प्रयागराज : तलाकशुदा और विधवा बेटियों को सीजीएचएस कार्ड में जोड़ने का रास्ता साफ
केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत आने वाले परिवार पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पात्र तलाकशुदा और विधवा बेटियों को सीजीएचएस कार्ड में शामिल करने या दोबारा बहाल करने की अनुमति दे दी है।
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केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत आने वाले परिवार पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पात्र तलाकशुदा और विधवा बेटियों को सीजीएचएस कार्ड में शामिल करने या दोबारा बहाल करने की अनुमति दे दी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 28 अक्तूबर को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से यह निर्णय लिया गया है। इससे उन बुजुर्ग परिवार पेंशनभोगियों को विशेष राहत मिलेगी जिनकी बेटियां वैवाहिक संबंध टूटने या पति के निधन के बाद दोबारा उनके साथ रहने लगी हैं और आर्थिक रूप से उन पर निर्भर हैं।
पुरानी व्यवस्था में मूल केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी अथवा बच्चों को वही चिकित्सा सुविधाएं मिलती थीं, जिनका लाभ मृतक कर्मचारी अपने जीवनकाल में उठा रहा था।
तमाम आवेदन मिल रहे थे विभाग को
तलाकशुदा और विधवा बेटियों को भी चिकित्सा सुविधाएं मिलती थीं लेकिन उन बेटियों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं जिन परिवार के मूल कार्डधारक की मृत्यु के बाद बेटी का तलाक हुआ या वह विधवा हो गई। इससे कई परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। स्वास्थ्य मंत्रालय को कुछ समय से इस विषय पर कई अभ्यावेदन प्राप्त हो रहे थे। इनमें विशेष रूप से बुजुर्ग परिवार पेंशनभोगियों की समस्याओं को सामने रखा गया था।
कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें तलाकशुदा या विधवा बेटियां माता-पिता के साथ वापस रहने लगी थीं। उनके पास आजीविका का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था और वे गंभीर बीमारियों से भी जूझ रही थीं।ऐसे में नियमित चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता के बावजूद उन्हें सीजीएचएस कार्ड में शामिल करने में पुरानी व्यवस्था बाधा बन रही थी। इन परिस्थितियों पर विचार-विमर्श के बाद मंत्रालय ने पात्र तलाकशुदा और विधवा बेटियों को परिवार पेंशनभोगियों के सीजीएचएस कार्ड में शामिल करने व पहले से हटाई गई पात्र बेटियों को दोबारा बहाल करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
आर्थिक निर्भरता, आय का होगा सत्यापन
यह सुविधा स्वतः सभी को नहीं मिलेगी। इसके लिए संबंधित बेटी की वैवाहिक स्थिति, आर्थिक निर्भरता, आय व अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों का सत्यापन किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि बेटी का नाम पूर्व में परिवार के सदस्य के रूप में किसी सरकारी दस्तावेज में दर्ज है या नहीं। यानी केवल तलाकशुदा या विधवा होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित नियमों को पूरा करना भी अनिवार्य रहेगा।
अन्य नियम रहेंगे लागू
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीजीएचएस के अन्य सभी नियम एवं शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगे। आदेश की एक प्रति सीजीएचएस की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय को उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है, जहां बुजुर्ग माता-पिता अपनी विधवा या तलाकशुदा बेटियों की आर्थिक और चिकित्सकीय जिम्मेदारी उठा रहे हैं।