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हिमाचल: चार मेडिकल कॉलेजों में सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की होंगी अनुबंध आधार पर नियुक्तियां, इतना मिलेगा मानदेय

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Apr 2026 05:00 AM IST
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सार

 स्वास्थ्य विभाग ने सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को क्लिनिकल और और नॉन-क्लिनिकल विषयों में अनुबंध आधार पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। 

Retired Professors to be Appointed on a Contractual Basis at Four Medical Colleges
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी पूरी होगी(सांकेतिक)। - फोटो : Freepik
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को क्लिनिकल और और नॉन-क्लिनिकल विषयों में अनुबंध आधार पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में 2 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। राज्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अनुभवी प्रोफेसर की कमी देखी जा रही है।

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अंतरिम व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की सेवाएं लेने का निर्णय
इससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है, ताकि संस्थानों का संचालन सुचारू रूप से जारी रह सके।यह नियुक्तियां फिलहाल चार नए मेडिकल कॉलेजों नाहन, नेरचौक, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रहेंगी। इन कॉलेजों में नियुक्त किए जाने वाले सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को प्रतिमाह 2.50 लाख रुपये का निश्चित मानदेय दिया जाएगा।

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नियुक्तियां सरकार की पूर्व स्वीकृति के बाद ही होगी
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। इसके तहत योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे और चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों व नीति के अनुसार पूरी की जाएगी। सभी नियुक्तियां सरकार की पूर्व स्वीकृति के बाद ही जारी की जाएंगी।

अनुभवी प्रोफेसरों की वापसी से बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा
नए मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय को राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अनुभवी प्रोफेसरों की वापसी से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।

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