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रोनाल्डो को आखिर हुआ क्या: मेजर टूर्नामेंट में पुर्तगाल के सबसे बड़े सिरदर्द कैसे बने CR7? आंकड़े चौंकाने वाले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:59 PM IST
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सार
फीफा विश्वकप 2026 में डीआर कांगो के खिलाफ पुर्तगाल के पहले मुकाबले के बाद क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। 41 वर्षीय स्टार स्ट्राइकर पूरे मैच में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे और पुर्तगाल को 1-1 की निराशाजनक बराबरी से संतोष करना पड़ा। पिछले 10 मेजर टूर्नामेंट मैचों में एक भी गोल नहीं कर पाने वाले रोनाल्डो को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या वह अब भी पुर्तगाल के लिए उतने ही उपयोगी हैं जितने कभी हुआ करते थे।
रोनाल्डो
- फोटो : Ani
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विस्तार
क्रिस्टियानो रोनाल्डो को आखिर हुआ क्या? यह सवाल इस समय फुटबॉल जगत में सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। कभी अपने दम पर मैच का रुख बदल देने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो अब पुर्तगाल की सबसे बड़ी चिंता बनते नजर आ रहे हैं। फीफा विश्वकप 2026 के पहले ही मुकाबले में डीआर कांगो जैसी टीम के खिलाफ पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी पर रोक दिया गया और इस मैच के बाद चर्चा जीत या हार की नहीं, बल्कि रोनाल्डो के प्रदर्शन की होने लगी। 41 साल की उम्र में रिकॉर्ड छठा विश्वकप खेल रहे रोनाल्डो के लिए यह मैच किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पूरे 90 मिनट मैदान पर रहने के बावजूद वह गोल नहीं कर सके और उनका प्रभाव भी लगभग नदारद रहा।
थिएरी हेनरी
- फोटो : ANI
हेनरी ने उठाया सबसे बड़ा सवाल
फ्रांस को 1998 का विश्वकप जिताने वाले महान स्ट्राइकर थिएरी हेनरी ने मैच के बाद रोनाल्डो के खेल पर सवाल उठाए। हेनरी ने कहा, 'टीम को गोल की जरूरत है, सिर्फ आपको गोल करने की जरूरत नहीं है।' यह बयान रोनाल्डो की मौजूदा स्थिति को बखूबी बयान करता है। हेनरी का मानना है कि रोनाल्डो कई बार ऐसी रनिंग कर रहे हैं जो टीम के लिए जगह बनाने के बजाय खुद उनके लिए अवसर बनाने की कोशिश लगती है।
कांगो के खिलाफ बेहद फीका प्रदर्शन
डीआर कांगो के खिलाफ रोनाल्डो के आंकड़े चौंकाने वाले रहे।
किसी भी स्ट्राइकर के लिए यह आंकड़े निराशाजनक माने जाएंगे, लेकिन जब बात फुटबॉल इतिहास के सबसे महान गोल स्कोररों में से एक की हो, तो सवाल और बड़े हो जाते हैं। पुर्तगाल ने मैच में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा। ब्रूनो फर्नांडिस, विटिन्हा और बर्नार्डो सिल्वा जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में रचनात्मकता की कोई कमी नहीं थी। टीम ने कांगो की तुलना में कहीं ज्यादा पास खेले, लेकिन अंतिम तीसरे हिस्से में धार नजर नहीं आई।
फ्रांस को 1998 का विश्वकप जिताने वाले महान स्ट्राइकर थिएरी हेनरी ने मैच के बाद रोनाल्डो के खेल पर सवाल उठाए। हेनरी ने कहा, 'टीम को गोल की जरूरत है, सिर्फ आपको गोल करने की जरूरत नहीं है।' यह बयान रोनाल्डो की मौजूदा स्थिति को बखूबी बयान करता है। हेनरी का मानना है कि रोनाल्डो कई बार ऐसी रनिंग कर रहे हैं जो टीम के लिए जगह बनाने के बजाय खुद उनके लिए अवसर बनाने की कोशिश लगती है।
कांगो के खिलाफ बेहद फीका प्रदर्शन
डीआर कांगो के खिलाफ रोनाल्डो के आंकड़े चौंकाने वाले रहे।
किसी भी स्ट्राइकर के लिए यह आंकड़े निराशाजनक माने जाएंगे, लेकिन जब बात फुटबॉल इतिहास के सबसे महान गोल स्कोररों में से एक की हो, तो सवाल और बड़े हो जाते हैं। पुर्तगाल ने मैच में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा। ब्रूनो फर्नांडिस, विटिन्हा और बर्नार्डो सिल्वा जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में रचनात्मकता की कोई कमी नहीं थी। टीम ने कांगो की तुलना में कहीं ज्यादा पास खेले, लेकिन अंतिम तीसरे हिस्से में धार नजर नहीं आई।
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आंकड़े बता रहे हैं संघर्ष की कहानी
रोनाल्डो का हालिया रिकॉर्ड उनके संघर्ष को और स्पष्ट करता है। लगातार 10 बड़े टूर्नामेंट मुकाबलों में गोल नहीं कर पाना उस खिलाड़ी के लिए बेहद असामान्य है जिसने अपने करियर में सैकड़ों गोल दागे हैं।
रोनाल्डो का हालिया रिकॉर्ड उनके संघर्ष को और स्पष्ट करता है। लगातार 10 बड़े टूर्नामेंट मुकाबलों में गोल नहीं कर पाना उस खिलाड़ी के लिए बेहद असामान्य है जिसने अपने करियर में सैकड़ों गोल दागे हैं।
उम्र का असर अब साफ दिख रहा है
एक समय था जब रोनाल्डो अपनी रफ्तार, ड्रिब्लिंग और एथलेटिक क्षमता से डिफेंडरों के लिए खौफ का दूसरा नाम थे। लेकिन समय के साथ उनकी भूमिका बदल गई। अब वह मुख्य रूप से बॉक्स के अंदर रहने वाले स्ट्राइकर बन चुके हैं। वह पहले की तरह पीछे आकर खेल नहीं बनाते और न ही डिफेंस में योगदान देते हैं। पहले की तरह प्लेमेकर की उनकी भूमिका लगभग पूरी तरह गोल करने तक सीमित हो गई है। समस्या तब पैदा होती है जब गोल भी नहीं आते।
एक समय था जब रोनाल्डो अपनी रफ्तार, ड्रिब्लिंग और एथलेटिक क्षमता से डिफेंडरों के लिए खौफ का दूसरा नाम थे। लेकिन समय के साथ उनकी भूमिका बदल गई। अब वह मुख्य रूप से बॉक्स के अंदर रहने वाले स्ट्राइकर बन चुके हैं। वह पहले की तरह पीछे आकर खेल नहीं बनाते और न ही डिफेंस में योगदान देते हैं। पहले की तरह प्लेमेकर की उनकी भूमिका लगभग पूरी तरह गोल करने तक सीमित हो गई है। समस्या तब पैदा होती है जब गोल भी नहीं आते।
रोनाल्डो और मेसी
- फोटो : ANI/FIFA.COM
मेसी और रोनाल्डो के बीच अंतर
लियोनल मेसी और रोनाल्डो की तुलना वर्षों से होती रही है। दोनों अब करियर के अंतिम दौर में हैं, लेकिन मेसी ने अपने खेल को समय के साथ बदला है। मेसी अब गहराई में आकर खेल बनाते हैं, पास देते हैं और हमले की दिशा तय करते हैं। उनकी गति भले कम हुई हो, लेकिन खेल पर प्रभाव बरकरार है। वहीं रोनाल्डो अब भी मुख्य रूप से फिनिशर की भूमिका में हैं। ऐसे में जब गोल नहीं आते तो उनका योगदान सीमित दिखाई देता है।
लियोनल मेसी और रोनाल्डो की तुलना वर्षों से होती रही है। दोनों अब करियर के अंतिम दौर में हैं, लेकिन मेसी ने अपने खेल को समय के साथ बदला है। मेसी अब गहराई में आकर खेल बनाते हैं, पास देते हैं और हमले की दिशा तय करते हैं। उनकी गति भले कम हुई हो, लेकिन खेल पर प्रभाव बरकरार है। वहीं रोनाल्डो अब भी मुख्य रूप से फिनिशर की भूमिका में हैं। ऐसे में जब गोल नहीं आते तो उनका योगदान सीमित दिखाई देता है।
मेसी बनाम रोनाल्डो
- फोटो : ANI
क्या विदाई यात्रा बन रही है बोझ?
रोनाल्डो ने सऊदी प्रो लीग में अल-नस्र के लिए पिछले सीजन 30 मैचों में 28 गोल किए थे। इसी वजह से उम्मीद थी कि वह विश्वकप में भी प्रभाव छोड़ेंगे, लेकिन पुर्तगाल के हालिया आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं। टीम के पिछले चार बड़े टूर्नामेंट मुकाबलों में रोनाल्डो ने संभावित 420 में से 396 मिनट खेले हैं और इन चार मैचों में पुर्तगाल सिर्फ एक गोल कर पाया है। जब रोनाल्डो मैदान पर नहीं होते, तब टीम का औसत गोल प्रति मैच ज्यादा हो जाता है। यह आंकड़ा भले पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन सवाल जरूर खड़े करता है।
रोनाल्डो ने सऊदी प्रो लीग में अल-नस्र के लिए पिछले सीजन 30 मैचों में 28 गोल किए थे। इसी वजह से उम्मीद थी कि वह विश्वकप में भी प्रभाव छोड़ेंगे, लेकिन पुर्तगाल के हालिया आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं। टीम के पिछले चार बड़े टूर्नामेंट मुकाबलों में रोनाल्डो ने संभावित 420 में से 396 मिनट खेले हैं और इन चार मैचों में पुर्तगाल सिर्फ एक गोल कर पाया है। जब रोनाल्डो मैदान पर नहीं होते, तब टीम का औसत गोल प्रति मैच ज्यादा हो जाता है। यह आंकड़ा भले पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन सवाल जरूर खड़े करता है।
रोनाल्डो
- फोटो : Fifa.com
फिर भी क्यों खिला रहे हैं मार्टिनेज?
पुर्तगाल के कोच रॉबर्टो मार्टिनेज अभी भी रोनाल्डो पर पूरा भरोसा जता रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे मैच में, जहां बॉक्स के अंदर मौके बनाना मुश्किल हो, क्रिस्टियानो की क्वालिटी महत्वपूर्ण हो जाती है। जब टीम को गोल की जरूरत हो तो फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े गोल स्कोरर को बाहर करने का कोई मतलब नहीं है।' मार्टिनेज की बात सही है। रोनाल्डो का नाम, अनुभव और गोल करने की क्षमता आज भी सम्मान जगाती है। लेकिन समस्या यह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह पुराना रोनाल्डो काफी समय से दिखाई नहीं दिया है।
पुर्तगाल के कोच रॉबर्टो मार्टिनेज अभी भी रोनाल्डो पर पूरा भरोसा जता रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे मैच में, जहां बॉक्स के अंदर मौके बनाना मुश्किल हो, क्रिस्टियानो की क्वालिटी महत्वपूर्ण हो जाती है। जब टीम को गोल की जरूरत हो तो फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े गोल स्कोरर को बाहर करने का कोई मतलब नहीं है।' मार्टिनेज की बात सही है। रोनाल्डो का नाम, अनुभव और गोल करने की क्षमता आज भी सम्मान जगाती है। लेकिन समस्या यह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह पुराना रोनाल्डो काफी समय से दिखाई नहीं दिया है।
रोनाल्डो
- फोटो : PTI
पुर्तगाल के लिए खतरे की घंटी
डीआर कांगो के खिलाफ मुकाबले में पुर्तगाल ने खेल को नियंत्रित किया, लेकिन निर्णायक क्षणों में चमक नहीं दिखी। रोनाल्डो न तो मौके बना सके और न ही मैच जिताने वाला कोई खास पल दे पाए। यही कारण है कि अब सवाल सिर्फ रोनाल्डो के फॉर्म का नहीं, बल्कि पुर्तगाल की विश्वकप उम्मीदों का भी है।
अगर टीम अपने सबसे बड़े स्टार पर निर्भर रहती है और वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो विश्वकप जीतने का सपना अधूरा रह सकता है। फिलहाल रोनाल्डो के पास आलोचकों को जवाब देने का मौका है, लेकिन इतना तय है कि डीआर कांगो के खिलाफ प्रदर्शन ने उनके भविष्य और पुर्तगाल की रणनीति दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीआर कांगो के खिलाफ मुकाबले में पुर्तगाल ने खेल को नियंत्रित किया, लेकिन निर्णायक क्षणों में चमक नहीं दिखी। रोनाल्डो न तो मौके बना सके और न ही मैच जिताने वाला कोई खास पल दे पाए। यही कारण है कि अब सवाल सिर्फ रोनाल्डो के फॉर्म का नहीं, बल्कि पुर्तगाल की विश्वकप उम्मीदों का भी है।
अगर टीम अपने सबसे बड़े स्टार पर निर्भर रहती है और वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो विश्वकप जीतने का सपना अधूरा रह सकता है। फिलहाल रोनाल्डो के पास आलोचकों को जवाब देने का मौका है, लेकिन इतना तय है कि डीआर कांगो के खिलाफ प्रदर्शन ने उनके भविष्य और पुर्तगाल की रणनीति दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।