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Auraiya News: किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:41 PM IST
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औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेशवर प्रसाद मिश्र ने बिधूना क्षेत्र में करीब छह वर्ष पूर्व एक 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने फिरोजाबाद निवासी विकास को दोषी करार दिया। दोषी को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
वारदात 13 नवंबर 2019 की है। कोतवाली बिधूना में वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जब परिवार के लोग खेत पर काम करने गए थे, तब उसकी 15 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। शाम करीब सात बजे फिरोजाबाद के मोहल्ला भगवान नगर निवासी विकास ने बेटी का अपहरण कर लिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।
सोमवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने किशोरी के साथ हुए इस अपराध के लिए दोषी को कठोरतम दंड देने की वकालत की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि युवक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला है, उस पर दया की जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश अखिलेशवर प्रसाद मिश्र ने विकास को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा कि 35 हजार रुपये का अर्थदंड न भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि जमा की गई अर्थदंड की धनराशि में से 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को दिया जाए। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया है।
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वारदात 13 नवंबर 2019 की है। कोतवाली बिधूना में वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जब परिवार के लोग खेत पर काम करने गए थे, तब उसकी 15 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। शाम करीब सात बजे फिरोजाबाद के मोहल्ला भगवान नगर निवासी विकास ने बेटी का अपहरण कर लिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।
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सोमवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने किशोरी के साथ हुए इस अपराध के लिए दोषी को कठोरतम दंड देने की वकालत की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि युवक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला है, उस पर दया की जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश अखिलेशवर प्रसाद मिश्र ने विकास को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा कि 35 हजार रुपये का अर्थदंड न भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि जमा की गई अर्थदंड की धनराशि में से 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को दिया जाए। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया है।