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Amroha News: जिले में और 3211 महिलाओं में मिली खून की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 29 Jan 2026 02:27 AM IST
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अमरोहा। 25 लाख की आबादी वाले अमरोहा जिले में लगातार महिलाओं और युवतियों में खून की कमी देखी जा रही है। एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की जांच में करीब 3211 महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम मिला है। यह आंकड़े तीन महीने की जांच रिपोर्ट में सामने आए हैं। इन महिलाओं में सिर्फ छह से सात ग्राम प्रति डेसीलीटर खून पाया गया है। इसका मुख्य कारण आयरन की कमी और पोषणयुक्त आहार नहीं मिलना सामने आया है। पिछले दिनों हुई जांच में 4216 गर्भवती और 3411 किशोरियों में खून की कमी थी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक स्वस्थ महिला के शरीर में 11 से 14 ग्राम हीमोग्लोबिन होना आवश्यक है, जिसके लिए संतुलित पोषण और आयरन की आवश्यकता होती है। लेकिन उचित आहार नहीं मिल पाने के कारण किशोरियां एनीमिया का शिकार हो रही हैं। यह वजह है कि पिछले दिनों 35251 की जांच में 3211 महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। एसएमओ डॉ. योंगेद्र सिंह ने बताया कि एनीमिया से पीड़ित मिलीं महिलाएं एवं किशोरियों को नियमित उपचार की सलाह के साथ जागरूक किया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाई दी जाती है। उचित खानपान से खून की कमी दूर हो सकती है।
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एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन क्षमता हो सकती है कम
एनीमिया एक सामान्य चिकित्सीय स्थिति है, इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) की संख्या में कमी या रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी देखी जाती है। हीमोग्लोबिन आरबीसी में मौजूद एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से पूरे शरीर में विभिन्न ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे शरीर का समग्र स्वास्थ्य और कामकाज प्रभावित होता है।
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एनीमिया के लक्षण
सीएमओ ने बताया कि एनीमिया के मरीजों में थकान और कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, दिल की धड़कन का असामान्य होना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द के साथ चक्कर आना, हाथों और पैरों का ठंडा पड़ना, सिरदर्द जैसे लक्षण है।
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पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
जिले में पिछले चार वर्षों में गर्भवतियों में खून की कमी का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अप्रैल 2021 से 2022 तक 8,644 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिसमें 440 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गई थीं। अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक 12,524 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 778 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गई थीं। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 15,601 गर्भवतियों की जांच की गई। जिनमें 1467 उच्च जोखिम वाली मिली थीं। अप्रैल 2024 से अब तक करीब 13322 गर्भवती की जांच की गई, जिसमें 1790 गर्भवती उच्च जोखिम वाली मिलीं।
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वर्जन
जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाई दी जाती है। गर्भवतियों में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं। फल सब्जी खाएं, बाहरी खाना खाने से बचें। - डॉ. प्रियंका सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक स्वस्थ महिला के शरीर में 11 से 14 ग्राम हीमोग्लोबिन होना आवश्यक है, जिसके लिए संतुलित पोषण और आयरन की आवश्यकता होती है। लेकिन उचित आहार नहीं मिल पाने के कारण किशोरियां एनीमिया का शिकार हो रही हैं। यह वजह है कि पिछले दिनों 35251 की जांच में 3211 महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। एसएमओ डॉ. योंगेद्र सिंह ने बताया कि एनीमिया से पीड़ित मिलीं महिलाएं एवं किशोरियों को नियमित उपचार की सलाह के साथ जागरूक किया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाई दी जाती है। उचित खानपान से खून की कमी दूर हो सकती है।
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एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन क्षमता हो सकती है कम
एनीमिया एक सामान्य चिकित्सीय स्थिति है, इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) की संख्या में कमी या रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी देखी जाती है। हीमोग्लोबिन आरबीसी में मौजूद एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से पूरे शरीर में विभिन्न ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे शरीर का समग्र स्वास्थ्य और कामकाज प्रभावित होता है।
एनीमिया के लक्षण
सीएमओ ने बताया कि एनीमिया के मरीजों में थकान और कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, दिल की धड़कन का असामान्य होना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द के साथ चक्कर आना, हाथों और पैरों का ठंडा पड़ना, सिरदर्द जैसे लक्षण है।
पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
जिले में पिछले चार वर्षों में गर्भवतियों में खून की कमी का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अप्रैल 2021 से 2022 तक 8,644 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिसमें 440 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गई थीं। अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक 12,524 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 778 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गई थीं। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 15,601 गर्भवतियों की जांच की गई। जिनमें 1467 उच्च जोखिम वाली मिली थीं। अप्रैल 2024 से अब तक करीब 13322 गर्भवती की जांच की गई, जिसमें 1790 गर्भवती उच्च जोखिम वाली मिलीं।
वर्जन
जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाई दी जाती है। गर्भवतियों में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं। फल सब्जी खाएं, बाहरी खाना खाने से बचें। - डॉ. प्रियंका सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ
