निकाय-पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद बढ़ी; BJP नेताओं-कार्यकर्ताओं की नजर सरकार पर
राजस्थान में निकाय-पंचायत चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक नियुक्तियों की चर्चा तेज है। ओबीसी आरक्षण लॉटरी और संभावित आचार संहिता से पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं को बोर्ड-आयोगों में नियुक्तियों की उम्मीद है।
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राजस्थान में निकाय और पंचायती राज चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही लंबे समय से लंबित राजनीतिक नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। 13 अगस्त को ओबीसी आरक्षण की लॉटरी और 16 अगस्त के आसपास चुनाव आचार संहिता लागू होने की संभावित स्थिति के बीच भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में बोर्ड, आयोग और अकादमियों में नियुक्तियों को लेकर उम्मीद बढ़ गई है।
हाल में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) में हुई नियुक्तियों के बाद राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सरकार अब अन्य खाली पदों को भरने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती है। भाजपा सरकार के करीब ढाई साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी से जुड़े कई नेता लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं।
11 प्रमुख संस्थाओं में नियुक्तियां
भाजपा सरकार अब तक राजस्थान हेरिटेज कंजर्वेशन अथॉरिटी, किसान आयोग, राज्य पशु कल्याण बोर्ड, सैनिक कल्याण सलाहकार समिति, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास आयोग, देवनारायण बोर्ड, श्री यादे माटी कला बोर्ड, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड, राज्य वित्त आयोग, RPSC और RBSE जैसी प्रमुख संस्थाओं में नियुक्तियां कर चुकी है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अरुण चतुर्वेदी की नियुक्ति 1 अगस्त 2025 को हुई थी। इसके बाद RPSC में प्रो. संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को सदस्य तथा RBSE में हनुमान सिंह राठौड़ को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इन नियुक्तियों के बाद सरकार की ओर से आगे भी राजनीतिक नियुक्तियां किए जाने की चर्चा तेज हुई है।
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आचार संहिता से पहले कितना समय?
निकाय और पंचायत चुनाव के लिए 13 अगस्त को ओबीसी आरक्षण की लॉटरी प्रस्तावित है। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और 16 अगस्त के आसपास आचार संहिता लागू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक नियुक्तियों के लिए सरकार के पास सीमित समय बचा है।
यही वजह है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर है। राजनीतिक नियुक्तियां होने की स्थिति में इन्हें चुनाव से पहले संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं को साधने की कवायद के तौर पर भी देखा जा सकता है।
नौ अहम संस्थाओं के पद अब भी खाली
वहीं, राज्य की करीब नौ महत्वपूर्ण संस्थाओं और आयोगों के शीर्ष पद अब भी खाली बताए जा रहे हैं। इनमें लोकायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। कई आयोगों में लंबे समय तक नियुक्तियां नहीं होने का मामला पहले राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
राजस्थान राज्य महिला आयोग भी लंबे समय से रिक्तियों का सामना कर रहा है। आयोग में अध्यक्ष और तीन सदस्यों के पद खाली होने के कारण करीब 2,900 शिकायतें लंबित होने की बात सामने आई है। इनमें महिलाओं से उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े मामले शामिल हैं।
महिला आयोग की नियुक्ति भी अहम
महिला आयोग एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसे अधिकारियों को तलब करने, पुलिस रिपोर्ट मांगने, मामलों की जांच कराने और कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार है। ऐसे में लंबे समय से पद खाली होने को लेकर सरकार पर जल्द नियुक्तियां करने का दबाव है।
पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष और कांग्रेस नेता रेहाना रियाज चिश्ती ने कहा कि उनका कार्यकाल खत्म हुए करीब 18 महीने हो चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक आयोग में कोई नियुक्ति नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग महिलाओं के खिलाफ अपराधों की निगरानी और उनके मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नियुक्तियां बिना देरी के होनी चाहिए, क्योंकि आयोग में पद खाली रहने से महिला पीड़ितों को सुनवाई और उनके मामलों के समाधान का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है।
चिश्ती ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोग ने 25 हजार मामलों का निस्तारण किया। उन्होंने कहा कि जयपुर में सुनवाई के अलावा आयोग के सदस्य अलग-अलग जिलों में जाकर भी मामलों की सुनवाई करते थे। बीजेपी प्रदेश सचिव एकता अग्रवाल ने कहा कि महिला आयोग का पद काफी अहम है और सरकार समय पर इसमें नियुक्ति भी करेगी।
तीन बड़े बोर्डों पर भी नजर
राजनीतिक हलकों में बीस सूत्री कार्यक्रम एवं समन्वय समिति, राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और राजस्थान राज्य एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड को लेकर भी चर्चा है। पिछली कांग्रेस सरकार में इन संस्थाओं के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था।
पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में बोर्ड, आयोग और अकादमियों में 100 से अधिक राजनीतिक नियुक्तियां की थीं। इनमें चार नेताओं को कैबिनेट मंत्री और 31 से अधिक को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था।
RPSC-RBSE नियुक्तियों पर कांग्रेस के आरोप
RPSC और RBSE में हालिया नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण पद देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि युवाओं को भर्ती परीक्षाओं से ज्यादा अब कथित तौर पर ‘RSS से प्रेरित चयन सूची’ की चिंता करनी पड़ रही है।
वहीं भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता रामलाल शर्मा ने कहा है कि सभी रिक्त पद निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय आने पर भरे जाएंगे। सरकार सक्षम, अनुभवी और जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदारी देने के पक्ष में है।