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Amethi News: डर का अंत, शक्ति का शंखनाद
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 18 Mar 2026 12:36 AM IST
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय शाहगढ़ में अपराजिता कार्यक्रम के बाद शिक्षिकाओं संग मौज
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अमेठी सिटी। शाहगढ़ स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर में विद्यालय की छात्राओं ने न केवल आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सीखे, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक होने का संकल्प भी लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाकर उनमें स्वावलंबन की भावना जागृत करना था।
प्रशिक्षण के पहले सत्र में जूडो-कराटे प्रशिक्षक सरिता ने छात्राओं को आत्मरक्षा की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का अर्थ संघर्ष नहीं, बल्कि स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छात्राओं को सिखाया गया कि किसी भी असहज स्थिति में घबराने के बजाय मानसिक सजगता से काम लें। प्रशिक्षक ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने, हमलावर की पकड़ से छूटने की तकनीकों का अभ्यास कराया। साथ ही, अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत परिवार को सूचित करने और कानूनी मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
दूसरे सत्र में स्वास्थ्य जागरूकता पर चर्चा हुई। डॉ. शिवानी मौर्य ने बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, स्वच्छ पानी पीने और संतुलित आहार लेने पर जोर दिया। डॉ. अबरार ने छात्राओं को आगाह किया कि वे कमजोरी या बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें। उन्होंने पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का आधार बताया।
सशक्तीकरण की ओर बढ़ते कदम
पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने वाली छात्रा ओं के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती थी। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बेटियां समाज में निडर होकर आगे बढ़ सकेंगी। यह कार्यक्रम बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
जागरूकता से मिलेगी सुरक्षा
वार्डेन कल्पना ने कहा कि बेटियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर बनना समाज के विकास का आधार है। छात्राओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है। हेल्पलाइन नंबर 1090 और 112 की जानकारी भी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता मिल सके।
दोनों सत्रों में सवाल-जवाब
प्रश्न: गर्मी में स्वस्थ कैसे रहें। कोमल, कक्षा-आठ
उत्तर: पर्याप्त पानी पिएं। धूप से बचें और सिर ढककर निकलें।
प्रश्न: राह चलते कोई परेशान करे तो क्या करें। खुशबू, कक्षा-सात
उत्तर: आवाज उठाएं, वहां से हटें और तुरंत भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।
प्रश्न: बीमारियों से बचने का तरीका क्या है। सुधा, कक्षा-छह
उत्तर: स्वच्छ भोजन करें। कुछ भी खाने पीने से पहले हाथ धोएं। नियमित व्यायाम करें।
प्रश्न: बाहर जाते समय क्या ध्यान रखें। आशा, कक्षा-सात
उत्तर: सूनसान रास्तों से बचें। परिवार को जानकारी देकर घर से निकलें। सतर्क रहें।
प्रश्न: डर लगने पर क्या करें। माधुरी, कक्षा-आठ
उत्तर: किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें। अकेले न रहें।
प्रश्न: अचानक तबीयत खराब हो जाए तो क्या करें। कंचन, कक्षा-सात
उत्तर: तुरंत घरवालों को जानकारी दें। आराम करें और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
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प्रशिक्षण के पहले सत्र में जूडो-कराटे प्रशिक्षक सरिता ने छात्राओं को आत्मरक्षा की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का अर्थ संघर्ष नहीं, बल्कि स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छात्राओं को सिखाया गया कि किसी भी असहज स्थिति में घबराने के बजाय मानसिक सजगता से काम लें। प्रशिक्षक ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने, हमलावर की पकड़ से छूटने की तकनीकों का अभ्यास कराया। साथ ही, अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत परिवार को सूचित करने और कानूनी मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
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दूसरे सत्र में स्वास्थ्य जागरूकता पर चर्चा हुई। डॉ. शिवानी मौर्य ने बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, स्वच्छ पानी पीने और संतुलित आहार लेने पर जोर दिया। डॉ. अबरार ने छात्राओं को आगाह किया कि वे कमजोरी या बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें। उन्होंने पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का आधार बताया।
सशक्तीकरण की ओर बढ़ते कदम
पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने वाली छात्रा ओं के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती थी। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बेटियां समाज में निडर होकर आगे बढ़ सकेंगी। यह कार्यक्रम बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
जागरूकता से मिलेगी सुरक्षा
वार्डेन कल्पना ने कहा कि बेटियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर बनना समाज के विकास का आधार है। छात्राओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है। हेल्पलाइन नंबर 1090 और 112 की जानकारी भी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता मिल सके।
दोनों सत्रों में सवाल-जवाब
प्रश्न: गर्मी में स्वस्थ कैसे रहें। कोमल, कक्षा-आठ
उत्तर: पर्याप्त पानी पिएं। धूप से बचें और सिर ढककर निकलें।
प्रश्न: राह चलते कोई परेशान करे तो क्या करें। खुशबू, कक्षा-सात
उत्तर: आवाज उठाएं, वहां से हटें और तुरंत भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।
प्रश्न: बीमारियों से बचने का तरीका क्या है। सुधा, कक्षा-छह
उत्तर: स्वच्छ भोजन करें। कुछ भी खाने पीने से पहले हाथ धोएं। नियमित व्यायाम करें।
प्रश्न: बाहर जाते समय क्या ध्यान रखें। आशा, कक्षा-सात
उत्तर: सूनसान रास्तों से बचें। परिवार को जानकारी देकर घर से निकलें। सतर्क रहें।
प्रश्न: डर लगने पर क्या करें। माधुरी, कक्षा-आठ
उत्तर: किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें। अकेले न रहें।
प्रश्न: अचानक तबीयत खराब हो जाए तो क्या करें। कंचन, कक्षा-सात
उत्तर: तुरंत घरवालों को जानकारी दें। आराम करें और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।