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Kota News: प्रसूताओं की मौत मामले में चार स्वास्थ्यकर्मियों को और निलंबित किया, जवाबदेही तय करने की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Tue, 12 May 2026 10:49 PM IST
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सार

कोटा में प्रसूताओं की मौत को लेकर राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग कर्मियों को और निलंबित कर दिया है तथा जेके लोन अस्पताल तथा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

Kota News: Four More Health Workers Suspended in Maternal Death Case, Govt Moves to Fix Accountability
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत एवं स्वास्थ्य बिगड़ने के प्रकरण को लेकर राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग कर्मियों को और निलंबित कर दिया है तथा जेके लोन अस्पताल तथा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सोमवार शाम को कोटा पहुंचकर पूरे प्रकरण की जानकारी ली और मंगलवार को भी दिनभर प्रकरण के विभिन्न पहलुओं पर समीक्षा की। इसके बाद इलाज एवं पर्यवेक्षणीय लापरवाही सामने आने पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के आचार्य डॉ. बद्रीलाल तथा सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त जेके लोन अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी मीनाक्षी मीणा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
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प्रकरण में प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी को निभाने में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोटा के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार मरीजों की सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पतालों में जवाबदेही तय की जा रही है तथा संस्थान प्रभारी एवं यूनिट हेड की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी। 

उन्होंने सभी चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे अस्पतालों में रात्रिकालीन समय भी दौरा कर व्यवस्थाओं का नियमित रूप से जायजा लें। अस्पतालों में रिकॉर्ड का संधारण व्यवस्थित एवं गाइड लाइन के अनुसार हो। साथ ही मरीजों को दिए जाने वाले इलाज, दवा एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि के नोट्स प्रोटोकॉल के अनुसार लिखे जाएं।

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