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Aligarh News: 12 दिन बाद भी सरकारी कांटों पर गेहूं की खरीद नहीं
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क्षेत्र में असमय हुई बारिश के बाद दो दिन से मौसम खुल गया है फिर भी बारिश की मार के चलते सरकारी कांटों पर गेहूं की खरीद न होने का खामियाजा किसानों को ही भुगतना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि अब मौसम खुला है तो फिर से कटाई और थ्रेसिंग शुरू हो गई है।
खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा एक अप्रैल से शुरू की जाने वाली गेहूं की खरीद अब तक पटरी पर नहीं आ सकी है। 12 दिन बीत जाने के बाद भी खैर में विभागीय कांटों पर खरीद शून्य बनी हुई है। सरकार द्वारा गेहूं की निर्धारित दर 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकारी कांटों पर गेहूं की खरीद न होने के कारण किसानों को मजबूरन अपनी उपज खैर कृषि मंडी में व्यापारियों को कम दाम पर 2290 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खाद्य एवं रसद विभाग के कांटा संचालक गिरीश कुमार ने बताया कि पहले बारदाने की समस्या थी, जिसे अब दूर कर लिया गया है। गेहूं में अधिक नमी होने के कारण खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक फसल में नमी का स्तर निर्धारित मानक तक नहीं पहुंचेगा, तब तक खरीद संभव नहीं है।
वहीं, मंडी समिति अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल ने भी माना कि असमय बारिश ने क्षेत्रीय किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द खरीद प्रक्रिया शुरू कराई जाए। नमी की समस्या को देखते हुए मानकों में कुछ राहत दी जाए और नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
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खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा एक अप्रैल से शुरू की जाने वाली गेहूं की खरीद अब तक पटरी पर नहीं आ सकी है। 12 दिन बीत जाने के बाद भी खैर में विभागीय कांटों पर खरीद शून्य बनी हुई है। सरकार द्वारा गेहूं की निर्धारित दर 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकारी कांटों पर गेहूं की खरीद न होने के कारण किसानों को मजबूरन अपनी उपज खैर कृषि मंडी में व्यापारियों को कम दाम पर 2290 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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खाद्य एवं रसद विभाग के कांटा संचालक गिरीश कुमार ने बताया कि पहले बारदाने की समस्या थी, जिसे अब दूर कर लिया गया है। गेहूं में अधिक नमी होने के कारण खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक फसल में नमी का स्तर निर्धारित मानक तक नहीं पहुंचेगा, तब तक खरीद संभव नहीं है।
वहीं, मंडी समिति अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल ने भी माना कि असमय बारिश ने क्षेत्रीय किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द खरीद प्रक्रिया शुरू कराई जाए। नमी की समस्या को देखते हुए मानकों में कुछ राहत दी जाए और नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।