आजमगढ़। जिले में बृहस्पतिवार को महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती जगह-जगह श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस दौरान लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मड़या स्थित शारदा साहित्य परिषद कार्यालय में साहित्यकार प्रभु नारायण पांडेय ‘प्रेमी’ की अध्यक्षता में संगोष्ठी हुई। ‘प्रेमी’ ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। वे न केवल एक महान साहित्यकार थे, बल्कि किसान हितों के प्रबल समर्थक भी थे। उन्होंने बिहार के किसान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी कर उनकी आवाज बुलंद की। उन्होंने बताया कि राहुल जी घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और उन्होंने ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ जैसी महत्वपूर्ण कृति की रचना की।
उस समय, जब यात्रा के साधन सीमित थे, उन्होंने सत्य की खोज में विश्व के अनेक देशों की यात्राएं कीं। ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहां, जिंदगी गर कुछ रही तो, नौजवानी फिर कहां।’ इसी भावना के साथ उन्होंने दुर्लभ ग्रंथों की खोज में हजारों मील तक नदियों और पहाड़ों के बीच यात्रा की और उन ग्रंथों को खच्चरों पर लादकर भारत वापस लाए।
मात्र मिडिल तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने 150 से अधिक ग्रंथों की रचना की। ऐसे महान साहित्यकार की जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने की आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी उनके जीवन और योगदान से परिचित हो सके। संचालन कवि एवं साहित्यकार संजय कुमार पांडेय ‘सरस’ ने किया। संरक्षक फौजदार सिंह ने आभार जताया। इस अवसर पर रिंकू सिंह, राजेश यादव, आशीष सिंह, अवधनाथ सिंह, दिवाकर सिंह एडवोकेट आदि उपस्थित रहे।