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Azamgarh News: बरेली जेल में बंद माफिया अखंड प्रताप सिंह को तीन साल की सजा
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– एफटीसी सीनियर डिवीजन ने सुनाया फैसला, सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगा
– जमानत के बाद पेशी से फरार रहने पर दर्ज हुई थी अवमानना की प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। कोर्ट के आदेश का पालन न करने के मामले में अदालत ने बरेली जेल में बंद माफिया अखंड प्रताप सिंह को तीन वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला एफटीसी सीनियर डिवीजन के जज अतुल पाल ने बुधवार को सुनाया।
तरवां थाने के तत्कालीन उपनिरीक्षक नवल किशोर सिंह ने 19 सितंबर 2019 ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अखंड प्रताप सिंह डकैती सहित हत्या के एक मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा। इसके बाद अदालत ने उसे फरार घोषित कर दिया था। फरारी की घोषणा के बावजूद भी आरोपी पेश नहीं हुआ, जिस पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस की ओर से विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन के नेतृत्व में अभियोजन अधिकारी ने चार गवाहों का परीक्षण न्यायालय में कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अखंड प्रताप सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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38 मामले हैं दर्ज, 1996 में दर्ज हुआ था पहला केस
न्यायालय के आदेश की अवहेलना के मामले में सजा पाए माफिया अखंड प्रताप सिंह का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और संगीन रहा है। तरवां थाना क्षेत्र के जमुवां गांव निवासी अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ पहला मुकदमा वर्ष 1996 में दर्ज हुआ था। उस समय गांव में जमीन विवाद को लेकर अनुसूचित जाति के चार लोगों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से उस पर लगातार आपराधिक मामले दर्ज होते चले गए।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार आजमगढ़ में ही माफिया अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ 25 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गाजीपुर, जौनपुर, मऊ और लखनऊ जनपदों में भी उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है। उस पर 38 संगीन आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। जब कानूनी शिकंजा कसने लगा तो अखंड प्रताप सिंह ने 12 दिसंबर 2019 को आजमगढ़ न्यायालय में सरेंडर किया था। वर्तमान में बरेली जेल में बंद है।
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– जमानत के बाद पेशी से फरार रहने पर दर्ज हुई थी अवमानना की प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। कोर्ट के आदेश का पालन न करने के मामले में अदालत ने बरेली जेल में बंद माफिया अखंड प्रताप सिंह को तीन वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला एफटीसी सीनियर डिवीजन के जज अतुल पाल ने बुधवार को सुनाया।
तरवां थाने के तत्कालीन उपनिरीक्षक नवल किशोर सिंह ने 19 सितंबर 2019 ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अखंड प्रताप सिंह डकैती सहित हत्या के एक मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा। इसके बाद अदालत ने उसे फरार घोषित कर दिया था। फरारी की घोषणा के बावजूद भी आरोपी पेश नहीं हुआ, जिस पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस की ओर से विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन के नेतृत्व में अभियोजन अधिकारी ने चार गवाहों का परीक्षण न्यायालय में कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अखंड प्रताप सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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38 मामले हैं दर्ज, 1996 में दर्ज हुआ था पहला केस
न्यायालय के आदेश की अवहेलना के मामले में सजा पाए माफिया अखंड प्रताप सिंह का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और संगीन रहा है। तरवां थाना क्षेत्र के जमुवां गांव निवासी अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ पहला मुकदमा वर्ष 1996 में दर्ज हुआ था। उस समय गांव में जमीन विवाद को लेकर अनुसूचित जाति के चार लोगों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से उस पर लगातार आपराधिक मामले दर्ज होते चले गए।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार आजमगढ़ में ही माफिया अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ 25 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गाजीपुर, जौनपुर, मऊ और लखनऊ जनपदों में भी उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है। उस पर 38 संगीन आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। जब कानूनी शिकंजा कसने लगा तो अखंड प्रताप सिंह ने 12 दिसंबर 2019 को आजमगढ़ न्यायालय में सरेंडर किया था। वर्तमान में बरेली जेल में बंद है।