Himachal: सीएम सुक्खू बोले- नशे में संलिप्त 123 सरकारी कर्मियों पर की कार्रवाई, 174 चिट्टा तस्करों को भेजा जेल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वच्छ पानी, शुद्ध हवा, जंगल और नदियां जैसी प्राकृतिक धरोहर हमारे जीवन का आधार हैं। इसलिए प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को रिज मैदान पर आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी वर्गों से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी, शुद्ध हवा, जंगल और नदियां जैसी प्राकृतिक धरोहर हमारे जीवन का आधार हैं इसलिए प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पूरे उत्तर भारत को स्वच्छ जल और शुद्ध वायु उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसके कारण इसे लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ओर से देश को प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके बदले हिमाचल को केंद्र सरकार से कोई प्रतिफल नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को हमें अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पाैधरोपण करने, जल संरक्षण को अपनाने तथा प्लास्टिक के उपयोग से बचने का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता: सीएम
उन्होंने कहा कि बढ़ते वैश्विक तापमान, बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाएं हमें स्पष्ट संदेश दे रही हैं कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्रदेश ने इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए और जान-माल का भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के घावों पर मरहम लगाने का कार्य किया और हर कठिन समय में उनके साथ मजबूती से खड़ी रही। उन्होंने कहा कि हमें यह भी विचार करना होगा कि ऐसी आपदाएं बार-बार क्यों आ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वन हमारी जीवन रेखा हैं और सरकार वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2030 तक वन आवरण को बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के तहत बंजर पहाड़ियों को हरित बनाया जा रहा है।
सरकार अपने हितों की लड़ाई लड़ रही: सुक्खू
सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है तथा नीति आयोग की आगामी बैठक में इन मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य प्रदेश की जनता के दुख-दर्द में सहभागी बनना है और यही व्यवस्था परिवर्तन का मूल भाव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ई-वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा शीघ्र ही हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में 297 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य में दो बायोचार संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें चीड़ की सूखी पत्तियों और अन्य बायोमास से बायोचार का उत्पादन किया जाएगा।
सुक्खू बोले-पंचायत स्तर तक चिट्टा तस्करों और नशा कारोबारियों की पहचान की गई
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध जन आंदोलन शुरू किया है। यह केवल सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी वाला जन अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां पंचायत स्तर तक चिट्टा तस्करों और नशा कारोबारियों की पहचान की गई है। जिन क्षेत्रों में नशे का प्रभाव अधिक है, वहां सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सख्त रूख अपनाते हुए कहा कि यदि चिट्टा माफिया नहीं सुधरे तो उनके खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया है, जिसके तहत 174 चिट्टा तस्करों को जेल भेजा जा चुका है तथा 51 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। नशा कारोबारियों की वित्तीय जांच भी की जा रही है। अब तक 76 ऐसी संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और 17 मामलों में नशा माफिया की संपत्तियों को नष्ट किया गया है।
नशे में संलिप्ट 31 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया
सीएम ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक नशे में संलिप्त पाए गए 123 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 21 पुलिस कर्मियों सहित 10 अन्य कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार नशे की दलदल में फंसे युवाओं को पुनः समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने लोगों से जनगणना कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एंटी-चिट्टा अभियान और पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
सीएम ने पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार दिए
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। प्रथम पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र तथा द्वितीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। विद्यालय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भलेठ, सुजानपुर टीहरा, जिला हमीरपुर को तथा द्वितीय पुरस्कार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सरोग, जिला शिमला और पाइनग्रोव स्कूल, कसौली, जिला सोलन को प्रदान किया गया। शिक्षण संस्थान श्रेणी में सेंट बीड्स कॉलेज नवबहार शिमला को प्रथम पुरस्कार मिला। अस्पताल श्रेणी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। व्यक्तिगत श्रेणी में ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर रिकांगपिओ को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उद्योग श्रेणी में नेस्ले इंडिया लिमिटेड ऊना को प्रथम तथा इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बद्दी को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
मिनी मैराथन के विजेताओं को भी किया सम्मानित
शहरी स्थानीय निकाय श्रेणी में नगर निगम मंडी को द्वितीय पुरस्कार मिला। ग्राम पंचायत श्रेणी में प्रथम पुरस्कार ग्राम पंचायत शीला भुटेड़, धर्मशाला, जिला कांगड़ा को तथा द्वितीय पुरस्कार ग्राम पंचायत चौगान, बैजनाथ, जिला कांगड़ा को प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने मिनी मैराथन की विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने नगर निगम हमीरपुर के अधिकारियों को ई-वाहनों की चाबियां भी सौंपीं तथा जनगणना प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, मुख्य सचिव केके पंत, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन सुशील सिंगला, अभिनेता एवं स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर रोहताश गौड़ तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने चिनार पाैधरोपण अभियान के प्रथम चरण का शुभारंभ किया
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ओक ओवर शिमला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चिनार पाैधरोपण अभियान के प्रथम चरण का शुभारंभ किया। अपनी घनी छाया, सुंदरता और पर्यावरणीय महत्व के लिए प्रसिद्ध चिनार का वृक्ष शिमला की जलवायु के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस पहल का उद्देश्य हरित क्षेत्र का विस्तार करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वानिकी, पर्यावरण प्रबंधन एवं ईको-टूरिज्म से संबंधित महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के 75 ईको-टूरिज्म स्थलों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया, जिसमें राज्य के प्रमुख पर्यावरणीय पर्यटन स्थलों का आकर्षक परिचय प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रकाशन वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं तथा पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकें वन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और ईको-टूरिज्म के क्षेत्रों में ज्ञान और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर के विद्यार्थियों और चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के बच्चों को पौधे भी भेंट किए। इस अवसर पर विधायक विनोद सुल्तानपुरी, सुदर्शन बबलू और हरदीप बावा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केएस खाची, एचपीसीसी के महासचिव विनोद जिंटा, मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
नशामुक्ती के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : राज्यपाल
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने स्वच्छ पर्यावरण और नशामुक्त हिमाचल के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध वायु से समृद्ध राज्य है। उन्होंने भावी पीढ़ियों के हित में प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर और सौंदर्य के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कभी भी पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त की और कहा कि नशे से युवाओं को बचाने के लिए पुलिस सराहनीय प्रयास कर रही है। नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सभी नागरिक मिलकर प्रयास करें, तो हिमाचल प्रदेश को पूर्णतः नशामुक्त राज्य बन सकता है। स्वच्छता की शुरुआत घर से होनी चाहिए और इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना आवश्यक है। स्वच्छ जीवनशैली अपनाने से स्वस्थ एवं सतत् समाज का निर्माण संभव है। राज्यपाल ने सभी प्रतिभागियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं नशामुक्त जीवन के प्रति समर्पित रहने की शपथ दिलाई। उन्होंने हरित हिमाचल एवं चिट्टा-मुक्त हिमाचल कैंपेन वॉल पर हस्ताक्षर कर दोनों अभियानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस मौके पर महापौर सुरेंद्र चौहान, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला, निदेशक जनगणना संचालन दीप शिखा शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे।