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हिमाचल: तीसरे बच्चे के जन्म पर भी महिला को 180 दिन का मातृत्व अवकाश, स्वास्थ्य विभाग ने अवकाश को दी मंजूरी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 20 Mar 2026 10:31 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीसरे बच्चे के जन्म पर 180 दिनों के मातृत्व अवकाश को मंजूरी दे दी है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Woman Entitled to 180 Days of Maternity Leave Even Upon the Birth of a Third Child
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

स्वास्थ्य विभाग ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए याचिकाकर्ता को तीसरे बच्चे के जन्म पर 180 दिनों के मातृत्व अवकाश को मंजूरी दे दी है। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशक की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है। हलफनामे में बताया गया है कि अदालती आदेश की अनुपालना लंबित एसएलपी के अंतिम परिणाम के अधीन होगी। विभाग ने यह कदम याचिकाकर्ता की ओर से दायर अवमानना याचिका के बाद उठाया है। 

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याचिकाकर्ता अर्चना शर्मा ने वर्ष 2025 में अपने मातृत्व अवकाश के अधिकार के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने 30 जुलाई 2025 को उनके पक्ष में निर्णय सुनाया था। इसके बाद विभाग ने इसके खिलाफ एलपीए दायर कर दी थी। 

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इसके बाद डबल बेंच की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सरकार ने कानूनी राय ली। 20 फरवरी 2026 को प्रशासनिक विभाग (स्वास्थ्य) से मिली मंजूरी के बाद, निदेशक स्वास्थ्य सेवाओं ने 5 मार्च 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए।

टीचर टेस्ट मामले में आज आ सकता है फैसला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीएसई संबद्ध सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों के चयन के लिए अनिवार्य परीक्षा करवाने को लेकर शुक्रवार को फैसला करेगा। वीरवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और सीबीएसई की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से इस टेस्ट परीक्षा पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि यह परीक्षा कनिष्ठ और वरिष्ठ शिक्षकों के बीच भेदभाव और असमानता पैदा कर रही है,जो कि संविधान की धारा 14 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वह नीति बनाने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन गलत मापदंडों के खिलाफ हैं जो आने वाले वर्षों में विसंगतियां पैदा करेंगे। इसे लेकर एक अन्य मामला भी हाईकोर्ट में दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि टीजीटी हिंदी और संस्कृत शिक्षकों के लिए आवेदन फार्म भरने में कोई प्रावधान नहीं है।

इस पर स्पष्टता जानने के लिए प्रदेश सरकार ने अदालत से मामले को शुक्रवार को सुनने की मांग की, जिसे न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया। ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट की ओर से यह याचिका दायर की गई है।

अपमानजनक भाषा केस में भरमौरी बरी 
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर दायर मामले में कांग्रेस नेता ठाकुर सिंह भरमौरी को आरोपों से बरी कर दिया है। याचिकाकर्ता भरमौरी ने 3 अक्तूबर 2021 को पुलिस स्टेशन भरमौर में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर चल रहे मामले को रद्द करने की मांग की थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि इस कार्रवाई को जारी रखने से न केवल याचिकाकर्ता को अनावश्यक परेशानी होगी, बल्कि लंबे मुकदमे से भी गुजरना पड़ेगा। रिकॉर्ड पर कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे यह पता चले कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर प्रधानमंत्री का अपमान किया। भाजपा के एक पदाधिकारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को से शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था किप्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं।
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