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कंटेनमेंट जोन की अदालतों में अब वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
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Video conferencing will now be heard in the courts of Containment Zone
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हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए जारी की विस्तृत गाइड लाइन
जिला अदालतों को स्थानीय स्तर पर बनानी होगी ई मेल
ईमेल पर स्वीकार किए जाएंगे जमानत प्रार्थनापत्र व अन्य अत्यावश्यक मामले
प्रयागराज। प्रदेश की उन जिला अदालतों मेें अब वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) से सुनवाई होगी, जो कंटेनमेंट जोन में आने की वजह से बंद चल रही हैं और वहां न्यायिक कार्य लगभग ठप है। हाईकोर्ट ने ऐसे सभी जिला जजों को निर्देशित किया है कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए मैकेनिज्म विकसित करें और आवश्यक मुकदमों की सुनवाई प्रारंभ कर दें।
महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर व सिविल जज कनिष्ठ की अदालतें वीसी से सुनवाई करेंगी। इनमें लंबित व नई जमानत अर्जी, अग्रिम जमानत अर्जी, अतिआवश्यक आपराधिक प्रकीर्ण अर्जियां, सिविल निषेधाज्ञा मामले, विचाराधीन कैदी की रिमांड व न्यायिक कार्य, या जिस मामले की सुनवाई जिला जज जरूरी समझें ,की सुनवाई वीसी से की जाएगी। इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है।
जिला अदालतों को स्थानीय स्तर पर एक ईमेल बनाने के लिए कहा गया है, जिसका विस्तृत ब्योरा उस अदालत की वेबसाइट पर देना होगा। इस ईमेल पर जमानत प्रार्थनापत्र, अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र और अन्य अर्जेंट मामलों के प्रार्थनापत्र स्वीकार किए जाएंगे। वकीलों द्वारा ईमेल से भेजे गए प्रार्थनापत्रों में वकील और वादकारी का पूरा ब्योरा तथा मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा। कंप्यूटर सेक्शन ऐसे प्रार्थनापत्रों की सूची तैयार करेगा। यह प्रार्थनापत्र सीआईएस पर भी अपलोड किए जाएंगे और यदि प्रार्थनापत्रों में किसी प्रकार का डिफेक्ट है तो उसे उसी दिन संबंधित अधिवक्ता को सूचित करना होगा। जिन प्रार्थनापत्रों में कोई डिफेक्ट न हो वे कॉज लिस्ट में सूचीबद्ध किए जाएं।
वकीलों, वादकारियों की मदद के लिए जारी करें हेल्प लाइन नंबर
जमानत और अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्रों की प्रति अभियोजन को उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर मैकेनिज्म बनाने का निर्देश दिया गया है। अभियोजन को निर्धारित समय में जवाब दाखिल करना होगा। हाईकोर्ट ने वकीलों और वादकारियों की मदद के लिए एक हेल्प लाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। इसका बाकायदा प्रचार प्रसार किया जाए। हेल्प लाइन के जरिए कॉज लिस्ट, मुकदमों के लिस्टिंग की जानकारी और वीसी से सुनवाई के लिंक, ईकोर्ट एप आदि की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा हेल्प लाइन के माध्यम से वकीलों, वादकारियों को वीसी से सुनवाई के तरीके, लिंक से जुड़ने की प्रक्रिया आदि की भी जानकारी दी जाएगी।
जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने वीसी के लिए जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर का उपयोग करने का निर्देश दिया है। वीसी से मुकदमों की सुनवाई के लिए स्थानीय बार एसोसिएशनों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है। ईमेल से प्राप्त प्रार्थनापत्रों और इससे संबंधित रिकार्ड को अपने निवास स्थान के कार्यालय से काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को मुहैया कराना होगा। न्यायिक अधिकारी संबंधित वकील और अभियोजन को मुकदमे की सुनवाई के समय लिंक उपलब्ध कराएंगे। वकील अदालत परिसर छोड़कर अन्य किसी भी स्थान से इस लिंक के जरिए वीसी में शामिल हो सकते हैं। प्रार्थनापत्रों के निस्तारण, आदेश पारित करने और अपलोड करने, बेल बांड स्वीकार करने और रिलीज आर्डर जारी करने के लिए स्थानीय स्तर पर मैकेनिज्म विकसित करने के लिए कहा गया है। कंटेनमेंट जोन में रह रहे न्यायिक अधिकारियों को कोई कार्य नहीं दिया जाएगा।
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जिला अदालतों को स्थानीय स्तर पर बनानी होगी ई मेल
ईमेल पर स्वीकार किए जाएंगे जमानत प्रार्थनापत्र व अन्य अत्यावश्यक मामले
प्रयागराज। प्रदेश की उन जिला अदालतों मेें अब वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) से सुनवाई होगी, जो कंटेनमेंट जोन में आने की वजह से बंद चल रही हैं और वहां न्यायिक कार्य लगभग ठप है। हाईकोर्ट ने ऐसे सभी जिला जजों को निर्देशित किया है कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए मैकेनिज्म विकसित करें और आवश्यक मुकदमों की सुनवाई प्रारंभ कर दें।
महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर व सिविल जज कनिष्ठ की अदालतें वीसी से सुनवाई करेंगी। इनमें लंबित व नई जमानत अर्जी, अग्रिम जमानत अर्जी, अतिआवश्यक आपराधिक प्रकीर्ण अर्जियां, सिविल निषेधाज्ञा मामले, विचाराधीन कैदी की रिमांड व न्यायिक कार्य, या जिस मामले की सुनवाई जिला जज जरूरी समझें ,की सुनवाई वीसी से की जाएगी। इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है।
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जिला अदालतों को स्थानीय स्तर पर एक ईमेल बनाने के लिए कहा गया है, जिसका विस्तृत ब्योरा उस अदालत की वेबसाइट पर देना होगा। इस ईमेल पर जमानत प्रार्थनापत्र, अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र और अन्य अर्जेंट मामलों के प्रार्थनापत्र स्वीकार किए जाएंगे। वकीलों द्वारा ईमेल से भेजे गए प्रार्थनापत्रों में वकील और वादकारी का पूरा ब्योरा तथा मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा। कंप्यूटर सेक्शन ऐसे प्रार्थनापत्रों की सूची तैयार करेगा। यह प्रार्थनापत्र सीआईएस पर भी अपलोड किए जाएंगे और यदि प्रार्थनापत्रों में किसी प्रकार का डिफेक्ट है तो उसे उसी दिन संबंधित अधिवक्ता को सूचित करना होगा। जिन प्रार्थनापत्रों में कोई डिफेक्ट न हो वे कॉज लिस्ट में सूचीबद्ध किए जाएं।
वकीलों, वादकारियों की मदद के लिए जारी करें हेल्प लाइन नंबर
जमानत और अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्रों की प्रति अभियोजन को उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर मैकेनिज्म बनाने का निर्देश दिया गया है। अभियोजन को निर्धारित समय में जवाब दाखिल करना होगा। हाईकोर्ट ने वकीलों और वादकारियों की मदद के लिए एक हेल्प लाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। इसका बाकायदा प्रचार प्रसार किया जाए। हेल्प लाइन के जरिए कॉज लिस्ट, मुकदमों के लिस्टिंग की जानकारी और वीसी से सुनवाई के लिंक, ईकोर्ट एप आदि की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा हेल्प लाइन के माध्यम से वकीलों, वादकारियों को वीसी से सुनवाई के तरीके, लिंक से जुड़ने की प्रक्रिया आदि की भी जानकारी दी जाएगी।
जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने वीसी के लिए जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर का उपयोग करने का निर्देश दिया है। वीसी से मुकदमों की सुनवाई के लिए स्थानीय बार एसोसिएशनों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है। ईमेल से प्राप्त प्रार्थनापत्रों और इससे संबंधित रिकार्ड को अपने निवास स्थान के कार्यालय से काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को मुहैया कराना होगा। न्यायिक अधिकारी संबंधित वकील और अभियोजन को मुकदमे की सुनवाई के समय लिंक उपलब्ध कराएंगे। वकील अदालत परिसर छोड़कर अन्य किसी भी स्थान से इस लिंक के जरिए वीसी में शामिल हो सकते हैं। प्रार्थनापत्रों के निस्तारण, आदेश पारित करने और अपलोड करने, बेल बांड स्वीकार करने और रिलीज आर्डर जारी करने के लिए स्थानीय स्तर पर मैकेनिज्म विकसित करने के लिए कहा गया है। कंटेनमेंट जोन में रह रहे न्यायिक अधिकारियों को कोई कार्य नहीं दिया जाएगा।
