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Amethi News: ऑडिट होता रहा, करोड़ों रुपये गायब हुए, सिस्टम सोता रहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 25 May 2026 12:38 AM IST
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सिंहपुर। शिवरतनगंज उपडाकघर में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद डाक विभाग की निरीक्षण व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक ऑडिट, निरीक्षण और रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया चलती रही लेकिन सरकारी धन में हो रही सेंध किसी की नजर में नहीं आई।
विभागीय जांच में सामने आया है कि तत्कालीन कार्यवाहक उपडाकपाल जितेंद्र कुमार तिवारी कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर रिकॉर्ड को सही दिखाता रहा। शाखा डाकघरों और शिवरतनगंज उपडाकघर के बीच नकदी लेनदेन में लगातार गड़बड़ी होती रही लेकिन निरीक्षण के दौरान अधिकारी कागजी रिकॉर्ड देखकर संतुष्ट होते रहे।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 से 2022 तक बसंतपुर, कुसुम्भी, अच्छई, खरांवा, लौली, जगतपुर, महिया सेंदुरिया, पेंडरा और कुकहा रामपुर शाखा डाकघरों के खातों में अनियमितताएं होती रहीं। ग्रामीण खाताधारकों, बचत योजनाओं और डाक सेवाओं से जुड़ी धनराशि में हेराफेरी की जाती रही मगर विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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जानकारों के मुताबिक उपडाकघर और उससे जुड़े शाखा डाकघरों के खातों का हर तीन महीने पर मिलान और वार्षिक ऑडिट किया जाता है। इसके बावजूद कई वर्षों तक नकदी और रिकॉर्ड में अंतर समने न आना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है।
हालिया रिकॉर्ड मिलान में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद पुराने अभिलेखों की जांच शुरू हुई तो करोड़ों रुपये के गबन का मामला खुल गया। अब विभागीय कार्यप्रणाली और निरीक्षण व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
विभागीय जांच में सामने आया है कि तत्कालीन कार्यवाहक उपडाकपाल जितेंद्र कुमार तिवारी कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर रिकॉर्ड को सही दिखाता रहा। शाखा डाकघरों और शिवरतनगंज उपडाकघर के बीच नकदी लेनदेन में लगातार गड़बड़ी होती रही लेकिन निरीक्षण के दौरान अधिकारी कागजी रिकॉर्ड देखकर संतुष्ट होते रहे।
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सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 से 2022 तक बसंतपुर, कुसुम्भी, अच्छई, खरांवा, लौली, जगतपुर, महिया सेंदुरिया, पेंडरा और कुकहा रामपुर शाखा डाकघरों के खातों में अनियमितताएं होती रहीं। ग्रामीण खाताधारकों, बचत योजनाओं और डाक सेवाओं से जुड़ी धनराशि में हेराफेरी की जाती रही मगर विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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