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Amroha News: महायोजना कागजों में कैद, रिंग रोड से ट्रांसपोर्ट नगर तक की अटकी राह
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:43 AM IST
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अमरोहा। शहर के सुनियोजित विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अमृत योजना के तहत तैयार की गई महायोजना (मास्टर प्लान) करीब दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। शहर को जाम, अव्यवस्थित यातायात और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल कागजों तक सीमित है। रिंग रोड, ट्रांसपोर्ट नगर, औद्योगिक क्षेत्र और हरित विकास जैसे बड़े प्रस्तावों पर अभी तक कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो सका है।
शहर के विकास को गति देने के लिए सेंटर फॉर सिंबायोसिस ऑफ टेक्नोलॉजी एन्वायरमेंट एंड मैनेजमेंट (स्टेम) द्वारा अमरोहा और जोया क्षेत्र के 35 गांवों का जीआईएस आधारित सर्वे कराया गया था। इसके आधार पर वर्ष 2031 की संभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए महायोजना तैयार की गई। सर्वे के अनुसार वर्ष 2031 तक अमरोहा की आबादी 4 लाख 13 हजार 820 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी को देखते हुए आवास, परिवहन, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का विस्तृत खाका तैयार किया गया था।
जाम से मुक्ति दिलाने वाली रिंग रोड का इंतजार
अमरोहा की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल यातायात जाम को समाप्त करने के लिए शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव महायोजना का प्रमुख हिस्सा था। इससे भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकता था और लोगों को जाम से राहत मिलती। लेकिन योजना लागू होने के डेढ़ वर्ष बाद भी रिंग रोड निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। न भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई और न ही निर्माण से संबंधित कोई कार्रवाई सामने आई।
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ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक क्षेत्र भी फाइलों में कैद
महायोजना में शहर के बाहर ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य शहर के भीतर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन अभी तक इन दोनों परियोजनाओं पर कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। इससे कारोबारियों और उद्योग से जुड़े लोगों में निराशा है।
अमरोहा का ढोलक उद्योग प्रदेश की ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना में शामिल है। इसके बावजूद अधिकांश उत्पादन कार्य आज भी शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में हो रहा है। लकड़ी कटाई, पॉलिश और अन्य प्रक्रियाओं के कारण प्रदूषण की समस्या भी बनी रहती है। कारोबारी लंबे समय से अलग औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग कर रहे हैं, जिससे उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें और पर्यावरणीय समस्याएं भी कम हों। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल का कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाता है तो ढोलक और लकड़ी हस्तकला उद्योग को नई पहचान मिलेगी। साथ ही कॉटन वेस्ट जैसे प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को भी वहां स्थानांतरित किया जा सकेगा।
महायोजना लागू होने के बाद भूमि उपयोग को विभिन्न श्रेणियों में बांट दिया गया है। आवासीय, व्यावसायिक, हरित पट्टी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि अलग-अलग चिन्हित की गई है। इसके चलते कई श्रेणीबद्ध जमीनों की खरीद-फरोख्त प्रभावित हुई है। जमीन मालिकों को बैनामा कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में भूमि लेनदेन लगभग ठप हो गया है, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
7504 हेक्टेयर क्षेत्र में लागू है महायोजना
महायोजना के अनुसार अमरोहा का विनियमित क्षेत्र 7504.17 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत और हरित क्षेत्रों का अलग-अलग निर्धारण किया गया है। योजना के तहत आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों और व्यावसायिक भूमि पर आवासीय निर्माण की अनुमति नहीं होगी। वहीं पार्क और हरित पट्टी के लिए आरक्षित भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा।
महायोजना में भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए कई प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव रखा गया है। जोया से परिवहन चौराहा तक एसएच-77 को वर्ष 2031 तक छह लेन करने की आवश्यकता जताई गई है। वहीं एनएच-9 को वर्ष 2035 तक छह लेन क्षमता तक विकसित करने की सिफारिश की गई है। अतरासी रोड और अन्य प्रमुख मार्गों को भी चार लेन तक चौड़ा करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा परिवहन चौराहा, लकड़ा चौराहा, मंडी धनौरा चौराहा और अन्य प्रमुख जंक्शनों को आधुनिक ज्यामितीय डिजाइन के अनुरूप विकसित करने की योजना है, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम हो सके।
पैदल यात्रियों और हरियाली पर भी फोकस
महायोजना में पैदल यात्रियों की सुविधाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर 1.8 से 2 मीटर चौड़े फुटपाथ विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में अधिकांश सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा शहर के मनोरंजक और पर्यावरणीय विकास के लिए 484.62 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है। कटकुई क्षेत्र में 36.75 हेक्टेयर में जिला उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव है। वहीं पार्क, खेल मैदान, खेल केंद्र और हरित पट्टियों के विकास के लिए भी पर्याप्त भूमि चिह्नित की गई है।
महायोजना में अमरोहा को आधुनिक, व्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने की व्यापक योजना तैयार की गई है लेकिन इसकी सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर है। करीब दो वर्ष बीतने के बाद भी अधिकांश परियोजनाएं शुरुआती स्तर तक नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कागजों में तैयार विकास का यह खाका आखिर धरातल पर कब उतरता है।
शहर के विकास को गति देने के लिए सेंटर फॉर सिंबायोसिस ऑफ टेक्नोलॉजी एन्वायरमेंट एंड मैनेजमेंट (स्टेम) द्वारा अमरोहा और जोया क्षेत्र के 35 गांवों का जीआईएस आधारित सर्वे कराया गया था। इसके आधार पर वर्ष 2031 की संभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए महायोजना तैयार की गई। सर्वे के अनुसार वर्ष 2031 तक अमरोहा की आबादी 4 लाख 13 हजार 820 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी को देखते हुए आवास, परिवहन, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का विस्तृत खाका तैयार किया गया था।
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जाम से मुक्ति दिलाने वाली रिंग रोड का इंतजार
अमरोहा की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल यातायात जाम को समाप्त करने के लिए शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव महायोजना का प्रमुख हिस्सा था। इससे भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकता था और लोगों को जाम से राहत मिलती। लेकिन योजना लागू होने के डेढ़ वर्ष बाद भी रिंग रोड निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। न भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई और न ही निर्माण से संबंधित कोई कार्रवाई सामने आई।
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ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक क्षेत्र भी फाइलों में कैद
महायोजना में शहर के बाहर ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य शहर के भीतर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन अभी तक इन दोनों परियोजनाओं पर कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। इससे कारोबारियों और उद्योग से जुड़े लोगों में निराशा है।
अमरोहा का ढोलक उद्योग प्रदेश की ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना में शामिल है। इसके बावजूद अधिकांश उत्पादन कार्य आज भी शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में हो रहा है। लकड़ी कटाई, पॉलिश और अन्य प्रक्रियाओं के कारण प्रदूषण की समस्या भी बनी रहती है। कारोबारी लंबे समय से अलग औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग कर रहे हैं, जिससे उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें और पर्यावरणीय समस्याएं भी कम हों। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल का कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाता है तो ढोलक और लकड़ी हस्तकला उद्योग को नई पहचान मिलेगी। साथ ही कॉटन वेस्ट जैसे प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को भी वहां स्थानांतरित किया जा सकेगा।
महायोजना लागू होने के बाद भूमि उपयोग को विभिन्न श्रेणियों में बांट दिया गया है। आवासीय, व्यावसायिक, हरित पट्टी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि अलग-अलग चिन्हित की गई है। इसके चलते कई श्रेणीबद्ध जमीनों की खरीद-फरोख्त प्रभावित हुई है। जमीन मालिकों को बैनामा कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में भूमि लेनदेन लगभग ठप हो गया है, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
7504 हेक्टेयर क्षेत्र में लागू है महायोजना
महायोजना के अनुसार अमरोहा का विनियमित क्षेत्र 7504.17 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत और हरित क्षेत्रों का अलग-अलग निर्धारण किया गया है। योजना के तहत आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों और व्यावसायिक भूमि पर आवासीय निर्माण की अनुमति नहीं होगी। वहीं पार्क और हरित पट्टी के लिए आरक्षित भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा।
महायोजना में भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए कई प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव रखा गया है। जोया से परिवहन चौराहा तक एसएच-77 को वर्ष 2031 तक छह लेन करने की आवश्यकता जताई गई है। वहीं एनएच-9 को वर्ष 2035 तक छह लेन क्षमता तक विकसित करने की सिफारिश की गई है। अतरासी रोड और अन्य प्रमुख मार्गों को भी चार लेन तक चौड़ा करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा परिवहन चौराहा, लकड़ा चौराहा, मंडी धनौरा चौराहा और अन्य प्रमुख जंक्शनों को आधुनिक ज्यामितीय डिजाइन के अनुरूप विकसित करने की योजना है, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम हो सके।
पैदल यात्रियों और हरियाली पर भी फोकस
महायोजना में पैदल यात्रियों की सुविधाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर 1.8 से 2 मीटर चौड़े फुटपाथ विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में अधिकांश सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा शहर के मनोरंजक और पर्यावरणीय विकास के लिए 484.62 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है। कटकुई क्षेत्र में 36.75 हेक्टेयर में जिला उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव है। वहीं पार्क, खेल मैदान, खेल केंद्र और हरित पट्टियों के विकास के लिए भी पर्याप्त भूमि चिह्नित की गई है।
महायोजना में अमरोहा को आधुनिक, व्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने की व्यापक योजना तैयार की गई है लेकिन इसकी सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर है। करीब दो वर्ष बीतने के बाद भी अधिकांश परियोजनाएं शुरुआती स्तर तक नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कागजों में तैयार विकास का यह खाका आखिर धरातल पर कब उतरता है।