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डूरंड कप की कहानी: 138 साल का ऐतिहासिक सफर, शिमला से शुरू हुआ था एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट

Sat, 18 Jul 2026 04:22 PM IST
शोभित चतुर्वेदी एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Sat, 18 Jul 2026 04:22 PM IST
सार

एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप का आगामी संस्करण अगले कुछ दिनों में शुरू होने जा रहा है। इस टूर्नामेंट का इतिहास भी अपने आप में काफी खास है। आइए जानते हैं डूरंड कप की कहानी...

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Story of the Durand Cup A historic 138-year journey Asia's oldest football tournament began in Shimla
डूरंड कप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि विरासत बन जाते हैं। डूरंड कप भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने पिछले 138 वर्षों में केवल विजेताओं को नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की पहचान और उसकी संस्कृति को भी आकार दिया है। 1888 में शिमला के अन्नाडेल मैदान में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट आज एशिया का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल आयोजनों में से एक माना जाता है।
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ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मॉर्टिमर डूरंड की पहल पर शुरू हुई इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सैनिकों के बीच अनुशासन, टीम भावना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना था। शुरुआती वर्षों में इसमें केवल सैन्य रेजीमेंटों की टीमें हिस्सा लेती थीं। हिमालय की तलहटी में बसे अन्नाडेल मैदान पर होने वाले मुकाबले सैन्य परंपरा और खेल भावना का प्रतीक माने जाते थे। समय के साथ भारतीय फुटबॉल का विस्तार हुआ और डूरंड कप ने भी खुद को बदलते दौर के अनुरूप ढाल लिया। सैन्य दायरों से निकलकर इसने भारतीय क्लबों के लिए अपने दरवाजे खोले और यहीं से इसकी कहानी एक नए मोड़ पर पहुंची।
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Story of the Durand Cup A historic 138-year journey Asia's oldest football tournament began in Shimla
डूरंड कप - फोटो : अमर उजाला
मोहम्मडन स्पोर्टिंग डूरंड कप जीतने वाला पहला भारतीय क्लब
वर्ष 1925 में मोहन बागान डूरंड कप में हिस्सा लेने वाला पहला भारतीय नागरिक क्लब बना। हालांकि वह खिताब जीतने में सफल नहीं हो सका, लेकिन उसने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्लब भी देश के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल मंच पर बराबरी से मुकाबला कर सकते हैं। डूरंड कप के इतिहास का सबसे यादगार अध्याय 1940 में लिखा गया। दिल्ली के इरविन एम्फीथिएटर में खेले गए फाइनल में कोलकाता के मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब ने रॉयल वारविकशायर रेजीमेंट को 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। इसके साथ ही मोहम्मडन स्पोर्टिंग डूरंड कप जीतने वाला पहला भारतीय नागरिक क्लब बन गया। उस मुकाबले को देखने के लिए करीब एक लाख दर्शक पहुंचे थे, जो उस
दौर के सबसे बड़े खेल आयोजनों में गिना जाता है।

स्वतंत्रता के बाद मोहन बागान, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन स्पोर्टिंग जैसे क्लबों ने डूरंड कप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। खासकर कोलकाता की फुटबॉल संस्कृति और यहां के समर्थकों के जुनून ने इस टूर्नामेंट को नई पहचान दी। डूरंड कप की एक और खासियत यह रही कि आधुनिकता को अपनाने के बावजूद उसने अपनी जड़ों से कभी समझौता नहीं किया। सेना और सेवा टीमों की निरंतर भागीदारी ने टूर्नामेंट में अनुशासन, सम्मान और खेल भावना की उस परंपरा को जीवित रखा, जिसके साथ इसकी शुरुआत हुई थी।

Story of the Durand Cup A historic 138-year journey Asia's oldest football tournament began in Shimla
डूरंड कप - फोटो : अमर उजाला
कोलकाता बना केंद्र
वर्ष 2019 में पूर्वी कमान के संरक्षण में डूरंड कप का नया अध्याय शुरू हुआ, जब इसका केंद्र कोलकाता बना। पूर्वी कमान के संरक्षण में टूर्नामेंट का नया विस्तार हुआ। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई शहर अब इसकी मेजबानी करते हैं और भारतीय क्लबों के साथ सेना और सेवा टीमें भी लगातार हिस्सा लेती हैं। इसके बाद यह प्रतियोगिता एक शहर तक सीमित न रहकर बहु-राज्य और बहु-शहर आयोजन में बदल गई। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई शहरों तक इसकी पहुंच ने इसे एक वास्तविक राष्ट्रीय फुटबॉल उत्सव का स्वरूप दिया। 138 वर्षों की यात्रा में दु्रंड कप ने दो विश्व युद्ध, स्वतंत्रता आंदोलन, विभाजन और भारतीय फुटबॉल के बदलते दौर को देखा है। लेकिन हर दौर में उसने खुद को समय के अनुरूप ढाला और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी। यही कारण है कि डूरंड कप केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास की एक जीवंत और गौरवशाली संस्था है।
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एक नजर में डूरंड कप
  • स्थापना वर्ष : 1888
  • स्थापना स्थल : अन्नाडेल, शिमला
  • संस्थापक : सर मॉर्टिमर दु्रंड
  • पहचान : एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट
  • वर्तमान संरक्षक : भारतीय सेना की पूर्वी कमान
  • वर्तमान स्वरूप : बहु-राज्य और बहु-शहर प्रतियोगिता

पहली भारतीय दस्तक, पहली जीत
  • 1925: मोहन बागान बना डूरंड कप में खेलने वाला पहला भारतीय नागरिक क्लब।
  • 1940: मोहम्मडन स्पोर्टिंग बना खिताब जीतने वाला पहला भारतीय क्लब।
  • फाइनल में रॉयल वारविकशायर रेजीमेंट को 2-1 से हराया।
  • मुकाबला देखने पहुंचे थे करीब एक लाख दर्शक।

Story of the Durand Cup A historic 138-year journey Asia's oldest football tournament began in Shimla
डूरंड कप - फोटो : अमर उजाला
डूरंड कप की तीन ऐतिहासिक ट्रॉफियां
  • डूरंड कप
  • प्रेसिडेंट्स कप
  • शिमला ट्रॉफी
  • डूरंड कप जीतने वाली टीम को ये तीनों ट्रॉफियां प्रदान की जाती हैं, जो विश्व फुटबॉल में एक अनूठी परंपरा मानी जाती है।
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