{"_id":"6a8205627b36687d1c012cc4","slug":"lower-courts-verdict-upheld-revision-petition-dismissed-auraiya-news-c-211-1-aur1009-149906-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया, रिवीजन याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया, रिवीजन याचिका खारिज
Mon, 17 Aug 2026 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औरैया। चेक बाउंस के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को पूरी तरह विधिसम्मत ठहराते हुए निगरानीकर्ता दीपेंद्र कुमार की क्रिमिनल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है। सहार थाना क्षेत्र के गांव पुरवा दानसहाय निवासी निगरानीकर्ता दीपेंद्र कुमार ने फूहड़ इन्फ्रा रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड में प्लॉट बिक्री की मध्यस्थता के सिलसिले में लखनऊ के एक प्लॉट का बैनामा करवाया था। आरोप था कि इस एवज में विपक्षी गांव जरकाऊ स्थित प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक योगेश चंद्र ने विश्वास में आकर 3,60,000 रुपये का चेक दिया था, जो कि प्राथमिक विद्यालय जरकाऊ की एमडीएम निधि खाते का था।
जब इस चेक को बैंक में लगाया गया, तो पर्याप्त धन न होने और हस्ताक्षर का मिलान न होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके बाद दीपेंद्र कुमार ने 12 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस के बाद तय समय सीमा से पहले ही 11 सितंबर 2025 को निचली अदालत में परिवाद दाखिल कर दिया गया था।
अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन ने 19 नवंबर 2025 को अपने आदेश दिनांक में पाया था कि एनआई अधिनियम के तहत वाद का कारण विपक्षी को नोटिस प्राप्ति के 15 दिन समाप्त होने के बाद यानी 26 सितंबर 2025 को बनता है, जबकि परिवाद उससे पहले ही 11 सितंबर 2025 को दाखिल कर दिया गया था। शर्तों के पूरा न होने के कारण निचली अदालत ने परिवाद खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
सत्र न्यायालय ने 14 अगस्त को मामले की सुनवाई की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने अपने निर्णय में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और रिवीजन याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन
जब इस चेक को बैंक में लगाया गया, तो पर्याप्त धन न होने और हस्ताक्षर का मिलान न होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके बाद दीपेंद्र कुमार ने 12 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस के बाद तय समय सीमा से पहले ही 11 सितंबर 2025 को निचली अदालत में परिवाद दाखिल कर दिया गया था।
विज्ञापन
अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन ने 19 नवंबर 2025 को अपने आदेश दिनांक में पाया था कि एनआई अधिनियम के तहत वाद का कारण विपक्षी को नोटिस प्राप्ति के 15 दिन समाप्त होने के बाद यानी 26 सितंबर 2025 को बनता है, जबकि परिवाद उससे पहले ही 11 सितंबर 2025 को दाखिल कर दिया गया था। शर्तों के पूरा न होने के कारण निचली अदालत ने परिवाद खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
सत्र न्यायालय ने 14 अगस्त को मामले की सुनवाई की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने अपने निर्णय में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और रिवीजन याचिका खारिज कर दी।