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High Court : करवरिया बंधुओं की अपील से खंडपीठ ने हटने से किया इन्कार, कहा-इससे बेंच हंटिंग की प्रवृत्ति बढ़ेगी
Wed, 19 Aug 2026 06:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Aug 2026 06:46 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने करवरिया बंधुओं की ओर से आपराधिक अपीलों में दायर स्थानांतरण अर्जियों पर सुनवाई करते हुए स्वयं मामले से हटने से इन्कार कर दिया। कहा कि इससे बेंच हंटिंग की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।
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कपिलमुनि करविया, पूर्व सांसद।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने करवरिया बंधुओं की ओर से आपराधिक अपीलों में दायर स्थानांतरण अर्जियों पर सुनवाई करते हुए स्वयं मामले से हटने से इन्कार कर दिया। कहा कि इससे बेंच हंटिंग की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। खंडपीठ ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय, न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू, सूर्यभान करवरिया और कपिल मुनि करवरिया की अपील पर दिया है।
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अपीलकर्ताओं ने अपने हलफनामे में यह आशंका जताई थी कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। ऐसे में उनकी अपील को अन्य पीठ में स्थानांतरित कर दी जाए। याचियों ने कहा कि इसी पीठ ने 9 मई 2023 को उनकी जमानत अर्जियां खारिज करते हुए मामले के गुण-दोष पर अपनी राय व्यक्त कर दी थी। इससे उन्हें आशंका है कि पूर्व-धारणा से उनके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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खंडपीठ ने हलफनामे में की गई टिप्पणियों पर कड़ा एतराज जताया। स्पष्ट किया कि किसी अंतरिम आवेदन पर व्यक्त की गई राय कोर्ट के पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का प्रमाण नहीं होती, बल्कि वह केवल उस आवेदन के संदर्भ तक सीमित रहती है। पीठ ने यह भी कहा कि नियम के मुताबिक दूसरी जमानत याचिका उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होती है,जिसने पहली याचिका पर फैसला सुनाया हो। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि जब भी अपीलकर्ताओं के वकीलों से अपील पर गुण-दोष के आधार पर बहस करने को कहा गया, तब केवल स्थगन की मांग की गई।
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