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Amroha News: 27 दिनों तक चला था काफूरपुर रेलवे ट्रैक पर जाटों का आंदोलन
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अमरोहा। आरक्षण की मांग को लेकर काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर 27 दिन आंदोलन को धार दी गई थी। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी आंदोलन में अपनी बखूबी भागीदारी दी थी। इस दौरान आंदोलनकारियों ने रेलवे स्टेशन को ही अपना घर बना लिया था। सामूहिक भोज के साथ आंदोलनकारी रागनियां सुनकर आंदोलन को गति दे रहे थे।
पांच मार्च 2011 का दिन था। यशपाल मलिक के नेतृत्व में जाटों ने काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर अपना कब्जा करना शुरू कर दिया था। युवाओं से लेकर अधेड़ तक रेलवे ट्रैक की पटरियों पर जुटना शुरू हो गए थे। पुलिस आंदोलनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास करती, लेकिन कामयाब न हो सकी। तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम व पुलिस अधीक्षक उदय प्रताप सिंह भी मौके पर पहुंच गए थे। स्टेशन के सामने पटरियों पर ही मंच बना दिया था। जैसे-जैसे रात गुजरी स्टेशन का नजारा ही बदलता चला गया।
आंदोलनकारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। स्टेशन पर सामूहिक भोज का आयोजन होता। खेती किसानी का काम निबटाकर किसान रोज आंदोलन को पहुंचते। जाटों ने घरों की तरफ भी जाना बंद कर दिया था। वहीं पर चूल्हा-चौका भी चला। महिलाओं ने रेलवे ट्रैक पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया। आंदोलन के दौरान सुरक्षा के लिहाज से भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात रहता था। आंदोलनकारी जाट पुलिस कर्मियों को भी साथ में ही भोजन कराते थे। आंदोलन के दौरान मनोरंजन के लिए परदे पर रामलीला व महाभारत का भी देखा जाता था।
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2016 में भी सुलगी थी आरक्षण की चिंगारी
अमरोहा। जाट आरक्षण आंदोलन के फिर से मुखर होने के चलते हरियाणा के 7 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई थी। वहीं प्रदेश भर में शांति एवं कानून व्यवस्था बिगड़ने की आंशका के मद्देनजर सात जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां तैनात की गई थी। सोनीपत, भिवानी, झज्जर, रोहतक, हिसार, जींद, कैथल सहित 7 जिलों में धारा-144 लगा दी गई थी। रोहतक, हिसार, झज्जर, भिवानी, कैथल, जींद और सोनीपत में सीआरपीएफ, आरएएफ और बीएसएफ की टुकड़ियां तैनाती की गई थीं। संवाद
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पांच मार्च 2011 का दिन था। यशपाल मलिक के नेतृत्व में जाटों ने काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर अपना कब्जा करना शुरू कर दिया था। युवाओं से लेकर अधेड़ तक रेलवे ट्रैक की पटरियों पर जुटना शुरू हो गए थे। पुलिस आंदोलनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास करती, लेकिन कामयाब न हो सकी। तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम व पुलिस अधीक्षक उदय प्रताप सिंह भी मौके पर पहुंच गए थे। स्टेशन के सामने पटरियों पर ही मंच बना दिया था। जैसे-जैसे रात गुजरी स्टेशन का नजारा ही बदलता चला गया।
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आंदोलनकारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। स्टेशन पर सामूहिक भोज का आयोजन होता। खेती किसानी का काम निबटाकर किसान रोज आंदोलन को पहुंचते। जाटों ने घरों की तरफ भी जाना बंद कर दिया था। वहीं पर चूल्हा-चौका भी चला। महिलाओं ने रेलवे ट्रैक पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया। आंदोलन के दौरान सुरक्षा के लिहाज से भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात रहता था। आंदोलनकारी जाट पुलिस कर्मियों को भी साथ में ही भोजन कराते थे। आंदोलन के दौरान मनोरंजन के लिए परदे पर रामलीला व महाभारत का भी देखा जाता था।
2016 में भी सुलगी थी आरक्षण की चिंगारी
अमरोहा। जाट आरक्षण आंदोलन के फिर से मुखर होने के चलते हरियाणा के 7 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई थी। वहीं प्रदेश भर में शांति एवं कानून व्यवस्था बिगड़ने की आंशका के मद्देनजर सात जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां तैनात की गई थी। सोनीपत, भिवानी, झज्जर, रोहतक, हिसार, जींद, कैथल सहित 7 जिलों में धारा-144 लगा दी गई थी। रोहतक, हिसार, झज्जर, भिवानी, कैथल, जींद और सोनीपत में सीआरपीएफ, आरएएफ और बीएसएफ की टुकड़ियां तैनाती की गई थीं। संवाद
