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Azamgarh News: घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ा, तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा
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जलस्तर के बढ़ने से खेतों में भरा पानी। संवाद
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पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है और लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
डिघिया और बदरहुआ नालों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से बाढ़ की आशंका भी बढ़ गई है। बदरहुआ नाले का जलस्तर सोमवार शाम 71.23 मीटर था, जो मंगलवार को 34 सेंटीमीटर बढ़कर 71.57 मीटर हो गया।
वहीं, डिघिया नाले का जलस्तर 70.55 मीटर से 39 सेंटीमीटर बढ़कर 70.94 मीटर हो गया। डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर है। बदरहुआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है।
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घाघरा के जलस्तर में वृद्धि के कारण सहबदिया, महुला, चक्की, द्वारा खास राजा के 28 मजरे, साहडीह, सोनौरा, बांका, बुढ़नपट्टी, अजगरा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। सगड़ी तहसील के उत्तरी क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नालों में भी पानी बढ़ रहा है।
अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से पानी डिस्चार्ज होने के कारण जलस्तर बढ़ रहा है। अगले एक-दो दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने कटान पर नियंत्रण पाने का दावा किया है।
इसके बावजूद पिछले तीन-चार दिनों में करीब 14 बीघा जमीन घाघरा नदी में समा चुकी है। सिंचाई विभाग की ओर से बंबू क्रेट, गैरीबियान और परखू पाइन जैसे उपाय भी कटान रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। सहबदिया गांव के सामने ढाई करोड़ रुपये की लागत से डाले गए परखू पाइन, गैरीबियान और बंबू क्रेट भी नदी में समाहित हो गए।
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बाढ़ चौकियां निष्क्रिय
चिंता की बात यह है कि घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बावजूद महुला-गढ़वल बांध पर स्थापित 10 बाढ़ चौकियों में से एक भी संचालित नहीं हो रही है। मंगलवार दोपहर ढाई बजे महुला से गढ़वल तक निरीक्षण के दौरान किसी भी बाढ़ चौकी पर न तो बोर्ड दिखाई दिया और न ही कोई कर्मचारी मौजूद मिला। इससे बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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71.68 मीटर से ऊपर पहुंचा जलस्तर तो 56 गांव होंगे प्रभावित
प्रशासन के अनुसार, घाघरा का जलस्तर 71.68 से 72.20 मीटर तक पहुंचने पर 56 गांवों की 8,752 आबादी प्रभावित होगी। जलस्तर 72.20 से 73 मीटर तक पहुंचने पर 46 और गांव बाढ़ की चपेट में आएंगे। इससे 63,244 आबादी प्रभावित होगी। वहीं, जलस्तर 73 मीटर से ऊपर पहुंचने पर 32 और गांव प्रभावित होंगे और 65,498 की आबादी पर असर पड़ेगा।
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डिघिया और बदरहुआ नालों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से बाढ़ की आशंका भी बढ़ गई है। बदरहुआ नाले का जलस्तर सोमवार शाम 71.23 मीटर था, जो मंगलवार को 34 सेंटीमीटर बढ़कर 71.57 मीटर हो गया।
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वहीं, डिघिया नाले का जलस्तर 70.55 मीटर से 39 सेंटीमीटर बढ़कर 70.94 मीटर हो गया। डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर है। बदरहुआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है।
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घाघरा के जलस्तर में वृद्धि के कारण सहबदिया, महुला, चक्की, द्वारा खास राजा के 28 मजरे, साहडीह, सोनौरा, बांका, बुढ़नपट्टी, अजगरा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। सगड़ी तहसील के उत्तरी क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नालों में भी पानी बढ़ रहा है।
अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से पानी डिस्चार्ज होने के कारण जलस्तर बढ़ रहा है। अगले एक-दो दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने कटान पर नियंत्रण पाने का दावा किया है।
इसके बावजूद पिछले तीन-चार दिनों में करीब 14 बीघा जमीन घाघरा नदी में समा चुकी है। सिंचाई विभाग की ओर से बंबू क्रेट, गैरीबियान और परखू पाइन जैसे उपाय भी कटान रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। सहबदिया गांव के सामने ढाई करोड़ रुपये की लागत से डाले गए परखू पाइन, गैरीबियान और बंबू क्रेट भी नदी में समाहित हो गए।
बाढ़ चौकियां निष्क्रिय
चिंता की बात यह है कि घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बावजूद महुला-गढ़वल बांध पर स्थापित 10 बाढ़ चौकियों में से एक भी संचालित नहीं हो रही है। मंगलवार दोपहर ढाई बजे महुला से गढ़वल तक निरीक्षण के दौरान किसी भी बाढ़ चौकी पर न तो बोर्ड दिखाई दिया और न ही कोई कर्मचारी मौजूद मिला। इससे बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
71.68 मीटर से ऊपर पहुंचा जलस्तर तो 56 गांव होंगे प्रभावित
प्रशासन के अनुसार, घाघरा का जलस्तर 71.68 से 72.20 मीटर तक पहुंचने पर 56 गांवों की 8,752 आबादी प्रभावित होगी। जलस्तर 72.20 से 73 मीटर तक पहुंचने पर 46 और गांव बाढ़ की चपेट में आएंगे। इससे 63,244 आबादी प्रभावित होगी। वहीं, जलस्तर 73 मीटर से ऊपर पहुंचने पर 32 और गांव प्रभावित होंगे और 65,498 की आबादी पर असर पड़ेगा।