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बांसडीह बवाल में प्राथमिकी रद्द करने से हाईकोर्ट का इंकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Jun 2019 11:24 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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बलिया की बांसडीह तहसील के घरौरा गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए बवाल के आरोपियों को हाईकोर्ट ने राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इंकार करते हुए सभी आरोपियों को 45 दिन के भीतर जिला न्यायालय में सरेंडर करने और जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मनोज बिंद और 57 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अनिल कुमार की पीठ ने सुनवाई की।
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याचिका में कहा गया कि याचीगण बिंद बिरादरी के हैं। उनको लोकसभा चुनाव के हुए राजनीतिक विद्वेष के कारण फर्जी मुकदमे में फंसाया गया है। याचिका में मांग की गई कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाए और याचीगण की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने कहा कि मामला सामूहिक बवाल का है। पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों पर हमला किया गया है, इसलिए प्रथमदृष्टया घटना गंभीर है। याचिका खारिज करते हुए सभी अभियुक्तगणों को 45 दिन के भीतर जिला न्यायालय बलिया में सरेंडर कर जमानत अर्जी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस दौरान याचीगण को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया है। लेकिन, यदि आरोपी 45 दिन में सरेंडर नहीं करते हैं, तो पुलिस गिरफ्तारी कर सकेगी।
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मामले के अनुसार घरौरा गांव में ग्राम सभा की जमीन पर जबरन कब्जा करने की शिकायत पर राजस्व विभाग और पुलिस की टीम गांव में पहुंची थी। उत्तेजित ग्र्रामीणों ने टीम पर हमला कर दिया। इसमें तहसीलदार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने बांसडीह थाने में 58 ग्रामीणों के खिलाफ जानलेवा हमला, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, बवाल, विधि विरुद्ध जमाव आदि की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
