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Ayodhya News: भक्ति के हिंडोले पर झूमी अयोध्या, सावन मेला शुरू
Mon, 17 Aug 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:25 AM IST
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भगवान के स्वरूप को झूला झुलाते श्रद्धालुगण।
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अयोध्या। सावन की हरियाली, कजरी की मधुर तान, शंख-घंटों की अनुगूंज और जय श्रीराम के जयघोष...। रविवार को रामनगरी ने एक बार फिर अपनी सनातन सांस्कृतिक परंपरा का अनुपम वैभव प्रस्तुत किया। 15 अगस्त को सावन शुक्ल तृतीया से मणिपर्वत पर झूलनोत्सव के शुभारंभ के साथ ही सावन मेले का शुभारंभ हुआ। पूरी अयोध्या भक्ति, संगीत और उल्लास के रंग में सराबोर हो उठी।
अब एक पखवाड़े यानी रक्षाबंधन 28 अगस्त तक रामनगरी में गीत-संगीत व अध्यात्म की त्रिवेणी प्रवाहित होगी। इसमें डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से 10 से 15 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचेंगे। सुबह से ही विभिन्न मठ-मंदिरों में ठाकुरजी के चल विग्रहों का विशेष शृंगार किया गया। चांदी की पालकियों और सुसज्जित रथों पर श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के मनोहारी स्वरूप विराजमान हुए। ढोल-नगाड़ों, मंजीरों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली शोभायात्राओं में साधु-संतों और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्रद्धा की यह धारा विभिन्न मार्गों से होकर मणिपर्वत पहुंची, जहां भगवान को झूला विहार कराया गया और झूलनोत्सव की पारंपरिक शुरुआत हुई।
पांच हजार से अधिक मंदिरों में शुरू हुआ झूलनोत्सव
कनक भवन, श्री मणिराम दास की छावनी, दिव्य शीशमहल, श्रीराम बल्लभाकुंज, अशर्फी भवन, बड़ा स्थान, सियाराम किला, विअहुति भवन, जानकीघाट बड़ा स्थान, लवकुश मंदिर, तुलसीदास जी की छावनी, श्यामा सदन, हनुमत सदन और हनुमत्त निवास सहित रामनगरी के पांच हजार मंदिरों में झूलन की डोर तन गई है। मंदिरों में झूलनोत्सव के साथ सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो चुका है। सावन पूर्णिमा तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन भजन, कजरी, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर करेंगी।
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चांदी की पालकी बनी सबसे बड़ा आकर्षण
कनक भवन से भगवान के चल विग्रहों की चांदी की पालकी में निकली शोभायात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। मार्ग भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा करते रहे और जयघोषों के बीच यात्रा का स्वागत किया गया। मणिपर्वत परिसर में लगे सावन मेले में दिनभर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। दूरदराज से आए भक्तों ने भगवान के झूला विहार के दर्शन किए, मेले का आनंद लिया और खरीदारी भी की। हर ओर भक्ति गीतों, कजरी और झूलों की मधुर छटा वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भरती रही।
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अब एक पखवाड़े यानी रक्षाबंधन 28 अगस्त तक रामनगरी में गीत-संगीत व अध्यात्म की त्रिवेणी प्रवाहित होगी। इसमें डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से 10 से 15 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचेंगे। सुबह से ही विभिन्न मठ-मंदिरों में ठाकुरजी के चल विग्रहों का विशेष शृंगार किया गया। चांदी की पालकियों और सुसज्जित रथों पर श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के मनोहारी स्वरूप विराजमान हुए। ढोल-नगाड़ों, मंजीरों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली शोभायात्राओं में साधु-संतों और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्रद्धा की यह धारा विभिन्न मार्गों से होकर मणिपर्वत पहुंची, जहां भगवान को झूला विहार कराया गया और झूलनोत्सव की पारंपरिक शुरुआत हुई।
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पांच हजार से अधिक मंदिरों में शुरू हुआ झूलनोत्सव
कनक भवन, श्री मणिराम दास की छावनी, दिव्य शीशमहल, श्रीराम बल्लभाकुंज, अशर्फी भवन, बड़ा स्थान, सियाराम किला, विअहुति भवन, जानकीघाट बड़ा स्थान, लवकुश मंदिर, तुलसीदास जी की छावनी, श्यामा सदन, हनुमत सदन और हनुमत्त निवास सहित रामनगरी के पांच हजार मंदिरों में झूलन की डोर तन गई है। मंदिरों में झूलनोत्सव के साथ सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो चुका है। सावन पूर्णिमा तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन भजन, कजरी, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर करेंगी।
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चांदी की पालकी बनी सबसे बड़ा आकर्षण
कनक भवन से भगवान के चल विग्रहों की चांदी की पालकी में निकली शोभायात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। मार्ग भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा करते रहे और जयघोषों के बीच यात्रा का स्वागत किया गया। मणिपर्वत परिसर में लगे सावन मेले में दिनभर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। दूरदराज से आए भक्तों ने भगवान के झूला विहार के दर्शन किए, मेले का आनंद लिया और खरीदारी भी की। हर ओर भक्ति गीतों, कजरी और झूलों की मधुर छटा वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भरती रही।

भगवान के स्वरूप को झूला झुलाते श्रद्धालुगण।

भगवान के स्वरूप को झूला झुलाते श्रद्धालुगण।