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Azamgarh News: भूगोल और अर्थशास्त्र के प्रश्न रहे कठिन, परीक्षार्थियों के लिए समय प्रबंधन बना चुनौती
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चक्रपानपुर। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (यूपीईएसएससी) की ओर से आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी)-2022 भर्ती परीक्षा बुधवार को जिले के 14 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। परीक्षा के बाद बाहर निकले अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी।
अधिकांश परीक्षार्थियों ने पेपर का स्तर सामान्य बताया, जबकि कुछ प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन भी रहे। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अजय कुमार ने बताया कि परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली में 5079 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2630 ने परीक्षा दी, जबकि 2449 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली में 6020 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 3283 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और 2737 ने परीक्षा छोड़ दी। दोनों पालियों को मिलाकर 11099 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें 5913 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 5186 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
इस प्रकार लगभग 47 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा नहीं दी। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम आधारित थे। सोशल साइंस विषय के अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्न पढ़ने में आसान थे, लेकिन उनमें घुमाव और विश्लेषणात्मक प्रकृति अधिक होने के कारण समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा।
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कुछ प्रश्न कठिन थे तो कई अपेक्षाकृत सरल, जिससे प्रश्नपत्र का समग्र स्तर मॉडरेट रहा। डीआईओएस अजय कुमार ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। संवाद
अधिकांश परीक्षार्थियों ने पेपर का स्तर सामान्य बताया, जबकि कुछ प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन भी रहे। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अजय कुमार ने बताया कि परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली में 5079 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2630 ने परीक्षा दी, जबकि 2449 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली में 6020 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 3283 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और 2737 ने परीक्षा छोड़ दी। दोनों पालियों को मिलाकर 11099 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें 5913 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 5186 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
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इस प्रकार लगभग 47 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा नहीं दी। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम आधारित थे। सोशल साइंस विषय के अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्न पढ़ने में आसान थे, लेकिन उनमें घुमाव और विश्लेषणात्मक प्रकृति अधिक होने के कारण समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा।
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