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Azamgarh News: औसत से 34 प्रतिशत कम बारिश, धान की फसल पर पड़ेगा असर
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पवई क्षेत्र में लगी धान की फसल। संवाद
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जिले में लक्ष्य के सापेक्ष 1.69 लाख हेक्टेयर में भले ही धान की रोपाई हो गई हो, लेकिन अब किसान फसल को बचाने को लेकर परेशान हैं। औसत से 34 प्रतिशत कम बारिश होने से किसान चिंतित हैं। यही हाल रहा तो धान का विकास नहीं होगा और उत्पादन पर असर पड़ेगा।
खरीफ सीजन में जिले के किसान मुख्य रूप से धान की ही खेती करते हैं। शुरू से ही मानसून की गति धीमी रही, हालांकि निजी संसाधनों से किसी तरह किसानों ने धान की रोपाई तो कर दी, लेकिन अब बारिश न होने से वह परेशान हैं। सामान्य से 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
इससे निजी संसाधनों से सिंचाई पर अधिक खर्च आ रहा है। इससे उनकी जेब ढीली हो रही है। जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने बताया कि जुलाई से अब तक 456 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन 301 मिमी यानी 66 प्रतिशत ही बारिश हुई है।
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पिछले साल 311 मिमी यानी 68 प्रतिशत बारिश हुई थी। अहरौला क्षेत्र के किसान विनोद सिंह और महीपाल यादव ने बताया कि धान को हमेशा पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। किसी तरह से डीजल फूंककर धान की फसल में पानी चलाया जा रहा है।
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नहर में कम पानी आने से सिंचाई प्रभावित
बरदह। शारदा सहायक खंड-23 की लालगंज रजवाहा में पानी तो छोड़ा गया है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण क्षेत्र के करीब 30 गांवों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। छतरपुर, असवनिया, हदीसा, कुडीहर, देवगांव आदि गांवों में पानी खेतों में नहीं पहुंच पा रहा है। किसान जितेंद्र सिंह और महेश राजभर ने बताया कि पहले नहर में पानी न आने से धान की रोपाई करीब एक महीने पीछे हो गई है। सिंचाई विभाग के एसडीओ रितेश कुमार सिंह ने बताया कि नहर में पानी चलाने की प्रक्रिया चल रही है। कल से नहर में पूरा पानी आएगा और लालगंज रजवाहा में करीब 14 दिनों तक पानी चलाया जाएगा।
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धान में हमेशा पानी चाहिए होता है। कम बारिश से खेत में खरपतवार अधिक होंगे और भूरा भुटका कीट का प्रकोप बढ़ जाएगा। यही हाल रहा तो धान का विकास भी कम होगा। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। ऐसे में किसानों को विकल्प के रूप में कम लागत वाले मोटे अनाज की खेती करनी चाहिए। -डॉ. अखिलेश कुमार यादव, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा।
इस बार औसत से करीब 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। किसान धान के खेतों में नमी बनाए रखें। आगे बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।
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खरीफ सीजन में जिले के किसान मुख्य रूप से धान की ही खेती करते हैं। शुरू से ही मानसून की गति धीमी रही, हालांकि निजी संसाधनों से किसी तरह किसानों ने धान की रोपाई तो कर दी, लेकिन अब बारिश न होने से वह परेशान हैं। सामान्य से 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
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इससे निजी संसाधनों से सिंचाई पर अधिक खर्च आ रहा है। इससे उनकी जेब ढीली हो रही है। जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने बताया कि जुलाई से अब तक 456 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन 301 मिमी यानी 66 प्रतिशत ही बारिश हुई है।
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पिछले साल 311 मिमी यानी 68 प्रतिशत बारिश हुई थी। अहरौला क्षेत्र के किसान विनोद सिंह और महीपाल यादव ने बताया कि धान को हमेशा पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। किसी तरह से डीजल फूंककर धान की फसल में पानी चलाया जा रहा है।
नहर में कम पानी आने से सिंचाई प्रभावित
बरदह। शारदा सहायक खंड-23 की लालगंज रजवाहा में पानी तो छोड़ा गया है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण क्षेत्र के करीब 30 गांवों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। छतरपुर, असवनिया, हदीसा, कुडीहर, देवगांव आदि गांवों में पानी खेतों में नहीं पहुंच पा रहा है। किसान जितेंद्र सिंह और महेश राजभर ने बताया कि पहले नहर में पानी न आने से धान की रोपाई करीब एक महीने पीछे हो गई है। सिंचाई विभाग के एसडीओ रितेश कुमार सिंह ने बताया कि नहर में पानी चलाने की प्रक्रिया चल रही है। कल से नहर में पूरा पानी आएगा और लालगंज रजवाहा में करीब 14 दिनों तक पानी चलाया जाएगा।
धान में हमेशा पानी चाहिए होता है। कम बारिश से खेत में खरपतवार अधिक होंगे और भूरा भुटका कीट का प्रकोप बढ़ जाएगा। यही हाल रहा तो धान का विकास भी कम होगा। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। ऐसे में किसानों को विकल्प के रूप में कम लागत वाले मोटे अनाज की खेती करनी चाहिए। -डॉ. अखिलेश कुमार यादव, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा।
इस बार औसत से करीब 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। किसान धान के खेतों में नमी बनाए रखें। आगे बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।