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यूपी: एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बसों में क्यों लग रही आग, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल; 12 दिन में दूसरी घटना
Wed, 07 Oct 2026 10:39 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 07 Oct 2026 10:39 AM IST
सार
ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आगरा आ रही स्लीपर बस में आग लगने से यात्रियों ने कूदकर जान बचाई, 12 दिन में यह दूसरी ऐसी घटना है। 24 सितंबर को स्लीपर बस में आग से नौ यात्रियों की मौत के बाद भी सुरक्षा और फिटनेस जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
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चलती बस में लगी आग (सांकेतिक फाइल फोटो)
विस्तार
ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को आगरा की ओर आ रही एक स्लीपर बस में आग लग गई, जिससे यात्रियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। इससे स्लीपर बसों की सुरक्षा और फिटनेस मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि फिटनेस में सुरक्षा के कई बिंदुओं की जांच होती है लेकिन हकीकत में सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर 12 दिन में यह दूसरी घटना है। इससे पहले 24 सितंबर को दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई थी। उस घटना की शुरुआती जांच में एसी में शॉर्ट सर्किट की चिंगारी से आग लगने की आशंका जताई गई थी। तब बस का आपातकालीन दरवाजा काम नहीं कर रहा था और सामान से निकलने का रास्ता भी बाधित था।
सुरक्षा जांच में खानापूर्ति
फिटनेस जांच में ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट, इंडिकेटर, हॉर्न, शीशे, वाइपर, रिफ्लेक्टर, स्पीडोमीटर, स्पीड गवर्नर, प्रदूषण और सुरक्षा उपकरणों की रस्म अदायगी निभाई जाती है। आरोप है कि वायरिंग, एसी सिस्टम, आपातकालीन दरवाजे और बस के भीतर यात्रियों के निकलने के रास्ते की वास्तविक जांच में सिर्फ खानापूर्ति होती है। घटिया या गैर-ब्रांडेड वायरिंग से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ता है। मानकों को ताक पर रखकर स्लीपर बसें यात्रियों की जान को जोखिम में डालकर फर्राटे भर रही हैं।
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एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार सिंह ने बताया कि घटिया वायरिंग और यात्रियों के ज्वलनशील सामान ले जाने से शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसों के केबिन इतने संकरे होते हैं कि खतरनाक घटना होने पर यात्रियों को पता ही नहीं चल पाता। आगरा में करीब 50 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर उन्हें बंद कराया जाता है।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर 12 दिन में यह दूसरी घटना है। इससे पहले 24 सितंबर को दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई थी। उस घटना की शुरुआती जांच में एसी में शॉर्ट सर्किट की चिंगारी से आग लगने की आशंका जताई गई थी। तब बस का आपातकालीन दरवाजा काम नहीं कर रहा था और सामान से निकलने का रास्ता भी बाधित था।
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सुरक्षा जांच में खानापूर्ति
फिटनेस जांच में ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट, इंडिकेटर, हॉर्न, शीशे, वाइपर, रिफ्लेक्टर, स्पीडोमीटर, स्पीड गवर्नर, प्रदूषण और सुरक्षा उपकरणों की रस्म अदायगी निभाई जाती है। आरोप है कि वायरिंग, एसी सिस्टम, आपातकालीन दरवाजे और बस के भीतर यात्रियों के निकलने के रास्ते की वास्तविक जांच में सिर्फ खानापूर्ति होती है। घटिया या गैर-ब्रांडेड वायरिंग से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ता है। मानकों को ताक पर रखकर स्लीपर बसें यात्रियों की जान को जोखिम में डालकर फर्राटे भर रही हैं।
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एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार सिंह ने बताया कि घटिया वायरिंग और यात्रियों के ज्वलनशील सामान ले जाने से शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसों के केबिन इतने संकरे होते हैं कि खतरनाक घटना होने पर यात्रियों को पता ही नहीं चल पाता। आगरा में करीब 50 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर उन्हें बंद कराया जाता है।