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Himachal: 80 की उम्र में नया हुनर, पोते-पोतियों के लिए टिफिन, पेंसिल बॉक्स बनाना सीख रहे बुजुर्ग

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 25 Mar 2026 05:00 AM IST
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सार

हाथ की बुनाई से लेकर मशीन की सिलाई तक की बारीकियां सीखकर ये अपने पोते-पोतियों के लिए टिफिन कवर, पेंसिल बॉक्स, बैग आदि तैयार कर रहे हैं।

Himachal: Learning a New Skill at 80: Elderly Person Learns to Make Tiffin Boxes and Pencil Cases for Grandchi
80 की उम्र में नया हुनर। - फोटो : संवाद
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विस्तार

उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग आरामदायक समय बिताना पसंद करते हैं, वहीं राजधानी के 70 बुजुर्ग ऐसे हैं जो इस उम्र में नया हुनर सीख रहे हैं। हाथ की बुनाई से लेकर मशीन की सिलाई तक की बारीकियां सीखकर ये अपने पोते-पोतियों के लिए टिफिन कवर, पेंसिल बॉक्स, बैग आदि तैयार कर रहे हैं। केंद्र सरकार की प्रोडक्टिव एजिंग योजना में जिला कल्याण विभाग राजधानी के बुजुर्गाें को यह प्रशिक्षण दे रहा है। शोघी स्थित डे केयर सेंटर में दिए गए पहले चरण के प्रशिक्षण में आसपास के गांवों के 70 से ज्यादा बुजुर्ग पहुंचे। इनमें कई महिलाएं भी थीं, जिन्होंने 70 साल की उम्र में आकर सिलाई-बुनाई की बारीकियां सीखीं। सात दिन तक सभी बुजुर्गाें को प्रशिक्षण दिया गया।

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इस दौरान बुजुर्गाें ने न सिर्फ हाथ से बुनाई सीखी बल्कि सिलाई मशीन चलाकर शेविंग किट, ट्रैवल बैग, लेडीज पर्स, वॉल किट, बोतल कवर और छोटे बड़े बैग भी तैयार कर दिए। शिविर की शुरुआत में कई बुुजुर्ग सुई में धागा तक नहीं डाल पा रहे थे। इस पर बुजुर्गाें ने एक दूसरे पर मजाक भी किया लेकिन साथ ही इसे चुनौती मानते ही सीखने की जिद्द भी ठानी। सात दिन बाद अपने हाथों से बनाए उत्पाद तैयार कर सभी खुश थे। कई बुजुर्ग बोले कि अब बाजार से बैग नहीं लेने पड़ेंगे। पोते-पोतियों को टिफिन कवर, पैंसिल बॉक्स गिफ्ट करेंगे। जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं है। केंद्र की इस योजना के तहत यह शिविर लगाया गया जिसमें क्षेत्र के बुजुर्गाें ने काफी भागीदारी दिखाई। यह सिलसिला अब जारी रहेगा।

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84 साल के हीरानंद शांडिल बोले-सीखने की कोई उम्र नहीं
शोघी के कोट गांव निवासी 84 वर्षीय हीरा नंद शांडिल ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं है। अब ज्यादातर बुजुर्ग घर पर अकेले रहते हैं। शिविर में आकर नई चीजें सीखीं और एक दूसरे के साथ का भी आनंद लिया। एक अन्य महिला गीता देवी ने कहा कि बच्चे मोबाइल में व्यस्त है। ऐसे में बुजुर्ग अकेले हैं। अब हाथ से कई चीजें बनाना सीखा है जिसे अब घर पर तैयार करेंगे। इससे अकेलापन भी दूर होगा।

बुजुर्गाें-युवाओं के बीच की खाई होगी कम
बुजुर्गाें और युवाओं के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने इंटर जेनरेशनल बॉन्डिंग योजना शुरू की है। सभी जिलों में इसके तहत बुजुर्गाें और युवाओं को एक मंच पर लाकर खेलकूद, चित्रकला, संगीत आदि प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। जिला शिमला में आने वाले दिनों में हर तहसील स्तर पर यह कार्यक्रम होंगे। इसमें ग्रामीण बुजुर्गाें को भी शामिल किया जा रहा है।

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