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Amroha News: बाढ़ की आशंका में 25 गांवों में 24 घंटे निगरानी, पीएसी और 25 गोताखोर अलर्ट
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अमरोहा। मानसून और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश को देखते हुए संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। फिलहाल प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 1.5 से दो मीटर नीचे सामान्य स्थिति में है, लेकिन अगस्त और सितंबर को संवेदनशील मानते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि जिले में 11 बाढ़ चौकियां और 15 राहत शरणालय तैयार किए गए हैं। धनौरा और हसनपुर तहसील के 25 अतिसंवेदनशील और करीब 75 से 80 संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। एसडीएम और तहसीलदार लगातार इन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। बाढ़ की पूर्व चेतावनी के लिए बिजनौर, हरिद्वार और मेरठ बैराज से पानी के डिस्चार्ज और जलस्तर की पल-पल जानकारी ली जा रही है।
जिला मुख्यालय, तहसील और सिंचाई विभाग स्तर पर 24 घंटे संचालित त्रिस्तरीय कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं। राहत एवं बचाव के लिए पीएसी की 15वीं बटालियन की टीम और 25 स्थानीय कुशल गोताखोरों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नावों के संचालन, खाद्यान्न पैकेट, पशुओं के लिए भूसा, तिरपाल, टेंट, प्रकाश व्यवस्था और पका भोजन उपलब्ध कराने से जुड़े टेंडर भी पूरे कर लिए गए हैं।
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प्रशासन जलभराव और डूबने की घटनाओं के साथ सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है। डीएम ने बताया कि जलस्तर में किसी भी तरह की वृद्धि होने पर संबंधित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जाएगा।
बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने पर गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका
गजरौला। मंगलवार शाम छह बजे बैराज से 1,62,195 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बुधवार सुबह तक जिले में पहुंचने पर जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
मंगलवार सुबह बाढ़ खंड विभाग ने गंगा का जलस्तर 250 मीटर दर्ज किया। रविवार और सोमवार को भी जलस्तर इतना ही था। तीन दिन से जलस्तर 250 मीटर पर ठहरा है। शाम को छोड़ा गया पानी बुधवार सुबह तक पहुंचने की संभावना है।
ऊपर से पानी छोड़े जाने की सूचना से खादर व टापू के गांवों में बेचैनी बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों की परेशानी के साथ उन फसलों पर भी खतरा बढ़ सकता है, जिन्हें पानी कम होने से राहत मिली थी। जेई सुभाष चंद गहलौत ने बताया कि बुधवार तक जलस्तर कुछ बढ़ सकता है। संवाद
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डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि जिले में 11 बाढ़ चौकियां और 15 राहत शरणालय तैयार किए गए हैं। धनौरा और हसनपुर तहसील के 25 अतिसंवेदनशील और करीब 75 से 80 संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। एसडीएम और तहसीलदार लगातार इन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। बाढ़ की पूर्व चेतावनी के लिए बिजनौर, हरिद्वार और मेरठ बैराज से पानी के डिस्चार्ज और जलस्तर की पल-पल जानकारी ली जा रही है।
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जिला मुख्यालय, तहसील और सिंचाई विभाग स्तर पर 24 घंटे संचालित त्रिस्तरीय कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं। राहत एवं बचाव के लिए पीएसी की 15वीं बटालियन की टीम और 25 स्थानीय कुशल गोताखोरों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नावों के संचालन, खाद्यान्न पैकेट, पशुओं के लिए भूसा, तिरपाल, टेंट, प्रकाश व्यवस्था और पका भोजन उपलब्ध कराने से जुड़े टेंडर भी पूरे कर लिए गए हैं।
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प्रशासन जलभराव और डूबने की घटनाओं के साथ सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है। डीएम ने बताया कि जलस्तर में किसी भी तरह की वृद्धि होने पर संबंधित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जाएगा।
बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने पर गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका
गजरौला। मंगलवार शाम छह बजे बैराज से 1,62,195 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बुधवार सुबह तक जिले में पहुंचने पर जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
मंगलवार सुबह बाढ़ खंड विभाग ने गंगा का जलस्तर 250 मीटर दर्ज किया। रविवार और सोमवार को भी जलस्तर इतना ही था। तीन दिन से जलस्तर 250 मीटर पर ठहरा है। शाम को छोड़ा गया पानी बुधवार सुबह तक पहुंचने की संभावना है।
ऊपर से पानी छोड़े जाने की सूचना से खादर व टापू के गांवों में बेचैनी बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों की परेशानी के साथ उन फसलों पर भी खतरा बढ़ सकता है, जिन्हें पानी कम होने से राहत मिली थी। जेई सुभाष चंद गहलौत ने बताया कि बुधवार तक जलस्तर कुछ बढ़ सकता है। संवाद