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Amroha News: आबादी की ओर बढ़ रहा तेंदुओं का कुनबा, ग्रामीणों में दहशत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:59 PM IST
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Leopards are moving towards human settlements, causing panic among villagers.
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अमरोहा। जिले में आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती संख्या लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। गांव-गांव तेंदुए की दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं। तेंदुए केवल खेतों में काम कर रहे लोगों पर हमला नहीं कर रहे हैं, बल्कि घरों के आसपास घूमने वाले पालतू जानवरों को भी शिकार बना रहे हैं।
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पिछले करीब पांच सालों में छह से अधिक तेंदुओं को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा जा चुका है, जबकि 12 से अधिक शावक भी मिले हैं। वहीं आपसी संघर्ष और ग्रामीणों के हमलों में तीन तेंदुओं की मौत हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों की माने तो जिले में करीब 20 तेंदुओं की मौजूदगी है, जो आबादी के आसपास सक्रिय हैं। हाल के दिनों में मंडी धनौरा और नौगावां सादात क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। नौगावां क्षेत्र के दारुद सराय गांव के पास एक भट्ठे पर तेंदुआ देखा गया, जबकि अलीपुर कलां गांव में उसने एक कुत्ते को अपना शिकार बना लिया था।
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इससे पहले भी कई हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। देहरा कादर बक्श गांव में तेंदुए ने ग्रामीण केसरी सिंह पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। वहीं महमदी गांव में मादा तेंदुआ को उसके शावकों के साथ वन विभाग ने बेहोश कर पकड़ लिया था। वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी है। विभाग के पास तेंदुआ पकड़ने के लिए पिंजरे तो हैं, लेकिन आधुनिक उपकरण जैसे ड्रोन कैमरे, ट्रैकिंग डिवाइस और प्रशिक्षित टीमों की कमी है। जरूरत पड़ने पर बाहरी टीमों को बुलाना पड़ता है, जिससे कार्रवाई में देरी होती है। तेंदुए जंगलों के घटते दायरे और भोजन की तलाश में तेंदुए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि तेंदुए बिजनौर की ओर से अमरोहा जिले में प्रवेश करते हैं।
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हमले के बाद ग्रामीणों ने घेरकर मार डाला था तेंदुआ
नौगावां सादात क्षेत्र के कुतुबपुर हमीदपुर गांव में बीते 7 जुलाई की सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब खेत में काम कर रहे एक किसान पर तेंदुए ने हमला कर दिया। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने तेंदुए को घेरकर लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला था। घटना के समय किसान कोविन अपने खेत में टमाटर तोड़ रहा था, तभी अचानक सामने आए तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। शोर सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग बचाव के लिए दौड़े, लेकिन तेंदुआ उन पर भी हमलावर हो गया। इस दौरान छह ग्रामीण घायल हो गए थे। तेंदुए की हत्या के मामले में वन विभाग ने कुतुबपुर हमीदपुर के ग्राम प्रधान के भाई राकेश, धर्मवीर और राजू खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
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अमरोहा में तेंदुओं की बढ़ती मौतें भी चिंता का विषय
- अलग-अलग कारणों से कई तेंदुओं की मौत, वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। जिले में जहां एक ओर तेंदुओं की संख्या बढ़ने से ग्रामीण दहशत में हैं, वहीं दूसरी ओर तेंदुओं की लगातार हो रही मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बनी है। पिछले करीब पांच वर्षों में अलग-अलग कारणों से कई तेंदुओं की मौत हो चुकी है, जिससे वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पांच नवंबर 2025 को मंडी धनौरा क्षेत्र के गांव कपसुवा में एक नर तेंदुए की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत हो गई थी। उसका शव पेड़ पर लटका मिला था। इससे पहले एक नवंबर 2025 को गांव आजमपुर में करीब तीन साल के नर तेंदुए का शव खेत में मिला था, जिसकी मौत का कारण संक्रमण बताया गया था। सात जून 2025 को नौगावां सादात के हमीदपुर गांव में तेंदुए ने खेतों में काम कर रहे छह लोगों पर हमला कर दिया था।
इस घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीटकर तेंदुए को मार डाला था। वहीं दो जून 2025 को मंडी धनौरा के देहरा चक गांव में एक अन्य तेंदुआ मृत अवस्था में मिला था, जिसे देखकर किसान घबरा गए थे। इससे पहले 25 दिसंबर 2024 को नौगावां सादात के नया गांव के पास करीब आठ माह के तेंदुए के शावक का शव मिला था। वन विभाग ने पोस्टमार्टम कराकर जांच की थी। वहीं नौ मई 2023 को बाकीपुर गांव में तेंदुए के जोड़े और उसके शावक को ग्रामीणों ने खेत में घेर लिया था, जहां कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग ने शावक को सुरक्षित पकड़ा था।
एक सितंबर 2021 को अमरोहा देहात क्षेत्र के सुनपुरा गांव में मादा तेंदुए का शव खेत में मिला था, जिससे उस समय भी क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। पिछले दिनों गजरौला में ट्रेन की चपेट में आकर तेंदुए की मौत हो गई थी, वहीं हाईवे पर वाहन की टक्कर लगने से भी तेंदुए का दम निकल गया था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से साफ है कि अमरोहा में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ रहा है। वन विभाग के सामने चुनौती है कि वह न सिर्फ तेंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि ग्रामीणों को भी सुरक्षित रखे।
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