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बागपत: मृतकों और बिना जमीन वालों से भी कागजों में प्राकृतिक खेती करा रहा कृषि विभाग; जानें क्यों किया ये खेल
Mon, 21 Sep 2026 07:01 PM IST
Mohd Mustakim
मुकेश पंवार, बागपत
मुकेश पंवार, बागपत
Published by: Mohd Mustakim
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:01 PM IST
सार
कृषि विभाग के लाभार्थियों की सूची में बैंक मैनेजर, मृतक समेत खेती न करने वालों के नाम भी शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक खेती करने पर चार हजार रुपये की सब्सिडी मिलती है। 1250 किसानों का लक्ष्य पूरा करने के लिए कागजों में गड़बड़ की गई है।
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भूमिहीन किसान लोकेंद्र, राजवीर सिंह और देवेंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में सरकारी नौकरी कर रहे बौढ़ा गांव के सोमपाल खेती नहीं करते हैं, फिर भी प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की कृषि विभाग की सूची में नाम दर्ज है। कुर्डी गांव के किसान हरपाल की दो साल पहले मौत हो चुकी है, मगर वह भी सूची में शामिल हैं। यह केवल दो मामले नहीं हैं, इस तरह लाभार्थियों की सूची में 350 नाम सामने आए हैं, जिनमें भूमिहीन, खेती नहीं करने वाले और मृतक हैं।
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए खेकड़ा में तीन, बागपत में पांच और छपरौली में दो क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 125 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है और इस तरह दस क्लस्टरों में 1250 किसानों को योजना से जोड़ना है।
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किसान प्राकृतिक खेती शुरू कर देते हैं तो उनको रबी और खरीफ फसल के लिए दो-दो हजार रुपये यानी सालाना चार हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। योजना में किसानों का चयन चरणबद्ध तरीके से होता है। पहले कृषि सखी, फिर क्लस्टर प्रभारी और उसके बाद सहायक विकास अधिकारी। कृषि स्तर से प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसके बावजूद सूची में अपात्र लोगों के नाम जोड़कर फर्जीवाड़ा कर दिया गया।
इस तरह होती है प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार घोल का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है।
प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार घोल का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है।
केस-1: कुर्डी निवासी देवेंद्र के नाम कोई कृषि भूमि नहीं है। इसके बावजूद प्राकृतिक खेती योजना की सूची में नाम शामिल कर दिया गया, उनको खुद नहीं पता है कि योजना में नाम कैसे शामिल किया गया।
केस-2: बदरखा गांव के राजपाल ने बताया कि मुझे प्राकृतिक खेती योजना के बारे में विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही इसका प्रशिक्षण मिला। मैंने कभी प्राकृतिक खेती भी नहीं की। इसके बावजूद योजना की सूची में मेरा नाम शामिल कर दिया गया। विभाग ने किस आधार पर मेरा नाम जोड़ा, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
केस-3: नांगल निवासी राजवीर कहते हैं कि मैंने प्राकृतिक खेती नहीं की और न ही इस योजना के तहत कोई लाभ लिया। इसके बावजूद मेरा नाम प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की सूची में दर्ज है। विभाग ने मेरा नाम शामिल किया है तो इसका आधार और सत्यापन रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।
केस-2: बदरखा गांव के राजपाल ने बताया कि मुझे प्राकृतिक खेती योजना के बारे में विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही इसका प्रशिक्षण मिला। मैंने कभी प्राकृतिक खेती भी नहीं की। इसके बावजूद योजना की सूची में मेरा नाम शामिल कर दिया गया। विभाग ने किस आधार पर मेरा नाम जोड़ा, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
केस-3: नांगल निवासी राजवीर कहते हैं कि मैंने प्राकृतिक खेती नहीं की और न ही इस योजना के तहत कोई लाभ लिया। इसके बावजूद मेरा नाम प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की सूची में दर्ज है। विभाग ने मेरा नाम शामिल किया है तो इसका आधार और सत्यापन रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।
ये बोले अधिकारी
जिन किसानों के पास जमीन नहीं है या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उन्हें प्राकृतिक खेती योजना में शामिल नहीं किया जा सकता। डीबीटी के माध्यम से पात्र किसानों को ही योजना का लाभ दिया जाता है। सूची में अपात्र या मृतक किसानों के नाम शामिल हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में कोई दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-विभाति चतुर्वेदी, कृषि उप निदेशक
जिन किसानों के पास जमीन नहीं है या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उन्हें प्राकृतिक खेती योजना में शामिल नहीं किया जा सकता। डीबीटी के माध्यम से पात्र किसानों को ही योजना का लाभ दिया जाता है। सूची में अपात्र या मृतक किसानों के नाम शामिल हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में कोई दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-विभाति चतुर्वेदी, कृषि उप निदेशक