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Amroha News: गैस संकट से रुके रेलवे स्टेशन पर विकास कार्य
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अमरोहा। अमृत भारत योजना के तहत अमरोहा और गजरौला रेलवे स्टेशनों के जीर्णोद्धार का कार्य तीन साल बाद भी अधूरा है। फिलहाल, अमरोहा स्टेशन पर कामर्शियल गैस की कमी से ओवरब्रिज और लिफ्ट का निर्माण रुका हुआ है, जबकि अन्य कार्य भी धीमी गति से चल रहे हैं। आधा-अधूरा निर्माण होने के कारण यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकारियों की सख्ती के बावजूद निर्माण एजेंसी की लापरवाही से अब तक अमरोहा में केवल 65 और गजरौला में सिर्फ 80 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।
अमरोहा रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2023 से निर्माण कार्य जारी है। स्टेशन पर नया टिकट घर, प्रतीक्षालय, कंट्रोल रूम, शौचालय घर और कैंटीन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन लिफ्ट और ओवरब्रिज का कार्य गैस की कमी के कारण अधूरा पड़ा है। दोनों कार्यों को करने के गैस की जरूरत पड़ती है। कर्मचारियों की माने तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव के चलते गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है इसलिए कामर्शियल सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। जिससे निर्माण कार्य बाधित हो गया है। गैस उपलब्ध होते ही शेष कार्य पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
वहीं, गजरौला रेलवे स्टेशन पर भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। यहां करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। पुराने भवन को ध्वस्त कर नए भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें भारतीय संस्कृति और इतिहास को दर्शाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, स्टेशन के निर्माण की धीमी गति के कारण अब तक कुछ कार्यालय ही बन पाए हैं, जबकि अन्य भवनों पर लिंटर डालने के बाद प्लास्टर का काम भी अधूरा है।
सबसे बड़ी समस्या यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय का नहीं होना है। स्टेशन पर टिनशेड तो बना दिए गए हैं, लेकिन बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। इससे यात्रियों को धूप और बारिश में इधर-उधर भटकना पड़ता है।
रेलवे अधिकारियों द्वारा कई बार निर्माण एजेंसी को फटकार लगाई जा चुकी है, लेकिन इसका असर कार्य की गति पर नहीं दिख रहा है। स्टेशन अधीक्षक केएल कश्यप ने बताया कि अब तक करीब 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुके हैं और शेष कार्य जल्द पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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अमरोहा रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2023 से निर्माण कार्य जारी है। स्टेशन पर नया टिकट घर, प्रतीक्षालय, कंट्रोल रूम, शौचालय घर और कैंटीन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन लिफ्ट और ओवरब्रिज का कार्य गैस की कमी के कारण अधूरा पड़ा है। दोनों कार्यों को करने के गैस की जरूरत पड़ती है। कर्मचारियों की माने तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव के चलते गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है इसलिए कामर्शियल सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। जिससे निर्माण कार्य बाधित हो गया है। गैस उपलब्ध होते ही शेष कार्य पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
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वहीं, गजरौला रेलवे स्टेशन पर भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। यहां करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। पुराने भवन को ध्वस्त कर नए भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें भारतीय संस्कृति और इतिहास को दर्शाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, स्टेशन के निर्माण की धीमी गति के कारण अब तक कुछ कार्यालय ही बन पाए हैं, जबकि अन्य भवनों पर लिंटर डालने के बाद प्लास्टर का काम भी अधूरा है।
सबसे बड़ी समस्या यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय का नहीं होना है। स्टेशन पर टिनशेड तो बना दिए गए हैं, लेकिन बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। इससे यात्रियों को धूप और बारिश में इधर-उधर भटकना पड़ता है।
रेलवे अधिकारियों द्वारा कई बार निर्माण एजेंसी को फटकार लगाई जा चुकी है, लेकिन इसका असर कार्य की गति पर नहीं दिख रहा है। स्टेशन अधीक्षक केएल कश्यप ने बताया कि अब तक करीब 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुके हैं और शेष कार्य जल्द पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।