फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Loud DJ Sound May Raise Blood Pressure and Heart Risks

सावधान रहना है जरूरी: डीजे की धमक दे सकती है मौत, कार्डियक अरेस्ट का खतरा; जानें कितना शोर है खतरनाक

Thu, 24 Sep 2026 09:42 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 09:42 AM IST
सार

तेज डीजे और शोरगुल से रक्तचाप व हृदय की धड़कन प्रभावित हो सकती है, खासकर हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए खतरा बढ़ सकता है। ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार 60 डेसिबल से अधिक शोर परेशानी पैदा कर सकता है, जबकि 100-140 डेसिबल की आवाज कानों के लिए गंभीर रूप से नुकसानदेह हो सकती है।
 

विज्ञापन
Loud DJ Sound May Raise Blood Pressure and Heart Risks
डीजे की तेज आवाज खतरनाक - फोटो : Amarujala.com

विस्तार

तेज आवाज और बढ़ता शोरगुल बीपी और धड़कन बढ़ा रहा है। इससे कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक है। बलरामपुर में डीजे की तेज आवाज के चलते ही बच्ची की जान चली गई। एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी रोग और हृदय रोग विभाग की ओपीडी में परेशानी के मरीज आ रहे हैं।
विज्ञापन


 

एसएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के डॉ. सौरभ नागर ने बताया कि अत्यधिक तेज आवाज से हृदय की कार्य गति असंतुलित होने लगती है। मरीज का रक्तचाप बढ़ने से धड़कनें भी दोगुना से अधिक हो जाती हैं। इससे हृदय तेज गति से संचालित होने लगता है और कार्डियक अरेस्ट होने का तीन गुना खतरा बढ़ जाता है। ब्रूगाडा सिंड्रोम से पीड़ित मरीज के लिए तो तेज आवाज जानलेवा है। इसमें एड्रीनलीन हॉर्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है। ये हृदय की विद्युत प्रणाली को प्रभावित करता है। इससे हृदय की कोशिकाओं में सोडियम चैनल के कार्य को बाधित करता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे हृदय की धड़कन तेज गति से होने लगती है। इसे वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन बोलते हैं। इस स्थिति में हृदय खून की पंपिंग करना बंद कर देता है, जिससे मरीज की अचानक मौत हो जाती है। इमरजेंसी में ऐसे मरीज आते हैं। एसएन के मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि अत्यधिक शोरगुल मरीज के रक्तचाप पर सीधा प्रभाव डालता है। इससे बीपी डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है। इससे उच्च रक्तचाप और बुजुर्ग मरीजों के लिए अधिक खतरा है। खटीकपाड़ा क्षेत्र निवासी सेवानिवृत्त वायु सेना के अधिकारी आरके कश्यप (91) का कहना है कि डीजे के शोर से बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। शासन के नियमों की भी अनदेखी की जा रही है।

 
विज्ञापन

60 डेसिबल से अधिक आवाज नुकसानदेह
एसएन की ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीतु गुप्ता ने बताया कि 40-60 डेसिबल की आवाज कानों के लिए बेहतर है। 60-90 डेसिबल की आवाज कानों में परेशानी कर सकती है। नींद प्रभावित होने से थकान और चिड़चिड़ापन होता है। 100-140 डेसिबल की आवाज डीजे, रॉक कॉन्सर्ट, सायरन समेत अन्य की होती है। इससे कान का पर्दा फट सकता है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए भी ज्यादा खतरनाक है।
 

इन बातों का रखें ध्यान:
तय मानक से अधिक शोरगुल पर रोक लगे।
शोरगुल होने पर घर के दरवाजे-खिड़की बंद रखें।

कानों पर कॉटन लगा सकते हैं, हेलमेट लगाएं।
प्रेशर हॉर्न प्रतिबंधित हो, बेवजह हॉर्न न बजाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed