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Baghpat News: उपभोक्ता करते थे बिल जमा, अफसर और कर्मी ठिकाने लगा देते थे रुपये
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बागपत। शहर में ऊर्जा निगम विद्युत उपकेंद्र के काउंटर पर वर्ष 2016 से 2018 तक उपभोक्ता बिल जमा करते रहे और वहां तैनात अफसर बिल के जमा रुपयों को ठिकाने लगाते रहे। वर्ष 2019 में इसका खुलासा होने पर तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल समेत कई के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
शासन ने दोषसिद्ध होने पर गोरखपुर में तैनात तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल को सेवानिवृत्त से एक दिन पहले बर्खास्त कर दिया। 15 मई 2019 को ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार आर्य ने बागपत कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने यमुना रोड स्थित विद्युत उपकेंद्र के तत्कालीन लिपिक सुरेश कुमार, विद्युत उपकेंद्र बागपत के मुख्य खजांची राजीव कुमार गौड़, विद्युत उपकेंद्र बागपत के तत्कालीन उपखंड अधिकारी विकल्प महेश, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल, सहारनपुर जनपद के नकुड़ में तैनात अधिशासी अभियंता राजबीर सिंह के खिलाफ 1.44 करोड़ रुपये गबन करने का आरोप लगाया।
इसमें पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ के एमडी ने पांचों आरोपियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही चार सदस्य टीम गठित कर जांच कराई। इसमें पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद गबन में छह अन्य लोगों के नाम भी सामने आए। जांच में पता चला कि वर्ष 2016 से 2018 तक उपकेंद्र पर जमा हुए बिलों के रुपयों का गबन किया गया है और गबन की रकम बढ़कर 1.69 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल ने 25 रसीद बुक भी वापस नहीं करने का भी जिक्र किया। अब सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाधिकारी ईशपाल पर बर्खास्तगी की कार्रवाई होने से अन्य आरोपियों की परेशानी बढ़ गई है।
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शासन ने दोषसिद्ध होने पर गोरखपुर में तैनात तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल को सेवानिवृत्त से एक दिन पहले बर्खास्त कर दिया। 15 मई 2019 को ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार आर्य ने बागपत कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने यमुना रोड स्थित विद्युत उपकेंद्र के तत्कालीन लिपिक सुरेश कुमार, विद्युत उपकेंद्र बागपत के मुख्य खजांची राजीव कुमार गौड़, विद्युत उपकेंद्र बागपत के तत्कालीन उपखंड अधिकारी विकल्प महेश, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल, सहारनपुर जनपद के नकुड़ में तैनात अधिशासी अभियंता राजबीर सिंह के खिलाफ 1.44 करोड़ रुपये गबन करने का आरोप लगाया।
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इसमें पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ के एमडी ने पांचों आरोपियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही चार सदस्य टीम गठित कर जांच कराई। इसमें पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद गबन में छह अन्य लोगों के नाम भी सामने आए। जांच में पता चला कि वर्ष 2016 से 2018 तक उपकेंद्र पर जमा हुए बिलों के रुपयों का गबन किया गया है और गबन की रकम बढ़कर 1.69 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी ईशपाल ने 25 रसीद बुक भी वापस नहीं करने का भी जिक्र किया। अब सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाधिकारी ईशपाल पर बर्खास्तगी की कार्रवाई होने से अन्य आरोपियों की परेशानी बढ़ गई है।
