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Auraiya News: बिना संसाधन ट्रॉमा सेंटर में पांच डॉक्टर तैनात, एक माह से नहीं आए मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:35 PM IST
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फोटो-14-ट्रॉमा सेंटर के बाहर खाली बैठे डॉक्टर। संवाद
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औरैया। सड़क हादसों में घायलों को त्वरित उपचार देने के उद्देश्य से भगौतीपुर में बना ट्रॉमा सेंटर अभी भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है।
हालात यह हैं कि यहां पांच डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती तो कर दी गई है, लेकिन मशीन आदि संसाधन अभी तक पूरे नहीं है। ऐसे में पिछले एक माह से यहां कोई भी मरीज नहीं लाया गया। हालात यह हैं कि स्टाफ की नियुक्ति कर कागजों में ट्रॉमा सेंटर चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर में अजीतमल, अयाना और सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से पांच चिकित्सकों को तैनात किया है। इनके साथ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय सहित कुल 11 कर्मियों को भी यहां ड्यूटी पर लगाया गया है। सभी कर्मचारी नौ फरवरी से यहां ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक यहां एक भी मरीज का उपचार नहीं हो पाया है।
डॉक्टर रोजाना निर्धारित समय पर ट्रॉमा सेंटर पहुंचते हैं और शिफ्ट खत्म होने तक वहीं रहते हैं, लेकिन मरीज न आने के कारण उन्हें बिना इलाज किए ही वापस लौटना पड़ता है।
स्थिति यह है कि ट्रॉमा सेंटर के बारे में आसपास के लोगों और राहगीरों को जानकारी ही नहीं है। भवन के पीछे बिजली थाना स्थित है, ऐसे में कई लोग इसे बिजली थाना समझकर यहां पहुंच जाते हैं और बाद में बिजली थाना का पता पूछकर चले जाते हैं।
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15 बेड और जनरेटर है, पर चालू नहीं
ट्रॉमा सेंटर में 15 बेड आ गए हैं और जनरेटर भी पहुंच चुका है, हालांकि अभी इसे चालू नहीं किया गया है। फिलहाल यहां सामान्य बिजली कनेक्शन से ही काम चलाया जा रहा है, जिससे केवल पंखे और बल्ब ही चल रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए साल 2019 में हाईवे किनारे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया था। इसका छह नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल लोकार्पण भी किया था, लेकिन इसके बावजूद करीब पांच वर्षों तक यह ट्रॉमा सेंटर सिर्फ भवन तक ही सीमित रहा। अब स्टाफ तैनात होने के बाद भी इलाज शुरू न होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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डिमांड लेटर का नहीं आया कोई जवाब
ट्रॉमा सेंटर को सही ढंग से संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो साल पहले 50 स्टाफ की नियुक्ति का डिमांड लेटर शासन को भेजा था। इसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी के सीमित स्टाफ से इसका संचालन शुरू कराने का निर्णय लिया।
जिलाधिकारी के निर्देश के अनुपालन में यहां चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति तो कर दी गई है, पर संसाधनों का अभाव है, जिस कारण यहां उपचार नहीं हो पा रहा है। अगर यहां कोई मरीज आता भी है तो उसे रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होंगा। ऐसे में इसके संचालन का उद्देश्य समझ से बाहर हो गया है।
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अभी सीएचसी स्टाफ की नियुक्ति कर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था कराई गई है। डॉक्टरों की मांग को लेकर पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही यहां स्टाफ व मशीनें भेजी जाएंगी, ताकि मरीजों का इस सेंटर का लाभ मिल सके।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
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हालात यह हैं कि यहां पांच डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती तो कर दी गई है, लेकिन मशीन आदि संसाधन अभी तक पूरे नहीं है। ऐसे में पिछले एक माह से यहां कोई भी मरीज नहीं लाया गया। हालात यह हैं कि स्टाफ की नियुक्ति कर कागजों में ट्रॉमा सेंटर चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर में अजीतमल, अयाना और सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से पांच चिकित्सकों को तैनात किया है। इनके साथ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय सहित कुल 11 कर्मियों को भी यहां ड्यूटी पर लगाया गया है। सभी कर्मचारी नौ फरवरी से यहां ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक यहां एक भी मरीज का उपचार नहीं हो पाया है।
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डॉक्टर रोजाना निर्धारित समय पर ट्रॉमा सेंटर पहुंचते हैं और शिफ्ट खत्म होने तक वहीं रहते हैं, लेकिन मरीज न आने के कारण उन्हें बिना इलाज किए ही वापस लौटना पड़ता है।
स्थिति यह है कि ट्रॉमा सेंटर के बारे में आसपास के लोगों और राहगीरों को जानकारी ही नहीं है। भवन के पीछे बिजली थाना स्थित है, ऐसे में कई लोग इसे बिजली थाना समझकर यहां पहुंच जाते हैं और बाद में बिजली थाना का पता पूछकर चले जाते हैं।
15 बेड और जनरेटर है, पर चालू नहीं
ट्रॉमा सेंटर में 15 बेड आ गए हैं और जनरेटर भी पहुंच चुका है, हालांकि अभी इसे चालू नहीं किया गया है। फिलहाल यहां सामान्य बिजली कनेक्शन से ही काम चलाया जा रहा है, जिससे केवल पंखे और बल्ब ही चल रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए साल 2019 में हाईवे किनारे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया था। इसका छह नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल लोकार्पण भी किया था, लेकिन इसके बावजूद करीब पांच वर्षों तक यह ट्रॉमा सेंटर सिर्फ भवन तक ही सीमित रहा। अब स्टाफ तैनात होने के बाद भी इलाज शुरू न होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
डिमांड लेटर का नहीं आया कोई जवाब
ट्रॉमा सेंटर को सही ढंग से संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो साल पहले 50 स्टाफ की नियुक्ति का डिमांड लेटर शासन को भेजा था। इसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी के सीमित स्टाफ से इसका संचालन शुरू कराने का निर्णय लिया।
जिलाधिकारी के निर्देश के अनुपालन में यहां चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति तो कर दी गई है, पर संसाधनों का अभाव है, जिस कारण यहां उपचार नहीं हो पा रहा है। अगर यहां कोई मरीज आता भी है तो उसे रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होंगा। ऐसे में इसके संचालन का उद्देश्य समझ से बाहर हो गया है।
अभी सीएचसी स्टाफ की नियुक्ति कर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था कराई गई है। डॉक्टरों की मांग को लेकर पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही यहां स्टाफ व मशीनें भेजी जाएंगी, ताकि मरीजों का इस सेंटर का लाभ मिल सके।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ