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Ayodhya News: उमस से महिलाओं में बढ़ रहा संक्रमण, गर्भवती अधिक संवेदनशील
Sun, 12 Jul 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 12 Jul 2026 11:16 PM IST
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वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजूषा पांडेय।
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जीतेश कांत पांडेय
अयोध्या। उमस भरे मौसम में इन दिनों महिलाओं में विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा भी बढ़ा है। खासकर गर्भवती महिलाएं इस मामले में अधिक संवेदनशील हैं। वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजूषा पांडेय के अनुसार, इन दिनों रोजाना करीब 15 महिलाएं संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रही हैं।
डॉ. पांडेय बताती हैं कि बारिश के बाद वातावरण में बढ़ी नमी और उमस से संक्रमण तेजी से फैलता है। इस मौसम में यूटीआई, फंगल और बैक्टीरियल योनि संक्रमण में इजाफा हुआ है। योनि में खुजली, सफेद या पीला स्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायतें इन दिनों आम हैं। संक्रमण बढ़ने पर पेशाब में खून आने, तेज बुखार और सूजन की समस्या भी हो सकती है। साथ ही मासिक धर्म भी अनियमित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि संक्रमण मूत्रमार्ग से शुरू होकर मूत्राशय और फिर किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे गर्भवती महिलाओं और शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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इनसेट
बाहर के भोजन और दूषित पानी से भी खतरा
डॉ. मंजूषा पांडेय ने बताया कि इस मौसम में बाहर का भोजन और दूषित पानी आंतों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ाते हैं। निजी अंगों की नियमित सफाई न रखने से दाद और फंगल संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। नौकरीपेशा महिलाओं को घर से निकलने से पहले और लौटने के बाद निजी अंगों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना नुकसानदायक हो सकता है। गर्भावस्था के पहले तीन महीने शिशु के अंगों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए इस दौरान स्वयं दवा न लें। जिन महिलाओं में एनीमिया या मधुमेह है उनमें संक्रमण का खतरा और अधिक रहता है। बार-बार संक्रमण होने पर कल्चर एंड सेंसिटिविटी जांच कराकर उसी के अनुसार उपचार किया जाता है।
इनसेट
ये लक्षण दिखें तो तुरंत हों सतर्क
-पेशाब में जलन या दर्द, बार-बार पेशाब आना, योनि में खुजली और असामान्य स्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार या पेशाब में खून।
इनसेट
मानसून में ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
भरपूर पानी पिएं, सूती और साफ कपड़े पहनें, निजी अंगों की नियमित सूती कपड़े से सफाई करें, पेशाब न रोकें और साफ शौचालय का ही उपयोग करें, बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें।
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अयोध्या। उमस भरे मौसम में इन दिनों महिलाओं में विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा भी बढ़ा है। खासकर गर्भवती महिलाएं इस मामले में अधिक संवेदनशील हैं। वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजूषा पांडेय के अनुसार, इन दिनों रोजाना करीब 15 महिलाएं संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रही हैं।
डॉ. पांडेय बताती हैं कि बारिश के बाद वातावरण में बढ़ी नमी और उमस से संक्रमण तेजी से फैलता है। इस मौसम में यूटीआई, फंगल और बैक्टीरियल योनि संक्रमण में इजाफा हुआ है। योनि में खुजली, सफेद या पीला स्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायतें इन दिनों आम हैं। संक्रमण बढ़ने पर पेशाब में खून आने, तेज बुखार और सूजन की समस्या भी हो सकती है। साथ ही मासिक धर्म भी अनियमित हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि संक्रमण मूत्रमार्ग से शुरू होकर मूत्राशय और फिर किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे गर्भवती महिलाओं और शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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बाहर के भोजन और दूषित पानी से भी खतरा
डॉ. मंजूषा पांडेय ने बताया कि इस मौसम में बाहर का भोजन और दूषित पानी आंतों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ाते हैं। निजी अंगों की नियमित सफाई न रखने से दाद और फंगल संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। नौकरीपेशा महिलाओं को घर से निकलने से पहले और लौटने के बाद निजी अंगों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना नुकसानदायक हो सकता है। गर्भावस्था के पहले तीन महीने शिशु के अंगों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए इस दौरान स्वयं दवा न लें। जिन महिलाओं में एनीमिया या मधुमेह है उनमें संक्रमण का खतरा और अधिक रहता है। बार-बार संक्रमण होने पर कल्चर एंड सेंसिटिविटी जांच कराकर उसी के अनुसार उपचार किया जाता है।
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ये लक्षण दिखें तो तुरंत हों सतर्क
-पेशाब में जलन या दर्द, बार-बार पेशाब आना, योनि में खुजली और असामान्य स्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार या पेशाब में खून।
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मानसून में ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
भरपूर पानी पिएं, सूती और साफ कपड़े पहनें, निजी अंगों की नियमित सूती कपड़े से सफाई करें, पेशाब न रोकें और साफ शौचालय का ही उपयोग करें, बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें।