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हिमाचल: अनिरुद्ध पर बरसे विक्रमादित्य सिंह, बोले- मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता जैसे NHAI अधिकारियों का किया
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 14 Jan 2026 08:51 PM IST
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सार
Vikramaditya Singh vs Anirudh Singh: लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वे वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकते, जैसा घायल एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ था। पढ़ें पूरी खबर...
Vikramaditya Singh vs Anirudh Singh
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
बाहरी राज्यों के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों पर विवादित बयान के बाद सुक्खू सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता जैसे एनएचएआई के अधिकारियों का किया। बता दें कि विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की ऐसा कुछ नहीं है कि प्रतिक्रिया आई। इसके बाद अब अनिरुद्ध ने कहा तो विक्रमादित्य ने उनके पुराने विवाद पर घेरने का प्रयास किया।
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उधर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह चारों तरफ घिर गए हैं। आईएएस और आईपीएस अफसर भी विरोध में उतर आए हैं। बुधवार को पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विक्रमादित्य सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयानों से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहर से हैं। उन्होंने यह तक कह दिया कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ के तौर पर काम करते हैं। वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। साल 2016 के बाद तो प्रदेश में नए आईएएस अधिकारी भी नहीं आए हैं। यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनते हैं। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी बाहरी राज्यों में काम कर रहे हैं।
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वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मंत्री जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह तजुर्बे, रुतबे और उम्र में उनसे बड़े हैं। मैं, उनका सम्मान करता हूं। साथ ही अधिकारियों का भी। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि, मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा घायल एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ था। अपने फेसबुक अकाउंट पर वीडियो जारी कर विक्रमादित्य सिंह ने कहा- मैं जो कहता हूं, वह साफ शब्दों में कहता हूं। हिमाचल प्रदेश के लिए अगर मुझे किसी के सामने बुरा भी बनना पड़े तो मैं तैयार हूं। उप मुख्यमंत्री ने जो बात कही, उन्होंने तो उसे सेकंड किया है।
आईएएस एसोसिएशन ने कहा- भेदभाव को बढ़ावा देती हैं ऐसी टिप्पणी
हिमाचल प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने मंत्री की टिप्पणी पर गहरी चिंता जताते हुए इसे न केवल अनुचित बताया, बल्कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुंचने की आशंका भी जाहिर की है। आईएएस एसोसिएशन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अधिकारियों के मूल राज्य के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती हैं, जो सांविधानिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल में कार्यरत सभी आईएएस अधिकारी, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से, संविधान की ओर से गठित ऑल इंडिया सर्विसेज के सदस्य हैं। उनका प्रथम कर्तव्य जनता की निष्पक्ष सेवा करना, निर्वाचित सरकार की नीतियों को ईमानदारी से लागू करना और कानून का शासन सुनिश्चित करना है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अधिकारियों की गरिमा, मनोबल और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही उच्च स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक विमर्श नीतियों और परिणामों तक सीमित रहे, न कि अधिकारियों की व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर केंद्रित हो। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार के साथ सहयोग और रचनात्मक कार्य संबंधों के लिए प्रतिबद्ध है।
हिमाचल प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने मंत्री की टिप्पणी पर गहरी चिंता जताते हुए इसे न केवल अनुचित बताया, बल्कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुंचने की आशंका भी जाहिर की है। आईएएस एसोसिएशन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अधिकारियों के मूल राज्य के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती हैं, जो सांविधानिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल में कार्यरत सभी आईएएस अधिकारी, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से, संविधान की ओर से गठित ऑल इंडिया सर्विसेज के सदस्य हैं। उनका प्रथम कर्तव्य जनता की निष्पक्ष सेवा करना, निर्वाचित सरकार की नीतियों को ईमानदारी से लागू करना और कानून का शासन सुनिश्चित करना है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अधिकारियों की गरिमा, मनोबल और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही उच्च स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक विमर्श नीतियों और परिणामों तक सीमित रहे, न कि अधिकारियों की व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर केंद्रित हो। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार के साथ सहयोग और रचनात्मक कार्य संबंधों के लिए प्रतिबद्ध है।
हिमाचली और गैर-हिमाचली अफसरों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश : आईपीएस एसोसिएशन
हिमाचल प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने मंत्री के बयान हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अवांछित विभाजन पैदा करने वाला करार दिया। एसोसिएशन ने कहा कि इस बयान से पुलिस सेवा के मनोबल को नुकसान पहुंचा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने और भविष्य में ऐसे बयान दोहराए न जाने की मांग की है।
एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि मंत्री के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाएं। आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान की देन हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में निष्पक्ष, पेशेवर व एकीकृत प्रशासन उपलब्ध कराना है। आईपीएस अधिकारी, चाहे वे किसी भी कैडर या राज्य से हों, हिमाचल प्रदेश की जनता की सेवा समान निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी अधिकारी की मंशा पर उसके मूल या जन्मस्थान के आधार पर सवाल उठाना तथ्यात्मक रूप से भी गलत है।
हिमाचल प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने मंत्री के बयान हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अवांछित विभाजन पैदा करने वाला करार दिया। एसोसिएशन ने कहा कि इस बयान से पुलिस सेवा के मनोबल को नुकसान पहुंचा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने और भविष्य में ऐसे बयान दोहराए न जाने की मांग की है।
एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि मंत्री के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाएं। आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान की देन हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में निष्पक्ष, पेशेवर व एकीकृत प्रशासन उपलब्ध कराना है। आईपीएस अधिकारी, चाहे वे किसी भी कैडर या राज्य से हों, हिमाचल प्रदेश की जनता की सेवा समान निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी अधिकारी की मंशा पर उसके मूल या जन्मस्थान के आधार पर सवाल उठाना तथ्यात्मक रूप से भी गलत है।