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Ambedkar Nagar News: बारिश और तेज हवा से फसल बर्बाद, आलू, प्याज व दलहन को नुकसान

संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Wed, 04 Feb 2026 12:10 AM IST
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Rain and strong winds destroy crops, damage to potatoes, onions and pulses
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अंबेडकरनगर। जिले में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह घने कोहरे के बाद दिन में तेज हवा के साथ बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम के इस बदलाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खराब मौसम का सबसे बुरा असर सरसों, गेहूं और गन्ने जैसी फसलों पर पड़ रहा है।
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तेज हवा के कारण फसलें खेतों में गिर रही हैं, जिससे उनके खराब होने का डर है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में फसलों में रोग लगने की आशंका भी है। विशेष रूप से सरसों, जो अभी फूल आने की अवस्था में है, उसे इस बारिश से काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा आलू, प्याज और दलहन की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
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मंगलवार सुबह जिले भर में घना कोहरा छाया रहा, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। करीब आठ बजे धूप निकलने से लोगों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन 11:30 बजते-बजते आसमान में काले बादल छा गए और दिन में ही अंधेरा हो गया। इसके बाद अकबरपुर शहर सहित सुलेमपुर, जलालपुर, जहांगीरगंज और बसखारी जैसे ग्रामीण इलाकों में तेज बौछारें पड़ीं। बारिश और ठंडी हवा के कारण जिले का अधिकतम तापमान गिरकर 22 डिग्री और न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। हवा की रफ्तार 12 से 15 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
क्या कहते हैं किसान
विकास खंड कटेहरी के ग्राम रग्घूपुर निवासी श्रवण मिश्रा के अनुसार, बारिश और हवा के कारण सरसों के फूल झड़ रहे हैं। जिन फसलों में फलियां बन रही थीं, उनमें अब उत्पादन कम होगा और तेल की मात्रा भी घटेगी। इसके साथ ही, तेज हवा ने गेहूं, मटर और अन्य दलहनी फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। वहीं, आशाजीतपुर कला के किसान आलोक तिवारी का कहना है कि यदि मौसम के हालात ऐसे ही रहे तो सरसों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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अधिक बारिश होने पर जलनिकासी के करें इंतजाम
कृषि विज्ञान केंद्र, पांती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने बताया कि वर्तमान में हो रही हल्की बारिश गेहूं और जौ की फसलों के लिए लाभकारी है, लेकिन इसके साथ चलने वाली तेज हवा फसलों को गिराकर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस मौसम में सबसे ज्यादा नुकसान सरसों की फसल को है। इसके अलावा आलू में पछेती झुलसा रोग का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है। इससे बचाव के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम साफ होते ही साइमोक्सानिल और मैनकोजेब का 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करें। बताया कि चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों में जड़ सड़न और उकठा रोग का खतरा है। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि खेतों में जलभराव न हो। रोगों के उपचार के लिए आवश्यकतानुसार ट्राइकोडर्मा पाउडर (4.0 ग्राम प्रति लीटर) अथवा कार्बेन्डाजिम व थायरम (2.5 ग्राम प्रति लीटर) का घोल तैयार कर संक्रमित पौधों की जड़ों के पास मृदा सिंचन करना चाहिए।
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