यूपी बोर्ड हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का एक साथ परिणाम पहली बार लखनऊ से प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा जारी करेंगे। सरकार के इस निर्णय के साथ ही यूपी बोर्ड की वर्षों पुरानी परंपरा टूट जाएगी, इससे पहले बोर्ड के सभापति एवं सचिव हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम बोर्ड मुख्यालय से जारी करते रहे हैं। लेकिन यह परंपरा इस बार एक झटके में टूटती नजर आ रही है।
टूटेगी परंपरा: पहली बार लखनऊ से मंत्री जारी करेंगे यूपी बोर्ड रिजल्ट
प्रदेश में 2017 में नई सरकार के गठन के बाद से डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की ओर से लगातार बोर्ड परीक्षा के कार्यक्रम लखनऊ से जारी किए जाते रहे हैं, अब मौका मिलते ही उन्होंने रिजल्ट जारी करने का काम भी अधिकारियों के हाथ से लेकर पहली बार सचिवालय लोकभवन से हाईस्कूल-इंटरमीडिएट का परिणाम एक साथ जारी करेंगे।
यूपी बोर्ड के पुराने अधिकारियों ने बताया कि इससे पूर्व में यूपी बोर्ड के सचिव एवं सभापति में टकराव के चलते 2003 एवं 2007 में हाईस्कूल परीक्षा का परिणाम लखनऊ निदेशक कार्यालय से जारी हुआ था, जबकि इंटरमीडिएट का परिणाम बोर्ड मुख्यालय से ही जारी किया गया था।
51 लाख से परीक्षार्थियों का जारी होगा रिजल्ट यूपी बोर्ड परीक्षा 2020 में पंजीकृत कुल 5611072 परीक्षार्थियों में से 5130481 परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा में हाईस्कूल में 3024632 परीक्षार्थी पंजीकृत थे उसमें से 279656 अनुपस्थित रहे, जबकि 2744976 शामिल हुए।
इंटरमीडिएट में 2586440 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, 200935 अनुपस्थित रहे जबकि 2385505 परीक्षा में शामिल हुए। सरकार मनमानी पर उतारू, पूरी व्यवस्था को पंगु बनाने की कोशिश यूपी बोर्ड मुख्यालय से परिणाम जारी नहीं जारी करने के सरकार के निर्णय का शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने खुलकर विरोध किया है।
उनका कहना है कि प्रदेश सरकार मनमानी पर उतारू है, वह अधिकारियों के सभी अधिकार अपने हाथ में लेकर पूरी व्यवस्था का पंगु बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार प्रयागराज के महत्व को कम करने पर लगी है, जिले से कई प्रमुख कार्यालयों को लखनऊ ले जाने केबाद अब यूपी बोर्ड के महत्व को भी कम करने की तैयारी है।
यूपी बोर्ड के सचिव एवं सभापति रहे वर्तमान में समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य बासुदेव यादव ने भी उप मुख्यमंत्री की ओर से बोर्ड परीक्षाफल जारी करने के निर्णय का विरोध किया है।
अब सरकार यूपी बोर्ड से जुड़े सारे निर्णय लखनऊ से लेने के बाद परीक्षा परिणाम की घोषणा भी लखनऊ से करने का निर्णय लेकर प्रयागराज के महत्वपूर्ण कार्यालयों को खत्म करने की साजिश कर रही है। इनकी मंशा एवं नियत साफ नहीं है, यह सभी कार्यालयों को लखनऊ उठा लेना चाहते हैं।