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आगरा एमएलसी चुनाव: शिक्षक सीट पर सपा, स्नातक सीट पर भाजपा का दबदबा; जानिए हार-जीत के पांच बड़े कारण
Thu, 29 Oct 2026 08:16 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 29 Oct 2026 08:16 AM IST
सार
आगरा खंड विधान परिषद चुनाव में शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की, जबकि स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने सफलता हासिल की। शिक्षकों से निरंतर संवाद, मतदाता बनाने की रणनीति, संगठन का समर्थन और जमीनी तैयारी दोनों सीटों के नतीजों में अहम कारक बनकर उभरे।
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आकाश अग्रवाल, हरिकिशोर तिवारी, मानवेंद्र प्रताप सिंह, शशांक यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आगरा खंड शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि चुनाव में ऐन वक्त की तैयारी पर वर्षों का जमीनी संघर्ष भारी पड़ता है। लंबे समय से धरातल पर काम कर रहे प्रत्याशियों ने बिना ठोस रणनीति के मैदान में उतरे विरोधियों को पटखनी दे दी।
शिक्षक सीट से मौजूदा एमएलसी व सपा के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने लगातार दूसरी बार जीत का परचम फहराया। भाजपा के हरिकिशोर तिवारी को हार मिली। वहीं स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह गुरुजी ने अपनी सांगठनिक ताकत के बल पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। सपा के शशांक यादव उर्फ सीटू को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
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शिक्षक सीट से मौजूदा एमएलसी व सपा के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने लगातार दूसरी बार जीत का परचम फहराया। भाजपा के हरिकिशोर तिवारी को हार मिली। वहीं स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह गुरुजी ने अपनी सांगठनिक ताकत के बल पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। सपा के शशांक यादव उर्फ सीटू को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
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स्वयं एक वित्तविहीन डिग्री कॉलेज के प्रबंधक डॉ. आकाश अग्रवाल ने वर्ष 2020 से 2026 तक के अपने कार्यकाल के दौरान वित्तविहीन शिक्षकों के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाई। वित्तविहीन हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और डिग्री कॉलेजों में बड़े पैमाने पर सोलर पैनल और लाइटें लगवाकर रोशनी बिखेरी। साथ ही शिक्षकों के नीतिगत मुद्दों को शासन के समक्ष प्रमुखता से उठाया। सभी वित्तविहीन व संविदा शिक्षकों का नियमितीकरण कराने का वादा किया। इस संबंध में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सकारात्मक बातचीत होने का भी दावा किया। सपा समर्थित शिक्षण संस्थानों से भी खासी मदद मिली।
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शिक्षक सीट
डॉ. आकाश की जीत के कारण
- एमएलसी रहने के दौरान वित्तविहीन स्कूल-कॉलेजों में खूब काम कराए।
- शिक्षकों से पिछले छह साल के दौरान लगातार संवाद किया।
- सपा समर्थित संस्थानों के शिक्षकों का समर्थन मिला।
- वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों के वोट बनवाए।
- भाजपा की हर रणनीति का सटीक जवाब दिया।
डॉ. आकाश की जीत के कारण
- एमएलसी रहने के दौरान वित्तविहीन स्कूल-कॉलेजों में खूब काम कराए।
- शिक्षकों से पिछले छह साल के दौरान लगातार संवाद किया।
- सपा समर्थित संस्थानों के शिक्षकों का समर्थन मिला।
- वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों के वोट बनवाए।
- भाजपा की हर रणनीति का सटीक जवाब दिया।
हरिकिशोर तिवारी की हार के कारण
- बिना मजबूत तैयारी के मैदान में उतरे।
- कोर वोटबैंक पर अत्यधिक भरोसे का नुकसान हुआ।
- मतदाताओं से सीधा संवाद नहीं हुआ।
- पिछले चुनाव स्नातक और इस बार शिक्षक सीट से लड़ने का नुकसान हुआ।
- भाजपा कैडर का पूरा समर्थन नहीं मिला।
- बिना मजबूत तैयारी के मैदान में उतरे।
- कोर वोटबैंक पर अत्यधिक भरोसे का नुकसान हुआ।
- मतदाताओं से सीधा संवाद नहीं हुआ।
- पिछले चुनाव स्नातक और इस बार शिक्षक सीट से लड़ने का नुकसान हुआ।
- भाजपा कैडर का पूरा समर्थन नहीं मिला।
स्नातक सीट
डॉ. मानवेंद्र की जीत के कारण
- पिछला चुनाव जीतने के बाद वोट बनाने के लिए संगठन ने मदद की।
- सामान्य लोगों से भी लगातार जनसंपर्क करते रहे।
- 30 हजार से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं के मतदाता बनने से लाभ मिला।
- निर्वाचन क्षेत्र के सभी जिलों में घूमकर पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
- हर जिले में भरोसेमंद मतदाताओं की एक बड़ी फौज खड़ी की।
डॉ. मानवेंद्र की जीत के कारण
- पिछला चुनाव जीतने के बाद वोट बनाने के लिए संगठन ने मदद की।
- सामान्य लोगों से भी लगातार जनसंपर्क करते रहे।
- 30 हजार से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं के मतदाता बनने से लाभ मिला।
- निर्वाचन क्षेत्र के सभी जिलों में घूमकर पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
- हर जिले में भरोसेमंद मतदाताओं की एक बड़ी फौज खड़ी की।
शशांक यादव की हार के कारण
- चुनाव से पहले तैयारी मजबूत नहीं थी।
- स्नातकों में सपा का कोर वोटबैंक न होने का नुकसान हुआ।
- भाजपा प्रत्याशी जैसा पार्टी के कैडर का समर्थन नहीं मिला।
- आगरा खंड में सपा के जनप्रतिनिधि कम होने का भी नुकसान हुआ।
- चुनाव से पहले तैयारी मजबूत नहीं थी।
- स्नातकों में सपा का कोर वोटबैंक न होने का नुकसान हुआ।
- भाजपा प्रत्याशी जैसा पार्टी के कैडर का समर्थन नहीं मिला।
- आगरा खंड में सपा के जनप्रतिनिधि कम होने का भी नुकसान हुआ।
आगरा खंड विधान परिषद चुनाव में शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की, जबकि स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने सफलता हासिल की। शिक्षकों से निरंतर संवाद, मतदाता बनाने की रणनीति, संगठन का समर्थन और जमीनी तैयारी दोनों सीटों के नतीजों में अहम कारक बनकर उभरे।