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यूपी: लापरवाही का आलम तो देखिए, नकली दवा माफिया जिन सबूतों के बल पर जाना था जेल; वही बारिश में गल गए
Tue, 08 Sep 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 08 Sep 2026 10:04 AM IST
सार
औषधि विभाग की कार्रवाई में जब्त नकली, सैंपल और एक्सपायर दवाएं सुरक्षित रखने के बजाय खुले में पड़ी रहीं, जिससे बारिश में उनके रैपर, कार्टन और पहचान संबंधी जानकारी नष्ट हो गई। जब्त माल के सबूत क्षतिग्रस्त होने से दवा कारोबारियों के खिलाफ आरोप साबित करना और उन्हें सजा दिलाना मुश्किल हो सकता है।
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सबूत हुए एक्सपायर, गुनाहों की कैसे देंगे गवाही?
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
छापा मारकर जब्त की गईं नकली, सैंपल व एक्सपायर दवाओं को सुरक्षित रखने के बजाय औषधि विभाग ने खुले में फेंक दिया। बारिश-बदइंतजामी से दवाओं के रैपर-प्रिंटर सड़-गल गए। ये वही सबूत थे जो कोर्ट में आरोपियों को सजा दिलाते। सबूतों के बिना नकली दवा के आरोपियों को सजा दिलाना मुश्किल होगा। औषधि विभाग की ये लापरवाही व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
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औषधि विभाग ने बीते वर्षों में विभिन्न मेडिकल स्टोरों और गोदामों से नकली, सैंपल, एक्सपायर समेत कई तरह की दवाएं जब्त की थीं। ये दवाएं विभाग ने सीएमओ कार्यालय में खुले में फेंक दीं। बारिश से दवाओं के रैपर, कार्टन और अन्य रिकॉर्ड मिट गए हैं। इससे दवाओं की मूल पहचान लगभग नष्ट हो गई है। ऐसे में विभाग की लापरवाही से नकली और सैंपल की दवाएं बेचने के आरोपी दवा कारोबारियों को सजा दिलाना चुनौतीपूर्ण होगा।
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कई वर्षों से नहीं हो पाई सजा
औषधि विभाग दवाओं की तस्करी और अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करता है। भारी मात्रा में दवाएं भी जब्त की गईं लेकिन बीते कई वर्षों में विभाग किसी भी दवा माफिया को कोर्ट से सजा नहीं दिलवा पाया है। इसकी एक वजह आरोपियों के खिलाफ जुटाए सबूतों की बेकदरी भी है।
औषधि विभाग दवाओं की तस्करी और अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करता है। भारी मात्रा में दवाएं भी जब्त की गईं लेकिन बीते कई वर्षों में विभाग किसी भी दवा माफिया को कोर्ट से सजा नहीं दिलवा पाया है। इसकी एक वजह आरोपियों के खिलाफ जुटाए सबूतों की बेकदरी भी है।
सिरप-इंजेक्शन के साथ टैबलेट भी
खुले में पड़ी दवाएं कई कार्टन और कट्टों में भरी हुई हैं। इसमें कई कंपनियों की सिरप, टैबलेट, इंजेक्शन हैं। पानी भरने से कार्टन और पैकिंग नष्ट हो गई है। सिरप पर कंपनी के नाम समेत अन्य जानकारी का रैपर भी नहीं है। ऐसे में ये दवा किस कंपनी की हैं। किस मर्ज में उपयोग होती इसकी पहचान आसान नहीं है।
खुले में पड़ी दवाएं कई कार्टन और कट्टों में भरी हुई हैं। इसमें कई कंपनियों की सिरप, टैबलेट, इंजेक्शन हैं। पानी भरने से कार्टन और पैकिंग नष्ट हो गई है। सिरप पर कंपनी के नाम समेत अन्य जानकारी का रैपर भी नहीं है। ऐसे में ये दवा किस कंपनी की हैं। किस मर्ज में उपयोग होती इसकी पहचान आसान नहीं है।
सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता का कहना है कि मैंने बीते महीने ही कार्यभार संभाला है। कार्रवाई में जब्त दवाओं को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ये खुले में क्यों रखी गईं इसकी रिपोर्ट औषधि निरीक्षक से लेने के साथ ही पूरी मामले की जांच कराएंगे।
क्राइम पूर्व डीजीसी बसंत गुप्ता ने बताया कि आपराधिक मामले में आरोपी को सजा दिलाने में बरामद माल बेहद महत्वपूर्ण सबूत होता है। न्यायाधीश अगर जब्त माल को प्रस्तुत करने के लिए कहेंगे तो उसे लाना होगा। जब्त माल नष्ट होने या फिर क्षतिग्रस्त होने से आरोपों को साबित करना कठिन होगा और केस कमजोर हो जाएगा।