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एडीए में गजब का हाल: ध्वस्तीकरण के बाद फिर खड़ी हो रहीं इमारतें, तबादलों के बाद भी अवैध निर्माण बेलगाम

Mon, 10 Aug 2026 08:39 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 10 Aug 2026 08:39 AM IST
सार

आगरा में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बावजूद अवैध निर्माण और कॉलोनियों में प्लॉटिंग का काम नहीं रुक रहा है। अधिकारियों के तबादलों और पटल बदलने के बाद भी 27 हजार से अधिक अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है।

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Agra ADA Fails to Curb Illegal Constructions: Buildings Rise Again Despite Sealing and Demolition
एडीए कार्यालय

विस्तार

आगरा में  ध्वस्तीकरण के बाद भी अवैध कॉलोनियों में प्लॉटिंग का काम किया जा रहा है। इसी तरह सीलिंग के बाद भी अवैध निर्माणों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जूनियर और असिस्टेंट इंजीनियर से लेकर प्रवर्तन प्रभारी बदलने के बाद भी आगरा विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।
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मास्टर प्लान 2031 लागू हो चुका है। शहर में 27 हजार से अधिक अवैध निर्माण हैं। 250 से अधिक अवैध कॉलोनियां काली सूची में शामिल हैं। इसके बावजूद नई अवैध कॉलोनियों की संख्या कम नहीं हुई है। पुराने शहर में अवैध निर्माण के दौरान जो बिल्डिंग ढह गई थी। एडीए ने निर्माणकर्ता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। निर्माण सील किया लेकिन प्राथमिकी के बावजूद सील तोड़कर निर्माण हो रहा है। छत्ता, ताजगंज, फतेहपुर सीकरी और शाहगंज वार्ड में 20 से अधिक अवैध निर्माणों में सील तोड़कर निर्माण की शिकायतें आई हैं लेकिन प्रवर्तन प्रभारी और जूनियर इंजीनियरों के आगे नियम बौने साबित हो रहे हैं।
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एडीए के पूर्व सदस्य मदन गर्ग का आरोप है कि अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों को संरक्षण देकर प्रवर्तन दल के इंजीनियर और प्रभारी अपनी जेब गरम करते हैं। इसलिए इन पर रोक नहीं लग पा रही। इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली का कहना है कि शिकायतों की जांच कराई जा रही है। जूनियर इंजीनियर या अन्य किसी कर्मचारी की संलिप्तता मिली तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। जहां सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है, उन जगहों का दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।
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अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर रोक में फेल अफसर। सील तोड़ने से लेकर ध्वस्तीकरण के बाद भी निर्माण जारी।
 
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