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नई रिसर्च में दावा: मीठी बातें नहीं, बदतमीजी से पूछने पर सटीक जवाब देता है AI, खुली ChatGPT की पोल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 20 Jan 2026 05:09 PM IST
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सार
क्या आप भी ChatGPT से 'प्लीज' और 'थैंक यू' कहकर बात करते हैं? नई रिसर्च कहती है कि AI से विनम्रता बरतने पर ज्यादा संभावना है कि आपको गलत जवाब मिल सकता है। जानिए क्या कहती है पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च।
ChatGPT
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
अक्सर हम अपने बच्चों को सिखाते हैं कि किसी से भी शालीनता से बात करें। सिर्फ इंसानों से ही नहीं हम एलेक्सा या सीरी जैसे एआई असिस्टेंट से भी विनम्र भाषा में कमांड देते हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी अक्सर यही माना जाता रहा है कि अगर आप चैटबॉट से जितनी शिष्टाचार के साथ बात करेंगे वह उतना ही बेहतर रिजल्ट देगा। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक नई रिसर्च सामने आई है, जिसने इस सोच को ही पूरी तरह पलट दिया है।
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के दो शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक रिसर्च में सामने आया है कि एआई चैटबॉट से अगर सटीक जवाब चाहिए तो उससे विमम्र नहीं बल्कि अपमानजनक लहजे में सवाल पूछने चाहिए।
रिसर्च के हैरान करने वाले आंकड़े
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग विषयों से जुड़े 50 मूल सवाल चुने। फिर हर सवाल को पांच अलग-अलग अंदाज में दोबारा लिखा गया, जिसमें बहुत विनम्र से लेकर बेहद बदतमीज लहजे में सवाल पूछे गए थे। एक बेहद रूखा सवाल कुछ ऐसा था, “अरे, तुम्हें यह भी नहीं आता? इसे हल करो।” वहीं विनम्र सवाल इस तरह रखा गया, “कृपया इस समस्या पर विचार करें और उत्तर दें।”
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यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के दो शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक रिसर्च में सामने आया है कि एआई चैटबॉट से अगर सटीक जवाब चाहिए तो उससे विमम्र नहीं बल्कि अपमानजनक लहजे में सवाल पूछने चाहिए।
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रिसर्च के हैरान करने वाले आंकड़े
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग विषयों से जुड़े 50 मूल सवाल चुने। फिर हर सवाल को पांच अलग-अलग अंदाज में दोबारा लिखा गया, जिसमें बहुत विनम्र से लेकर बेहद बदतमीज लहजे में सवाल पूछे गए थे। एक बेहद रूखा सवाल कुछ ऐसा था, “अरे, तुम्हें यह भी नहीं आता? इसे हल करो।” वहीं विनम्र सवाल इस तरह रखा गया, “कृपया इस समस्या पर विचार करें और उत्तर दें।”
ChatGPT
- फोटो : X
नतीजे हैरान करने वाले रहे। रिसर्च पेपर के मुताबिक, बहुत विनम्र सवालों की सटीकता करीब 80.8% रही, जबकि बेहद रूखे सवालों में यह बढ़कर 84.8% तक पहुंच गई। सबसे ज्यादा शालीन भाषा वाले सवालों की सटीकता सिर्फ 75.8% पाई गई।
पुराने रिसर्च से अलग है यह नतीजा
हालांकि यह नतीजे पिछली रिसर्च से उलट हैं। 2024 में जापान की RIKEN और वासेदा यूनिवर्सिटी की स्टडी में कहा गया था कि बदतमीज सवाल AI के प्रदर्शन को कमजोर करते हैं। वहीं, Google DeepMind के शोध में पाया गया कि सहयोगी और सकारात्मक भाषा से AI बेहतर प्रदर्शन करता है, खासकर गणित जैसे विषयों में।
पेंसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि सवाल के शब्दों में हल्का सा बदलाव भी AI के जवाबों की गुणवत्ता को काफी बदल सकता है। यही वजह है कि AI की विश्वसनीयता और अनुमान लगाने की क्षमता पर सवाल उठते हैं। फिर भी, रिसर्चर्स साफ करते हैं कि वे AI से बदतमीजी करने की सलाह नहीं दे रहे। उनका मानना है कि अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से हमारे समाज में बातचीत करने के तरीके खराब हो सकते हैं। इससे यूजर एक्सपीरियंस और भविष्य की तकनीक पर बुरा असर पड़ सकता है। मशीन भले ही कमांड पर काम करे, पर हमें अपनी मानवीय गरिमा नहीं भूलनी चाहिए।
पुराने रिसर्च से अलग है यह नतीजा
हालांकि यह नतीजे पिछली रिसर्च से उलट हैं। 2024 में जापान की RIKEN और वासेदा यूनिवर्सिटी की स्टडी में कहा गया था कि बदतमीज सवाल AI के प्रदर्शन को कमजोर करते हैं। वहीं, Google DeepMind के शोध में पाया गया कि सहयोगी और सकारात्मक भाषा से AI बेहतर प्रदर्शन करता है, खासकर गणित जैसे विषयों में।
पेंसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि सवाल के शब्दों में हल्का सा बदलाव भी AI के जवाबों की गुणवत्ता को काफी बदल सकता है। यही वजह है कि AI की विश्वसनीयता और अनुमान लगाने की क्षमता पर सवाल उठते हैं। फिर भी, रिसर्चर्स साफ करते हैं कि वे AI से बदतमीजी करने की सलाह नहीं दे रहे। उनका मानना है कि अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से हमारे समाज में बातचीत करने के तरीके खराब हो सकते हैं। इससे यूजर एक्सपीरियंस और भविष्य की तकनीक पर बुरा असर पड़ सकता है। मशीन भले ही कमांड पर काम करे, पर हमें अपनी मानवीय गरिमा नहीं भूलनी चाहिए।