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Amroha News: हादसे में जान गंवाने वाले मीट विक्रेता की पत्नी को मिलेगा पांच लाख का बीमा क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:24 AM IST
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अमरोहा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले मीट विक्रेता की पत्नी को पांच लाख रुपये बीमा राशि नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्यों के बीमा दावा खारिज करना अनुचित और कानून के विरुद्ध है। साथ ही बीमा कंपनी पर आर्थिक व मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामला तहसील हसनपुर क्षेत्र के लालबाग निवासी मंसूफ से जुड़ा है। मंसूफ सड़क किनारे मीट की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। 25 अप्रैल 2019 को एक सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। वह मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत बीमित थे। उनकी पत्नी रेशमा ने नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने इसे खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि मृतक अविवाहित था और परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य नहीं था, साथ ही दावा समयसीमा में नहीं किया गया। इसके बाद रेशमा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली।
आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह एवं सदस्य अंजू रानी दीक्षित की पीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रस्तुत साक्ष्यों में निकाहनामा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने पाया कि मंसूफ विवाहित थे और रेशमा उसकी पत्नी है। आयोग ने यह भी माना कि मृतक ही परिवार का प्रमुख आजीविका स्रोत थे। आयोग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस जांच रिपोर्ट के मृतक को अविवाहित घोषित करना पूरी तरह गलत है।
साथ ही आयोग ने उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी उन आधारों पर दावा खारिज नहीं कर सकती जो मूल अस्वीकृति पत्र में शामिल नहीं थे। अपने अंतिम आदेश में आयोग ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये की बीमा राशि अदा करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त इस राशि पर वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज भी दिया जाएगा। मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया है। पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा की जाएगी।
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मामला तहसील हसनपुर क्षेत्र के लालबाग निवासी मंसूफ से जुड़ा है। मंसूफ सड़क किनारे मीट की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। 25 अप्रैल 2019 को एक सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। वह मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत बीमित थे। उनकी पत्नी रेशमा ने नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने इसे खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि मृतक अविवाहित था और परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य नहीं था, साथ ही दावा समयसीमा में नहीं किया गया। इसके बाद रेशमा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली।
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आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह एवं सदस्य अंजू रानी दीक्षित की पीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रस्तुत साक्ष्यों में निकाहनामा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने पाया कि मंसूफ विवाहित थे और रेशमा उसकी पत्नी है। आयोग ने यह भी माना कि मृतक ही परिवार का प्रमुख आजीविका स्रोत थे। आयोग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस जांच रिपोर्ट के मृतक को अविवाहित घोषित करना पूरी तरह गलत है।
साथ ही आयोग ने उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी उन आधारों पर दावा खारिज नहीं कर सकती जो मूल अस्वीकृति पत्र में शामिल नहीं थे। अपने अंतिम आदेश में आयोग ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये की बीमा राशि अदा करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त इस राशि पर वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज भी दिया जाएगा। मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया है। पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा की जाएगी।
