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लाभचंद मार्केट प्रकरण: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी, डीएम-कमिश्नर समेत 8 अफसरों पर अवमानना याचिका

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Mon, 09 Mar 2026 08:23 AM IST
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सार

राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण न हटाने पर डीएम, कमिश्नर और नगरायुक्त समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने दो सप्ताह में सड़क की पैमाइश कर कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन 26 दिन बाद भी ध्वस्तीकरण न होने से मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
 

8 officers including DM and Commissioner caught violating Supreme Court order
लाभचंद मार्केट विवाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आगरा के राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना डीएम, कमिश्नर, नगरायुक्त सहित आठ अफसरों को भारी पड़ सकती है। कोर्ट से निर्धारित समय सीमा बीतने के एक पखवाड़े बाद भी कार्रवाई न करने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
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याचिकाकर्ता अमरजोत सूरी की इस याचिका पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राजा मंडी स्थित नजूल प्लॉट नंबर 2032 और 2033 को वर्ष 1940 और 1947 में नगर पालिका (अब नगर निगम) ने लाला धर्मचंद जैन को पट्टे पर आवंटित किया था। पट्टे की शर्तों के अनुसार, इस भूमि पर केवल निजी निवास, कार्यालय या दुकान का निर्माण किया जा सकता था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पट्टाधारकों ने शर्तों के विपरीत यहां 69 दुकानें बना दीं। दोमंजिला निर्माण की शर्त पर चार मंजिला इमारत खड़ी कर चंद्रलोक और धर्मलोक होटल बना दिए गए। जांच के बाद शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर 5 अप्रैल 2025 को नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने पट्टा निरस्त कर दिया था।
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पैमाइश पर निशान लगाकर बैठ गए
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह नजूल भूमि सड़क के नाम दर्ज है। इस मामले में दुकानदार अमरजोत सूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को आदेश दिया था कि दो सप्ताह के भीतर सड़क की पैमाइश कर अतिक्रमण हटाया जाए। आदेश के पालन की अंतिम तिथि 17 फरवरी थी। 10 फरवरी को एडीएम प्रोटोकॉल की अध्यक्षता वाली समिति ने पैमाइश कर निशान तो लगाए, लेकिन उसके बाद कोई ध्वस्तीकरण नहीं हुआ। आदेश के 26 दिन बीत जाने के बाद भी नतीजा शून्य रहने पर 24 फरवरी को अवमानना याचिका दायर कर दी गई।

इन अधिकारियों के विरुद्ध याचिका
अरविंद मल्लप्पा बंगारी (जिलाधिकारी), नगेंद्र प्रताप (मंडलायुक्त), अंकित खंडेलवाल (नगरायुक्त), पी. गुरु प्रसाद (प्रमुख सचिव, नगर नियोजन), प्रशांत तिवारी (एडीएम प्रोटोकॉल), अजय नारायण सिंह (एडीएम सिविल सप्लाई), सचिन राजपूत (एसडीएम सदर), श्रद्धा पांडेय (सहायक अपर नगरायुक्त)।


डीएम से मिलने आए थे आईएएस सुदीप
इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए विवादों में घिरे आईएएस अधिकारी और उप पट्टाधारक रहे सुदीप जैन पिछले सप्ताह डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी से मिलने आए थे। डीएम ने बताया कि उन्होंने अपनी बात रखी है। अवमानना याचिका पर डीएम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा। पैमाइश पूर्ण हो गई है। राजस्व रिकॉर्ड की जांच अंतिम चरण में है।
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