 साल पुराने मामले में सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस फैसले को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले में मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत स्तर पर संज्ञान लेकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अपील भी की जा रही है।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान के करीब 11 साल पुराने पांच अनुसूचित जाति के लोगों की हत्या के मामले में सभी 40 आरोपियों के बरी होने के बाद अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी ने सरकार से हाईकोर्ट में अपील समेत कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
राजस्थान पुलिस के बाद सीबीआई ने संभाली जांच
मामले की शुरुआती जांच राजस्थान पुलिस ने की थी। घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच पूरी कर आरोप-पत्र पेश किया था। इसके बाद करीब 11 वर्षों तक अदालत में मुकदमे की कार्यवाही चली। हाल ही में विशेष न्यायालय (SC/ST), मेड़ता सिटी ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
पांच मौतों के बाद सभी आरोपी बरी, परिवारों में निराशा
सोसायटी ने कहा कि न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करना उसका उद्देश्य नहीं है और न्यायपालिका के प्रति पूरा सम्मान है। हालांकि, पांच लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सभी आरोपियों के बरी होने से पीड़ित परिवारों में निराशा और असुरक्षा की स्थिति पैदा हुई है।
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'आखिर हत्या किसने की?'
इस मामले को लेकर राजेंद्र गुढ़ा के बेटे शुभम गुढ़ा ने भी सवाल उठाए। उन्होंने घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि राजस्थान के 200 विधायकों में से क्या कोई ऐसा नहीं है जो पीड़ितों की आवाज उठा सके। उन्होंने सवाल किया कि 54 विधायक, जिनका प्रतिनिधित्व अनुसूचित जाति के आरक्षित क्षेत्रों से होता है, क्या वे भी पीड़ितों की आवाज नहीं बनेंगे? शुभम गुढ़ा ने कहा कि जिस तरह का हत्याकांड हुआ और बाद में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी बरी हो गए, उससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी को दोषी नहीं ठहराया गया तो आखिर हत्या किसने की? उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाई जाएगी।
हाईकोर्ट में अपील की मांग, सीबीआई से भी कार्रवाई का आग्रह
सोसायटी ने मांग की है कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर कानूनी परीक्षण कराया जाए और निर्धारित अवधि में राजस्थान हाईकोर्ट में अभियोजन अपील दायर की जाए। सीबीआई से भी अपील की कार्रवाई सुनिश्चित कराने तथा वरिष्ठ विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग की गई है।
यह भी पढ़ें: देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत; अस्पताल में किया गया भर्ती
जांच की कमियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को सुरक्षा की मांग
इसके साथ ही जांच में सामने आई कमियों और लोक सेवकों की कथित लापरवाही पर SC/ST Act की धारा 4 के तहत कार्रवाई, अभियोजन की भूमिका की समीक्षा, मृतकों के आश्रित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और पीड़ितों को प्रभावी सुरक्षा देने की मांग की गई है।
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राजस्थान पुलिस के बाद सीबीआई ने संभाली जांच
मामले की शुरुआती जांच राजस्थान पुलिस ने की थी। घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच पूरी कर आरोप-पत्र पेश किया था। इसके बाद करीब 11 वर्षों तक अदालत में मुकदमे की कार्यवाही चली। हाल ही में विशेष न्यायालय (SC/ST), मेड़ता सिटी ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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पांच मौतों के बाद सभी आरोपी बरी, परिवारों में निराशा
सोसायटी ने कहा कि न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करना उसका उद्देश्य नहीं है और न्यायपालिका के प्रति पूरा सम्मान है। हालांकि, पांच लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सभी आरोपियों के बरी होने से पीड़ित परिवारों में निराशा और असुरक्षा की स्थिति पैदा हुई है।
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'आखिर हत्या किसने की?'
इस मामले को लेकर राजेंद्र गुढ़ा के बेटे शुभम गुढ़ा ने भी सवाल उठाए। उन्होंने घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि राजस्थान के 200 विधायकों में से क्या कोई ऐसा नहीं है जो पीड़ितों की आवाज उठा सके। उन्होंने सवाल किया कि 54 विधायक, जिनका प्रतिनिधित्व अनुसूचित जाति के आरक्षित क्षेत्रों से होता है, क्या वे भी पीड़ितों की आवाज नहीं बनेंगे? शुभम गुढ़ा ने कहा कि जिस तरह का हत्याकांड हुआ और बाद में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी बरी हो गए, उससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी को दोषी नहीं ठहराया गया तो आखिर हत्या किसने की? उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाई जाएगी।
हाईकोर्ट में अपील की मांग, सीबीआई से भी कार्रवाई का आग्रह
सोसायटी ने मांग की है कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर कानूनी परीक्षण कराया जाए और निर्धारित अवधि में राजस्थान हाईकोर्ट में अभियोजन अपील दायर की जाए। सीबीआई से भी अपील की कार्रवाई सुनिश्चित कराने तथा वरिष्ठ विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग की गई है।
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जांच की कमियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को सुरक्षा की मांग
इसके साथ ही जांच में सामने आई कमियों और लोक सेवकों की कथित लापरवाही पर SC/ST Act की धारा 4 के तहत कार्रवाई, अभियोजन की भूमिका की समीक्षा, मृतकों के आश्रित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और पीड़ितों को प्रभावी सुरक्षा देने की मांग की गई है।