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Amroha News: उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दिए 10 लाख रुपये भुगतान के आदेश
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अमरोहा। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने क्लेम नहीं देने के मामले में बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी पाया और दस लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक व मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। बीमा कंपनी को पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा करनी होगी।
मूलरूप से बरेली जनपद की रहने वाले जलील अहमद वर्तमान में रजबपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी मेहरुन निशा ने तीन जून 2023 को एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। इसके बाद 15 अगस्त 2023 को अचानक सीने में दर्द के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद नामिनी जलील अहमद ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2023 को दावा निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पॉलिसी गलत तथ्यों के आधार पर ली गई थी और आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी।
वहीं, तीसरे पक्ष के रूप में शामिल एजेंसी ने स्वयं को केवल मध्यस्थ बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इस मामले में जलील अहमद ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी धारक की मौत के लगभग डेढ़ माह बाद पॉलिसी निरस्त की, जो कि संदेहास्पद है। साथ ही कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी लेते समय कोई तथ्य छिपाया गया था।
लिहाजा आयोग ने इसे रॉन्गफुल ट्रेड प्रैक्टिस और सेवा में कमी मानते हुए स्पष्ट कहा कि बीमा कंपनी ने क्लेम भुगतान से बचने के उद्देश्य से पॉलिसी निरस्त की है। निर्णय में आयोग ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर क्लेम के 10 लाख रुपये वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। संवाद
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मूलरूप से बरेली जनपद की रहने वाले जलील अहमद वर्तमान में रजबपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी मेहरुन निशा ने तीन जून 2023 को एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। इसके बाद 15 अगस्त 2023 को अचानक सीने में दर्द के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद नामिनी जलील अहमद ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2023 को दावा निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पॉलिसी गलत तथ्यों के आधार पर ली गई थी और आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी।
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वहीं, तीसरे पक्ष के रूप में शामिल एजेंसी ने स्वयं को केवल मध्यस्थ बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इस मामले में जलील अहमद ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी धारक की मौत के लगभग डेढ़ माह बाद पॉलिसी निरस्त की, जो कि संदेहास्पद है। साथ ही कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी लेते समय कोई तथ्य छिपाया गया था।
लिहाजा आयोग ने इसे रॉन्गफुल ट्रेड प्रैक्टिस और सेवा में कमी मानते हुए स्पष्ट कहा कि बीमा कंपनी ने क्लेम भुगतान से बचने के उद्देश्य से पॉलिसी निरस्त की है। निर्णय में आयोग ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर क्लेम के 10 लाख रुपये वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। संवाद