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Baghpat News: जैन मंदिर में महिलाओं के जींस-टॉप, स्कर्ट पहनकर आने पर रोक
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खेकड़ा। बड़ागांव के श्री पार्श्वनाथ प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में महिलाओं व लड़कियों के जींस-टॉप, बरमूडा, स्कर्ट, नाइट सूट, हाफ पैंट पहनकर आने पर रोक लगा दी गई है। मंदिर समिति ने इसके लिए वहां बोर्ड भी लगा दिया है। मंदिर में शूट, साड़ी पहनकर और सिर ढककर आने का आग्रह किया गया है। यह रोक बृहस्पतिवार से लगाई जाएगी।
मंदिर समिति के मैनेजर प्रभास जैन ने बताया कि मंदिर में यह बोर्ड बुधवार को लगाया गया, मगर पहले दिन इसके लिए किसी को ज्यादा कुछ नहीं कहा गया। जिससे महिलाओं व लड़कियों को इसकी जानकारी हो सके और वह बृहस्पतिवार को मंदिर में अपनी संस्कृति के अनुसार ही पहनावे में आएं। प्रभास जैन के अनुसार यह केवल इसलिए किया गया है, जिससे हमारे बच्चे पुरानी संस्कृति को दोबारा से अपना सकें। उनके अनुसार इस समय बच्चे संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और आधुनिकता की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी आधुनिकता पर रोक नहीं होनी चाहिए, मगर धार्मिक स्थलों पर हम संस्कृति को कायम रख सकते हैं।
महिलाओं व लड़कियों के जींस-टॉप, बरमूडा, स्कर्ट, नाइट सूट, हाफ पेंट पहनकर मंदिर में आने पर रोक लगाने का केवल यही कारण है कि उनको संस्कृति से जोड़कर रखना। मंदिर समिति के सदस्य त्रिलोक जैन का कहना है कि यह केवल बोर्ड लगवाया गया है, इसके लिए किसी पर दबाव नहीं दिया गया है। यह धार्मिक स्थलों पर अपनी संस्कृति को लेकर जागरूकता के लिए किया गया है।
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मंदिर समिति के मैनेजर प्रभास जैन ने बताया कि मंदिर में यह बोर्ड बुधवार को लगाया गया, मगर पहले दिन इसके लिए किसी को ज्यादा कुछ नहीं कहा गया। जिससे महिलाओं व लड़कियों को इसकी जानकारी हो सके और वह बृहस्पतिवार को मंदिर में अपनी संस्कृति के अनुसार ही पहनावे में आएं। प्रभास जैन के अनुसार यह केवल इसलिए किया गया है, जिससे हमारे बच्चे पुरानी संस्कृति को दोबारा से अपना सकें। उनके अनुसार इस समय बच्चे संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और आधुनिकता की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी आधुनिकता पर रोक नहीं होनी चाहिए, मगर धार्मिक स्थलों पर हम संस्कृति को कायम रख सकते हैं।
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महिलाओं व लड़कियों के जींस-टॉप, बरमूडा, स्कर्ट, नाइट सूट, हाफ पेंट पहनकर मंदिर में आने पर रोक लगाने का केवल यही कारण है कि उनको संस्कृति से जोड़कर रखना। मंदिर समिति के सदस्य त्रिलोक जैन का कहना है कि यह केवल बोर्ड लगवाया गया है, इसके लिए किसी पर दबाव नहीं दिया गया है। यह धार्मिक स्थलों पर अपनी संस्कृति को लेकर जागरूकता के लिए किया गया है।
