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Ayodhya News: 498 वर्ष बाद बदली परंपरा, रामलला की पालकी यात्रा निकली
Mon, 17 Aug 2026 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:20 AM IST
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रामलला की पालकी यात्रा निकली गई।
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अयोध्या। राम मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव नई परंपरा के साथ शुरू हुआ। करीब 498 साल बाद पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव का शुभारंभ किया गया। शनिवार को भगवान रामलला के उत्सव विग्रहों की पालकी यात्रा राम मंदिर से कुबेर टीला तक निकाली गई। कुबेरेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन के बाद पालकी मंदिर लौटी। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला को स्वर्ण-रजत मिश्रित हिंडोले पर विराजमान कर झूला विहार कराया गया।
राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास की अगुवाई में दोपहर चार बजे के बाद पालकी यात्रा निकली। इसमें रामलला अपने तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता जानकी के साथ विराजमान रहे। गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पालकी ने राम मंदिर की परिक्रमा की और परिसर का भ्रमण करते हुए कुबेर टीला पहुंची। धार्मिक आयोजनों के व्यवस्था प्रमुख आचार्य इंद्रदेव मिश्र के निर्देशन में विशेष पूजन-अर्चन के बाद रामलला को कुबेर टीला स्थित प्राचीन वृक्ष पर पड़े झूले पर विराजमान कराया गया। करीब ढाई घंटे तक झूलन के पारंपरिक पदों की प्रस्तुति हुई। इससे राम जन्मभूमि परिसर सावन की लोक संस्कृति से सराबोर नजर आया।
राम मंदिर लौटने के बाद अर्चकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उत्सव विग्रहों को स्वर्ण-रजत मिश्रित हिंडोले पर विराजमान कराया। शयन आरती तक रामलला ने झूला विहार किया। पालकी यात्रा में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत डॉ. रामानंद दास, अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन समेत बड़ी संख्या में संत, ट्रस्ट पदाधिकारी, कर्मचारी और श्रद्धालु शामिल हुए।
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रोज रात 10 बजे तक झूला विहार करेंगे रामलला
आचार्य इंद्रदेव ने बताया कि अब रक्षाबंधन तक प्रतिदिन शृंगार आरती के बाद रामलला झूले पर विराजमान होंगे। मध्याह्न विश्राम के बाद फिर झूला विहार होगा और रात 10 बजे के बाद शयन आरती के साथ प्रभु को विश्राम कराया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु रोज रामलला के झूला दर्शन कर सकेंगे। झूलनोत्सव के दौरान मंदिर में कजरी और अन्य सावन गीतों की प्रस्तुति होगी। इसके लिए अलग-अलग भजन मंडलियों को आमंत्रित किया गया है। श्रद्धालुओं को सावन भर धनिया मिश्रित पंजीरी का प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
क्या बदला है इस बार
-पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव शुरू हुआ और पालकी यात्रा निकाली गई।
-पहले यह उत्सव सावन शुक्ल पंचमी से रक्षाबंधन तक मनाया जाता था।
-रक्षाबंधन तक रोज रामलला झूले पर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
-कजरी-भजन और धनिया मिश्रित पंजीरी प्रसाद झूलनोत्सव के विशेष आकर्षण रहेंगे।
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राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास की अगुवाई में दोपहर चार बजे के बाद पालकी यात्रा निकली। इसमें रामलला अपने तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता जानकी के साथ विराजमान रहे। गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पालकी ने राम मंदिर की परिक्रमा की और परिसर का भ्रमण करते हुए कुबेर टीला पहुंची। धार्मिक आयोजनों के व्यवस्था प्रमुख आचार्य इंद्रदेव मिश्र के निर्देशन में विशेष पूजन-अर्चन के बाद रामलला को कुबेर टीला स्थित प्राचीन वृक्ष पर पड़े झूले पर विराजमान कराया गया। करीब ढाई घंटे तक झूलन के पारंपरिक पदों की प्रस्तुति हुई। इससे राम जन्मभूमि परिसर सावन की लोक संस्कृति से सराबोर नजर आया।
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राम मंदिर लौटने के बाद अर्चकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उत्सव विग्रहों को स्वर्ण-रजत मिश्रित हिंडोले पर विराजमान कराया। शयन आरती तक रामलला ने झूला विहार किया। पालकी यात्रा में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत डॉ. रामानंद दास, अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन समेत बड़ी संख्या में संत, ट्रस्ट पदाधिकारी, कर्मचारी और श्रद्धालु शामिल हुए।
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रोज रात 10 बजे तक झूला विहार करेंगे रामलला
आचार्य इंद्रदेव ने बताया कि अब रक्षाबंधन तक प्रतिदिन शृंगार आरती के बाद रामलला झूले पर विराजमान होंगे। मध्याह्न विश्राम के बाद फिर झूला विहार होगा और रात 10 बजे के बाद शयन आरती के साथ प्रभु को विश्राम कराया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु रोज रामलला के झूला दर्शन कर सकेंगे। झूलनोत्सव के दौरान मंदिर में कजरी और अन्य सावन गीतों की प्रस्तुति होगी। इसके लिए अलग-अलग भजन मंडलियों को आमंत्रित किया गया है। श्रद्धालुओं को सावन भर धनिया मिश्रित पंजीरी का प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
क्या बदला है इस बार
-पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव शुरू हुआ और पालकी यात्रा निकाली गई।
-पहले यह उत्सव सावन शुक्ल पंचमी से रक्षाबंधन तक मनाया जाता था।
-रक्षाबंधन तक रोज रामलला झूले पर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
-कजरी-भजन और धनिया मिश्रित पंजीरी प्रसाद झूलनोत्सव के विशेष आकर्षण रहेंगे।