फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   A family member cannot be denied compensation simply because the land is not in their name.

हाईकोर्ट : सिर्फ नाम पर जमीन नहीं होने से परिवार के सदस्य को मुआवजे से वंचित नहीं कर सकते

Wed, 28 Oct 2026 12:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 28 Oct 2026 12:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता कि मृतक के नाम पर कृषि भूमि दर्ज नहीं थी।

विज्ञापन
A family member cannot be denied compensation simply because the land is not in their name.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता कि मृतक के नाम पर कृषि भूमि दर्ज नहीं थी। यदि परिवार की आजीविका का मुख्य स्रोत खेती है और मरने वाला कृषि कार्य में सहयोग करता था तो उसके आश्रितों को योजना के तहत लाभ देने के दावे पर विचार किया जाना चाहिए।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने सुरेंद्र की याचिका पर दिया। कुशीनगर निवासी सुरेंद्र की पत्नी मीरा की 20 अगस्त 2020 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। सुरेंद्र ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था। डीएम की ओर से दावे को खारिज कर दिया गया। कहा गया कि मीरा के नाम न कृषि भूमि दर्ज थी और न ही वह बटाईदार थीं। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कहा, मीरा खेती के काम में सहयोग करती थीं और कृषि परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार थी। केवल उनके नाम जमीन दर्ज नहीं होने के कारण योजना का लाभ देने से इन्कार करना उचित नहीं है।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि खातेदार या सहखातेदार के परिवार के ऐसे कमाऊ सदस्य को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है, जिसकी आजीविका का मुख्य स्रोत परिवार के सदस्य के नाम दर्ज भूमि से होने वाली कृषि आय है। कोर्ट ने पाया कि मीरा खेती के काम में हाथ बंटाती थीं और कृषि परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार थी। इसलिए केवल उनके नाम जमीन दर्ज नहीं होने के आधार पर दावे को खारिज करना उचित नहीं। कोर्ट ने डीएम को आदेश दिया है कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने के चार सप्ताह के भीतर मामले में नया आदेश पारित करें। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed