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Shimla News: जंक फूड के सेवन से मासिक चक्र में आ रही है असामान्यता
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सार
शिमला के खलीनी स्कूल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल ने छात्राओं को आहार, मासिक धर्म और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने पीसीओडी, एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव हेतु संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता बताई।
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विस्तार
अपराजिता कार्यक्रम में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल ने खलीनी स्कूल में छात्राओं का किया मार्गदर्शन
आहार में शामिल करें हरी सब्जियां और दालें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। समय के साथ हमारे खान-पान में बदलाव आ गया है। ऐसे में महिलाओं और स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को अपने आहार में हरी सब्जियां, फल, चुकंदर और दालें शामिल करनी चाहिए।
युवतियां घर के खाने के बजाय जंक फूड का सेवन ज्यादा करती हैं। इस वजह से मासिक चक्र में असामान्यता आ रही है। यह जानकारी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल खलीनी में अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल ने दी। कमला नेहरू अस्पताल में कार्यरत डॉ. पारूल ने स्कूल की छात्राओं को मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरूक किया। उन्होंने छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर, एनीमिया और पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर महिला का मासिक चक्र अलग होता है जोकि 28 से 35 दिन का होता है। मासिक चक्र छह से दस दिन पहले या बाद में आता है तो यह असामान्य है। ऐसे में चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है, ताकि समय पर उपचार हो सकें।
उन्होंने छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होने और रक्तस्त्राव (खून बहना) में असामान्यता होने पर चिकित्सक की सलाह लेने के लिए कहा। कपड़े की जगह सेनेटरी पैड इस्तेमाल करने की सलाह दी। आज कम उम्र में ही लड़कियों में पीसीओडी की समस्या हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण लाइफ स्टाइल है। पीसीओडी के लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, शरीर में सामान्य से ज्यादा बाल बढ़ना, कील मुंहासे होना और भारी रक्तस्राव शामिल हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत महिला रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, संतुलित आहार लेने और कम से कम आठ घंटे की नींद लेने की सलाह दी। डॉ. पारूल ने कहा कि हमें समय-समय पर अपना बॉडी मास इंडैक्स (बीएमआई) जांच करवानी चाहिए। इससे उम्र के हिसाब से लंबाई और वजन को जांचा जाता है। सामान्य बीएमआई 18.5 होता है।
ऐसे कार्यक्रमों से आती है जागरूकता : राकेश
कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं इतिहास के प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने कार्यक्रम में छात्राओं को मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरूक करने के लिए डॉ. पारुल का आभार व्यक्त किया। साथ ही छात्राओं को इस तरह के कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
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आहार में शामिल करें हरी सब्जियां और दालें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। समय के साथ हमारे खान-पान में बदलाव आ गया है। ऐसे में महिलाओं और स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को अपने आहार में हरी सब्जियां, फल, चुकंदर और दालें शामिल करनी चाहिए।
युवतियां घर के खाने के बजाय जंक फूड का सेवन ज्यादा करती हैं। इस वजह से मासिक चक्र में असामान्यता आ रही है। यह जानकारी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल खलीनी में अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल ने दी। कमला नेहरू अस्पताल में कार्यरत डॉ. पारूल ने स्कूल की छात्राओं को मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरूक किया। उन्होंने छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर, एनीमिया और पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर महिला का मासिक चक्र अलग होता है जोकि 28 से 35 दिन का होता है। मासिक चक्र छह से दस दिन पहले या बाद में आता है तो यह असामान्य है। ऐसे में चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है, ताकि समय पर उपचार हो सकें।
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उन्होंने छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होने और रक्तस्त्राव (खून बहना) में असामान्यता होने पर चिकित्सक की सलाह लेने के लिए कहा। कपड़े की जगह सेनेटरी पैड इस्तेमाल करने की सलाह दी। आज कम उम्र में ही लड़कियों में पीसीओडी की समस्या हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण लाइफ स्टाइल है। पीसीओडी के लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, शरीर में सामान्य से ज्यादा बाल बढ़ना, कील मुंहासे होना और भारी रक्तस्राव शामिल हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत महिला रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, संतुलित आहार लेने और कम से कम आठ घंटे की नींद लेने की सलाह दी। डॉ. पारूल ने कहा कि हमें समय-समय पर अपना बॉडी मास इंडैक्स (बीएमआई) जांच करवानी चाहिए। इससे उम्र के हिसाब से लंबाई और वजन को जांचा जाता है। सामान्य बीएमआई 18.5 होता है।
ऐसे कार्यक्रमों से आती है जागरूकता : राकेश
कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं इतिहास के प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने कार्यक्रम में छात्राओं को मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरूक करने के लिए डॉ. पारुल का आभार व्यक्त किया। साथ ही छात्राओं को इस तरह के कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।